A- 7\41,शनि बाजार कृष्णा नगर दिल्ली -110051 में 5 दुकानें 3 फ्लोर हैं | इसके फस्टफ्लोर का अपना मीटर न होने के कारण BSES के क्षेत्रीय अधिकारियों की मिलीभगत से फस्टफ्लोर वालों ने दिखाने के लिए एक लावारिस मीटर से कनेक्शन जोड़ रखा था | इस फर्जी नाम ,बिल्डिंग नंबर फ्लोर नंबर से लगे मीटर की आड़ में होती आ रही बिजली चोरी की बार बार कंप्लेन करने पर भी इनके विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की गई न ही ये लावारिस मीटर उतारा गया | ऐसा 16 वर्षों से होता आ रहा है |
पिछले कुछ वर्षों से इस फ्लोर की मालिक रीतूजैन ने इसे महेंद्रजैन को किराए पर दे रखा है |वो इसमें परिवार सहित रहने के साथ साथ बड़ी व्यावसायिक मशीनें भी लगाए हुए है | जिन्हें कारीगर देर देर रात तक चलाकर व्यावसायिक कार्य किया करते हैं | फस्टफ्लोर वाली रीतू जैन ने मीटर में ऐसी हेरा फेरी करवा रखी थी जिससे रीडिंग बहुत कम आती थी | घर में उपयोग की जा रही बिजली एवं मशीनों का लोड इसी लावारिस मीटर पर था किंतु फस्ट फ्लोर वाली रीतूजैन एवं महेंद्रजैन ने मीटर में ऐसी हेरा फेरी कर रखी थी जिससे रीडिंग बहुत कम आती थी |
आवासीय फ्लोर में व्यावसायिक काम का लाइसेंस नहीं था, कन्वर्जन नहीं था, हाउसटैक्स कॉमर्शियल नहीं भरते थे | ऐसी बहुत सारी अनियमितताओं के कारण कंप्लेन करने पर 11जुलाई 2025 को इन्फोर्स वालों ने छापा डाला | व्यावसायिक मशीनें पकड़ी गईं जुर्माना लगाया गया ,इनके यहाँ उपयोग किए जा रहे उस लावारिस मीटर की श्रेणी कॉमर्शियल कर दी गई ,किंतु फरवरी 2026 तक न जुर्माना वसूला गया और न ही उपयोग किया गया बिल जो लगभव 2 लाख रुपए हो चुका था | जिसकी देय तारीख 2 फरवरी थी | 26 फरवरी 2026 को BSES के क्षेत्रीय अधिकारियों की मिलीभगत से इन्फोर्स वालों के द्वारा 11जुलाई 2025 को की गई कार्यवाही पलट कर बिल वसूले बिना ही जीरो कर दिया गया और गैर क़ानूनी रूप से कॉमर्शियल श्रेणी बदलकर डोमेस्टिक कर दी गई |
सी आवासीय
यह लावारिस मीटर विजय कुमार के नाम से लगा है
ज्यादातर अपना कार्य डायरेक्ट बिजली जोड़कर करते रहे हैं |
डायरेक्ट बिजली जोड़कर बिजलीका उपयोग किया जाता रहा है | दिखाने के लिए हमेंशा से चोरी की बिजली से काम चलाया जाता रहा है | बिल्डर का था | उसने फस्टफ्लोर के लिए अपनी आईडी या फ्लोर के कागजों पर कभी कोई बिजली कनेक्शन नहीं लिया था | BSES के क्षेत्रीय अधिकारियों की मिलीभगत से बिल्डिंग के अंदर ही डायरेक्ट कनेक्शन का एक पैनल लगवा रखा था उसी में चिमटी लगाकर दस बारह वर्ष तक बिजली का फ्री उपयोग करते रहे हैं | उन पर लगाए गए जुर्माना आदि बिल्डिंग के नाम डाल दिए जाते रहे हैं | जो नाम बदलवाने या नया मीटर लगवाने पर बिल्डिंग पर बैलेंस बताकर हम सभी लोगों से वसूले जाते हैं या भ्रष्टाचार पूर्वक समझौता करना होता है |वो पैनल अभी भी लगा है | अब उसमें बिजली नहीं है | कुछ वर्ष