रविवार, 30 अगस्त 2026

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 तनाव कभी नहीं होगा , जानिए कैसे !

      मनुष्यों के तनाव का कारण वे व्यक्ति हैं जो जैसा हम चाहते हैं ,वैसा नहीं करते हैं | तनाव का कारण वे परिस्थितियाँ हैं जिन्हें जैसा हम रखना चाहते हैं वे वैसी नहीं रहती हैं | उसी दुःख से सभी मनुष्य दुखी हैं | जिस दुःख का बोझ जीवन भर ढोते रहते हैं | समय बदलता रहता है | समय के साथ सब कुछ बदलता है | समय के साथ मनुष्यों का स्वभाव बदलता है |  सोच बदलती है | व्यवहार बदलता है |  परिस्थितियाँ बदलती हैं | कभी सुख तो कभी दुःख मिलता है | सफलता असफलता मिलती है | संबंध बनते बिगड़ते हैं | स्वास्थ्य बदलता है | पद प्रतिष्ठा मिलती है | |  मनुष्यों के सुख दुःख का कारण समय ही है | यदि हम किसी व्यक्ति के व्यवहार से दुखी हैं या परिस्थिति दुखी हैं तो हमारे यहाँ से आपको पता  कर   लेना चाहिए कि ऐसा समय  या ऐसी परिस्थिति कब तक रहेगी  | इससे बचने के लिए हमें क्या करना होगा  | वैसा करके हम  आनंदित हो सकते हैं | 

     पत्नी चाहिए या पत्नीसुख !या दोनों ?                             

        बहुत लोग ऐसे हैं जिनके पत्नी तो है किंतु पत्नी सुख नहीं है | उन दोनों के पिता के पास संपत्ति अधिक थी सुख सुविधाएँ अधिक थीं व्यापार स्थापित था | ये सब कुछ मिलाकर उन दोनों का  दिया गया | यह देखा ही नहीं गया कि इन दोनों को पति पत्नी के रूप में एक दूसरे का सुख है या नहीं | ऐसी परिस्थिति में साथ एक दूसरे के रह रहे हैं खाना पीना साथ साथ कर रहे हैं | सुख सुविधाएँ एक जैसी हैं किंतु एक दूसरे के प्रति समर्पण इसलिए नहीं है क्योंकि एक दूसरे का सुख एक दूसरे को नहीं है | दूसरी ओर कई बाबा हैं जिनके पत्नी तो नहीं है किंतु दूसरों की पत्नियों का समर्पण सुख प्राप्त है | वही स्त्रियाँ जिन्हें पति की अच्छी बात भी बुरी  लगती है | उन्हें ही उन बाबाओं की बुरी बातें भी अच्छी लगती हैं | महाराष्ट्र के उस बाबा को कितनी स्त्रियों का समर्पण प्राप्त था | उनका विवाह जिनके साथ हुआ था | उन्हें उनका समर्पण सुख नहीं मिला | यदि आप भी विवाह करने की सोच रहे हैं और जानना चाहते  हैं कि आप जिससे विवाह कर  रहे हैं उसका पति या पत्नी के रूप में आपको समर्पण भी प्राप्त होगा या नहीं | यह जानने के लिए आपको हमारे यहाँ समय रहते संपर्क कर लेना चाहिए | 

 संतान चाहिए या संतान सुख ! या दोनों ?

    जिसके संतान ही न हो रही हो उसे संतान का सुख भी नहीं होगा किंतु कुछ लोगों को संतान होती है लेकिन संतान सुख नहीं होता है | ऐसे  लोग यदि प्रयत्न पूर्वक संतान पा भी जाते  हैं तो भी संतानहीनों की तरह ही जीवन जीते हैं | दशरथ जी को बहुत प्रयत्न के बाद संतान हुई और वे भी साक्षात् परमात्मा ही संतान के रूप में प्रकट हुए | 4 पुत्र हुए किंतु मृत्यु के समय उनके पास चार में से एक पुत्र भी नहीं था | पहले तो बुढ़ापे तक संतान नहीं हुई और जब संतान हुई तो पहले विश्वामित्र जी के साथ भेजना पड़ा और बाद में बनवास के लिए भेजना पड़ा | दूसरी ओर जटायु जी के संतान नहीं थी किंतु उनकी मृत्यु के समय उन्हें पुत्र रूप में श्री राम मिले | जिन्होंने उनकी अंतक्रिया भी की | इस प्रकार से दशरथ जी को पुत्र रूप में परमात्मा मिले और जटायु जी को परमात्मा रूपी पुत्र का सुख  मिला | इस समय भी बहुत लोगों के पास पुत्र हैं किंतु पुत्र सुख नहीं है ऐसे लोग भारी भरकम संपत्ति होने के बाद भी दर दर की ठोकरें खाते घूम रहें हैं | वृद्धाश्रमों में शरण ले रखी है | यदि आप भी जानना चाहते हैं कि आपकी संतानें आपको संतान का सुख देंगी या नहीं तो आप मेरे यहाँ संपर्क करके यह पता लगा सकते हैं जिससे युवा अवस्था में ही आप अपने लिए उस प्रकार का प्रबंध कर सकते हैं | 

 घर है किंतु उस घर का सुख आपको है या नहीं ?

