आगामी वर्ष 2026 के बिषय में ज्योतिषीय दृष्टि !
इस वर्ष के ग्रहों की स्थिति के अनुसार, देवगुरु बृहस्पति को
‘राजा’ का पद प्राप्त होगा, जबकि ‘मंत्री’ की भूमिका साहस और ऊर्जा के
प्रतीक मंगल देव निभाएंगे। इन दोनों ग्रहों का यह संयोग ज्ञान और पराक्रम
का एक अद्भुत मिश्रण प्रस्तुत करेगा, जो विश्व स्तर पर कई बड़े बदलावों का
संकेत दे रहा है।बृहस्पति के राजा होने के कारण समाज में धर्म, शिक्षा और आध्यात्मिकता
के प्रति झुकाव बढ़ेगा। सामाजिक सुधार और न्याय व्यवस्था के क्षेत्र में
सकारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं, जिससे लोगों का आपसी व्यवहार सहनशील होगा ! नैतिक मूल्यों का
पुनरुत्थान होगा। पूजा-पाठ, धार्मिक आयोजनों और उच्च शिक्षा के क्षेत्रों
में प्रगति देखने को मिल सकती है। यह समय उन लोगों के लिए विशेष रूप से शुभ
होगा | डॉक्टरों वकीलों पत्रकारों बैंक कर्मियों शिक्षकों समेत समस्त बौद्धिक और आध्यात्मिक खोज में लगे लोगों का विशेष उत्थान होगा ।
इस वर्ष का मंत्री मंगल है | इसका प्रभाव कुछ चुनौतियां भी लेकर
आएगा। मंगल की उग्रता के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक अस्थिरता,
तनाव और टकराव की स्थितियां बन सकती हैं। शासक लोग निष्ठुर व्यवहार करने वाले होंगे !कई देशों में सत्ता परिवर्तन या
सैन्य गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। इसके अतिरिक्त, प्राकृतिक
तौर पर अत्यधिक गर्मी तथा कुछ क्षेत्रों में सूखे जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है।
सरकार को अपनी विदेश नीति और आर्थिक मोर्चे पर काफी सतर्क रहने की आवश्यकता
होगी।आर्थिक
सुधार का संकेत है। 2025 की तुलना में 2026 में बाजार में
स्थिरता आएगी।मंगल की उग्रता को गुरु के
विवेकपूर्ण प्रभाव से संतुलित किया जा सकेगा, जिससे विषम परिस्थितियों में
भी उन्नति के रास्ते खुलेंगे। यह समय व्यक्तिगत और सामाजिक विकास के लिए
अत्यंत प्रभावशाली सिद्ध होगा।सरकारों द्वारा कड़े कानून और तानाशाही जैसे फैसलों को बढ़ावा दे सकता है।सामरिक युद्धों की अपेक्षा रण नैतिक युद्धों पर अधिक जोर दिया जाएगा !शासक अपना जुझारूपन प्रकट करने में अधिक रुचि लेंगे !
2026 में समुद्री व्यापार, नेवी (Navy), तेल और फार्मास्युटिकल उद्योगों में बड़े बदलाव और नियम लागू होंगे।
2026 के पूर्वार्ध में देशों के बीच 'जल संधियों' और
व्यापारिक समझौतों पर सहमति बनेगी । लेकिन उत्तरार्ध में, सरकारें अपनी
शक्ति का प्रदर्शन कर सकती हैं। 'राष्ट्रवाद' की भावना प्रबल होगी।
विशेष कर भारत की दृष्टि से देखा जाए तो गुरु के उच्च होने से पराक्रम और लाभ बढ़ेगा । मेड इन इंडिया,
स्पेस टेक्नोलॉजी और रक्षा क्षेत्र में भारत बड़ी उपलब्धि हासिल करेगा। सीमा विवादों पर सरकार को सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं।
इस वर्ष रसहीनता के कारण अन्न के दानों का आकार छोटा एवं हल्का रहजाने से अन्न की उपज कम होगी | सरसों के फूलों में लसी(कीट विशेष) लग जाने से उपज प्रभावित होगी | जिससे तेल का उत्पादन कम होगा !फूलों फलों का उत्पादन अधिक होगा किंतु कीट पतंगों से उनका नुक्सान होगा ! गन्ने पौधों में कीड़े लगने से अधिक नुक्सान हो सकता है | पशुओं में रोग बढ़ेंगे !दुग्ध का उत्पादन कम होगा !व्यापारियों के लिए यह वर्ष अच्छा होगा !