पहले उन्होंने वह फस्ट फ्लोर रीतूजैन को बेच दिया था | रीतू जैन ने इसमें महेंद्रजैन को किराए पर दिया वह परिवार के साथ इसमें रहने के साथ साथ बड़ी व्यावसायिक मशीनें भी लगाए हुए है | कारीगर हैं जो आफिस टाइम के अलावा देर देर रात तक चलाई जाती हैं | आवासीय व्यावसायिक मशीने चलाना गैर कानूनी है | इसलिए इसमें अपने एवं अपने फ्लोर के नाम से नया कनेक्शन न लेकर BSES के क्षेत्रीय अधिकारियों की मिलीभगत से एक ऐसे लावारिस मीटर से कनेक्शन जोड़ा गया | जिसके बिल पर पंजीकृत नाम एड्रेस आदि पूरी तरह फर्जी है | वो ये है -
एक वर्ष के अंदर एक लावारिस मीटर की 4 बार श्रेणी बदला जाना, 2 बार मीटर बदला जाना, 2 बार इन्फोर्समेंट की रेड पड़ना | पेनाल्टी बिल माफ किया जाना, नित्य उपयोग किया जा रहा बिल माफ किया जाना, 2 बार व्यावसायिक मशीनें चलते रहने के बाद भी कमर्शियल मीटर हटाकर डोमेस्टिक मीटर लगा दिया जाना BSES के काम काज में व्याप्त पद दुरुपयोग ,पक्षपातपूर्ण कार्य संचालन एवं भ्रष्टाचार पूर्ण कार्यशैली का संशय पैदा करता है |
भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार फिर भी न कहीं
CA No. 100907780 VIJAY KUMAR, S/O Mr. KULDEEP KUMAR A-7/41/2-A,G/F KRISHNA NGR DELHI NEAR SHANI BAZAR DELHI--110051")
इस मीटर को लगाने से लेकर उतारने तक पद का दुरुपयोग ,नियमों का उल्लंघन , भ्रष्टाचार आदि सबके परोक्ष प्रमाण हैं | बिजली बिलों कागजों को देखकर यह मीटर लगाने लगवाने वाले दोनों के द्वारा किया गया नियमों का उल्लंघन सामने आ जाता है | बार बार कंप्लेन करने बाद भी इसमें कहीं पारदर्शिता नहीं वर्ती गई | इस मीटर पर पंजीकृत एड्रेस पूरी दिल्ली में कहीं नहीं है | बिल्डिंग नंबर में A-7/41/2-A इसमें A-7/41 है किंतु इसका 2-A पार्ट कहीं नहीं है | यदि ये बिल्डिंग नंबर ही गलत है तो इसपर लिखा ग्राउंडफ्लोर भी गलत ही है |
1. A-7/41/2-A कोई बिल्डिंग नहीं है और A-7/41 नंबर बिल्डिंग के ग्राउंडफ्लोर पर रहने की जगह नहीं है |इस बिल्डिंग में विजय कुमार न है न पहले कभी रहा है | किसी रजिस्ट्री या एग्रीमेंट में विजय कुमार नाम नहीं है , विजय कुमार का आधार कार्ड नहीं है | यह मीटर लगाने के लिए विजय कुमार ने न कहीं साइन किए न ही मीटर लगाने के लिए आवेदन दिया | इस सबके बिना यह मीटर लगाया और लगवाया कैसे गया ? जिसने लगाया और जिसने लगवाया और इतने वर्षों से जिस फ्लोर में जो उसका उपयोग करता आ रहा है | इतने नियमों का उल्लंघन करके वे निर्दोष कैसे हो सकते हैं ?
2. विजयकुमार की रजिस्ट्री, आधार कार्ड,साइन और विजयकुमार के आवेदन किए बिना ही इस मीटर को फरवरी 2026 में कामर्शियल से डोमेस्टिक कैसे कर दिया गया ?
3. विजयकुमार की रजिस्ट्री, आधार कार्ड,साइन और विजयकुमार के आवेदन किए बिना 23 जून 2026 को विजयकुमार का पुराना मीटर हटाकर विजयकुमारके नाम से ही नया मीटर कैसे लगाया गया ?
4. 11 जुलाई 2025 से बकाया उपयोग किया हुआ बिल Rs 48930 है और इसी बिल में इंफोर्स्मेंट का बिल 1,33,541.10 बकाया लिखा गया है | दोनों मिलाकर ये बिल 1,82,471 होता है |इसके जमा करने की ड्यू डेट 2 फरवरी 2026 थी | विजयकुमार की रजिस्ट्री, आधार कार्ड,साइन और विजयकुमार के द्वारा माफ करने के लिए किए गए आवेदन के बिना ये बिल माफ कैसे किया गया ? यदि माफ नहीं तो ये बिल जमा किए बिना उसी फ्लोर में रीतूजैन के नाम से नया मीटर कैसे लगाया या लगवाया गया ?
5. 24 मार्च 2026 को इंफोर्स्मेंटविभाग ने दोबारा छापा डाला | व्यावसायिक मशीनें चलती पकड़ी गईं | इसलिए जुर्माना लगाया गया |वो जुर्माना और उपयोग किया गया बिल जमा किया गया या नहीं | 10 अगस्त 2026 को नया मीटर लगा दिया गया |
6 . इन्फोर्समेंट वालों ने 11 जुलाई 2025 को रीतूजैन के फ्लोर पर छापा डाला तो व्यावसायिक मशीनें चलती पकड़ी गईं | इसके बाद 24 मार्च 2026 को छापा डाला तो व्यावसायिक मशीनें चलती पकड़ी गईं | A -7 \41 में कैमरे लगे हैं इसके सामने वाली बिल्डिंग में कैमरे लगे हैं | ये बड़ी व्यावसायिक मशीनें निकाली जाते देखी नहीं गईं |कारीगर लगातार आते रहे | मशीनें चलती ही रहीं तबी भी 26 फरवरी 2026 को कॉमर्शियल मीटर डोमेस्टिक कैसे कर दिया गया और 10 अगस्त 2026 को विजय कुमार नाम का कॉमर्शियल मीटर हटाकर रीतूजैन के नाम का डोमेस्टिक मीटर कैसे लगा दिया गया ? कॉमर्शियल मीटर हटाकर कॉमर्शियल मीटर ही क्यों नहीं लगाया गया ?
7. मीटर विजय कुमार नाम के इस लावारिस मीटर से रीतूजैन के घर में व्यावसायिक मशीनें चली जाती रहीं और घर के A C कूलर आदि भी चलते रहे बिल ज्यादा न आवे इसलिए डायरेक्ट भी बिजली जुड़ी रही | बिजली चोरी पकड़ी न जाए | इसलिए 22 जून 2026 को विजय कुमार नाम वाला मीटर उतार कर 23 जून 2026 को विजय कुमार के नाम से ही नया मीटर लगाकर बिजलीचोरी का पिछला रिकार्ड ख़त्म करके रीतूजैन के नाम से 10 अगस्त 2026 को नया मीटर लगा दिया गया |यही करना था तो 10 अगस्त की जगह 23 जून 2026 को भी तो रीतूजैन के नाम से नया मीटर लगाया जा सकता था लेकिन उसमें बिजली चोरी का पुराना रिकार्ड चेक हो जाता |
उसमें उपयोग किया हुआ बिल Rs 48930 है और इसी में इंफोर्स्मेंट का बिल 1,33,541.10 बकाया लिखा गया है | दोनों मिलाकर ये बिल 1,82,471 होता है |
नाम का की रजिस्ट्री, आधार कार्ड,साइन और विजयकुमार के आवेदन किए बिना
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यह मीटर विजय कुमार नाम से पंजीकृत है | इस बिल्डिंग से संबंधित
बिल्डिंग ही नहीं है
A-7/41 G/F
1. इस मीटर पर पंजीकृत एड्रेस पूरी दिल्ली में कहीं नहीं है,फिर यह फर्जी एड्रेस का मीटर लगाया और लगवाया कैसे गया ?
BSES से संबंधित भ्रष्टाचार की बार बार कंप्लेन करने के बाद भी इनके विरुद्ध न जाँच हुई न कोई कार्यवाही की गई | BSES के द्वारा बनाए गए नियमों का पालन यदि BSES के अधिकारी ही नहीं करेंगे तो उपभोक्ताओं से ऐसी अपेक्षा कैसे की जा सकती है | जो BSES अन्य उपभोक्ताओं नियमों के नाम पर इतना कठोर व्यवहार किसी एक व्यक्ति के लिए सारे नियमों को उल्लंघन कैसे कर सकता है |
ये एड्रेस जिस बिजली बिल पर पंजीकृत है | हम इसके बिषय में जानना चाहते हैं |