2026 के अप्रैल महीने में प्राकृतिक रोगों की वृद्धि होगी !संभव है इनका वेग अधिक हो !सितंबर के महीने में घृणित गरमी पैदा होगी !जिससे पेट रोग ज्वर,नेत्र रोग की वृद्धि होगी | नवंबर महीने में त्वचा संबंधी रोगों की वृद्धि होगी |
वायुप्रदूषण बढ़ने संबंधी : 27 अक्टूबर 2026 से वायु प्रदूषण बढ़ना प्रारंभ होगा ! 8 नवंबर से 14 नवंबर 2026 के बीच वायु प्रदूषण विशेष अधिक बढ़ जाएगा | इसके बाद कुछ कम होगा !23 से 27 नवंबर के बीच वायुप्रदूषण फिर बढ़ा रहेगा | 7 दिसंबर से 12 दिसंबर के बीच हवाएँ बिल्कुल ठहर जाने के कारण इस समय वायु प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक रहेगा | विशेष बात ये है कि इन समयों में वायु प्रदूषण प्राकृतिक रूप से ही बढ़ेगा |इसमें दीपावली के पटाखों की कोई भूमिका नहीं होगी | इसीलिए पाकिस्तान चीन बाँगला देश म्यांमार जैसे जैसे दीपावली न मनाने वाले देशों में भी इन दिनों में वायु प्रदूषण बढ़ा रहेगा | इस वायु प्रदूषण बढ़ने में पराली जलाने वाहनों उद्योंगों ईंट भट्ठों निर्माण कार्यों से निकलने वाले धुएँ धूल आदि की कोई भूमिका नहीं होगी | यह प्राकृतिक रूप से ही बढ़ेगा |
राजनीति संबंधी :भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के लिए यह वर्ष काफी अच्छा है | उनकी प्रसिद्धि विश्व स्तर पर दिनों दिन बढ़ती जाएगी | इसके लिए उन्हें सन 2026 में कुछ व्यवहारिक सावधानियाँ बरतनी पड़ेंगी | चीन,कनाडा, ब्राजील,जर्मनी,जापान,अर्जेंटीना,अल्जीरिया जैसे देशों की कुछ बातें मानकर उन्हें अपनी कई बातें मनाकर संबंध मधुर बनाए जा सकते हैं | रूस यूक्रेन जैसे देशों की रणनैतिक चालों से सावधान एवं सतर्क रहना श्रेयस्कर होगा | इसलिए मध्यम दूरी के संबंध बनाकर चलना होगा | अमेरिका ब्रिटेन आस्ट्रेलिया कजाकिस्तान जैसे देशों के साथ दूरी बनाकर चलना तो ठीक नहीं होगा !इन देशों के जिन शासकों के हाथ में वर्तमान समय में सत्ता है |वे किसी बिषय में सुबह कुछ बोलेंगे तो शाम को कुछ और बोलने लगेंगे | इसलिए उनके साथ किया गया कोई भी समझौता टिकाऊ नहीं होगा | किसी भी देश से पाकिस्तान के साथ किया गया कभी भी कोई भी समझौता विश्वसनीय नहीं रहेगा | इस देश का स्वतंत्र अस्तित्व समाप्त होने के बाद ही वहाँ की जनता शांति से रह सकेगी |
रूस और यूक्रेन का युद्ध :
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध दो देशों के बीच न होकर दो शासकों के बीच है | यूक्रेन की सत्ता जेलेंस्की के हाथों में आते ही दोनों देश युद्ध की ओर
बढ़ने लगे थे | इसलिए जब तक इन दोनों देशों की बागडोर इन दोनों के हाथ में रहेगी तब तक ये युद्ध यूँ ही चलता रहेगा | इस व्यक्तिगत लड़ाई की कीमत दोनों देशों की जनता को चुकानी पड़ती रहेगी | इस युद्ध को शांत करने के लिए इन दोनों देशों के शीर्ष पदाधिकारियों में से किसी एक को पद त्याग करना होगा |
भारतीय राजनीति :वर्तमान वर्ष में भी नरेंद्र मोदी किसी से कोई भय नहीं है | इतना अवश्य है कि उनकी पार्टी के वर्तमान अध्यक्ष का व्यवहार उनकी राज नैतिक शैली के लिए सहायक नहीं रहेगा | उन्हें समय समय पर इसकी कीमत चुकानी पड़ती रहेगी | जिसमें उनकी कोई दुर्भावना नहीं होगी फिर भी ऐसा होता रहेगा | उन्हें भविष्य में प्रधानमंत्री पद तक पहुँचाने की परिस्थिति बन सकती है |
काँग्रेस में - इस वर्ष भी काँग्रेस में कोई चमत्कार नहीं होने रहा है | सत्ता पक्ष को चुनौती देने से पहले काँग्रेस को खड़ा होना सीखना होगा | जो इस वर्ष में संभव नहीं है |
उत्तर प्रदेश में - -अखिलेश यादव जी के नाम की स्वीकृति अभी तक उनके परिवार में ही नहीं बन पाई है | इस सच्चाई को समझकर अपनी स्वीकार्यता परिवार में बढ़ाए बिना उन्हें प्रदेश की सत्ता तक पहुँच पाना संभव नहीं है | मायावती जी इस वर्ष अपनी पार्टी की पहचान बचाकर रख सकें तो यही उनके लिए बड़ी उपलब्धि होगी |
बिहार में - लालू प्रसाद जी की पार्टी की राजनीति 2025 तक ही थी | इसके बाद धीरे धीरे शांत होते चली जाएगी |तेजस्वी तेजप्रताप यादव का एक दूसरे के साथ मिलकर चलना संभव नहीं है |प्रशांतकिशोर चुनावी राजनीति के लिए एक बार और हिम्मत बाँधकर होंगे | इसके बाद शांत हो जाएँगे | काँग्रेस कहीं है ही नहीं | चिरागपासवान और निशांत कुमार के नेतृत्व में बिहार आगे बढ़ेगा |
महाराष्ट्र में - देवेंद्र जी सत्ता संभालते रहेंगे | यदि वे चुके तो अजीत जी सत्ता पैट पहुँच सकते हैं | एकनाथ शिंदे जी एक बार ही मुख्यमंत्री बन सकते थे वे बन चुके हैं | काँग्रेस शांत है | राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे सत्ता मिलने तक साथ रह सकते हैं | सत्ता पाना आसान नहीं है | दोनों लोगों के बेटों का राजनीति में बर्चस्व बढ़ने के साथ ही यह गठबंधन पूरा हो जाएगा |
पश्चिम बंगाल में - इस वर्ष ममता जी को सत्ता से मुक्ति मिलने का है | इसके बाद भतीजे को उत्तराधिकारी बनाकर वे धीरे धीरे शांत होते चली जाएँगी | कुछ समय बाद ममता जी के नेतृत्व में विपक्ष का पद भतीजा ही सँभालेगा |
दिल्ली में - यहाँ बिना चुनाव के ही सत्ता परिवर्तन की संभावना है | वर्तमान मुख्यमंत्री 2026 को शांति से पार करने का प्रयत्न करना चाहिए |