    बहुत  लोग हैं जिनके पास सब  सुख सुविधाओं से संपन्न अनेकों मकान हैं | इसके बाद भी उनका वहाँ मन  नहीं  लगता है | केवल मन लगाने के लिए वे अनेकों देशों प्रदेशों में नदियों पहाड़ों में धक्के खाते घूमते  रहते हैं | अपने घर में घुसते ही उनका मन उदास होने लगता है| अपने घर का शुद्ध भोजन सामग्री से बना भोजन छोड़कर होटलों का जूठा अनूठा अच्छा बुरा खाना खाते घूम रहे होते हैं |कई बार तो वो रेडियों फुटपाथों पर मिलने वाला घटिया खाना खाकर प्रसन्न होते हैं किंतु घर के बने शुद्ध स्वास्थ्यकर खाने में उन्हें स्वाद नहीं आता है | ये वे भी जानते हैं कि ऐसा खाना स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं होता है | वे कहते भी हैं कि रोज रोज होटल का खाना खाने से स्वास्थ्य ख़राब हो जाता है फिर भी खाते हैं | जिन्हें अपने घर का सुख नहीं है वे दूसरों के घरों होटलों रेडियों फुटपाथों पर रहते खाते पीते दर दर भटक रहे होते हैं | यदि आप भी जानना चाहते हैं कि आपको अपने घर का सुख है या नहीं तो आप भी हमारे यहाँ संपर्क करके पता कर सकते हैं | 

    वास्तु दोष मतलब क्या कैसे शांत होगा वास्तु दोष ! 

 वास्तु दोष न होने से यदि तरक्की होती होती तो उन घरों में रहने खाने और काम करने वाले नौकरों का भी भाग्य बदल जाता | रईस लोग शुरू में एक कमरे में रहकर कोठियों तक पहुँचे तब वास्तु दोष होने पर भी नहीं था और जब कोठियों में पहुंचे तो वास्तु दोष |

   समय ठीक हो तो सबकुछ ठीक हो जाता है !  

 

 

    संतान चाहिए तो ऐसा करें तब होगी संतान !

    वृक्ष भी कितने भी हरे हरे क्यों न हों उनमें भी समय आने पर ही फूल फल  लगते हैं | ऐसे ही स्त्री पुरुषों को भी संतान की प्राप्ति तभी होती है जब उनका संतान होने लायक समय आता है | उससे पहले वे कितनी भी चिकित्सा करवा लें | कितने भी बार  I V F करवा लें फिर भी संतान नहीं होती | I V F भी तभी सफल होता है जब संतान होने लायक समय आता है | पति पत्नी  दोनों का संतान होने लायक समय जब एक साथ आता है तब  संतान होती है | बहुत लोग कई कई बार I V F करवाकर भी बार बार असफल हुए |इसके बाद  निराश हताश हो हमारे यहाँ आए | मैंने उन दोनों का संतान होने लायक समय खोजा उस प्रकार का परामर्श दिया | इसके बाद उन्हें संतान हुई है | आप या आपके संपर्क में भी यदि ऐसे हैरान परेशान लोग हैं तो आप उन्हें हमारे यहाँ संपर्क करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं |  

 

  

     संतान होने या  न होने का कारण होता है समय !जिस पति पत्नी के के शरीरों में ऐसी कोई कमी न हो जो संतान होने में बाधक बन रही हो फिर भी संतान न हो रही है | इसका मतलब होता है |उनका संतान होने लायक अभी समय नहीं आया है |ऐसे समय कुछ लोग कई कई बार I V F करवाकर भी असफल होते देखे जाते हैं |


समय से पहले हरे भरे वृक्ष समय का सहयोग न मिले तो कितने भी  प्रयत्न कर लिए जाएँ फिर भी संतान तब तक नहीं होगी जब तक संतान होने लायक समय नहीं आ जाएगा |  

के संतान न होने का कारण उन दोनों का या उनमें से किसी एक का समय है अपना  उनमें ऐसी क्या कमी है | वो ठीक कर ली जाए तो उन्हें संतान हो जाएगी | संतान होने के लिए पहला कारण उस पति पत्नी का शरीर स्वस्थ होना आवश्यक होता है | कई बार पति पत्नी के शरीर स्वस्थ होने पर भी संतान नहीं होती है | ऐसे लोगों पर I V F जैसे प्रयोग भी असफल हो जाते हैं | कुछ लोग तो सात आठ बार I V F होने  पर भी असफल रहते हैं फिर भी उन्हें संतान नहीं होती है | इसका कारण उन दोनों का संतान होने लायक समय एक साथ न मिलना होता है |

   चिकित्सा  समय और संतान  

   चिकित्सकों का काम शरीरों को स्वस्थ करना होता है बच्चे पैदा करना नहीं | बच्चा पैदा होने  में कोई शारीरिक बाधा आ रही हो तो उसे चिकित्सक ठीक कर सकते हैं किंतु पति पत्नी के स्वस्थ हों फिर  भी संतान न हो  रही हो तो इसका मतलब संतान होने का समय ही नहीं आया है | संतान होने लायक समय आने के लिए चिकित्सक क्या कर लेंगे |वे IVF आदि करके समय भले पास करवा दें बाक़ी संतान तो अपने समय पर ही होगी |हमारे यहाँ से कई ऐसे लोगों को संतान हुई है जो कई कई बार IVFकरवा चुके थे फिर भी संतान नहीं हुई| यदि IVF तकनीक से संतान हो सकती होती तो उन्हें हो जानी चाहिए थी किंतु नहीं हुई जब संतान होने का समय आया तभी संतान हुई | संयोग से उसी समय  IVF की प्रक्रिया चल रही होती है तो समय के सहयोग से हुई संतान को भी  IVF से हुई  है | ऐसा मान लिया जाता है |यदि हरे भरे  पेड़ों पौधों में भी समय से पहले फूल फल नहीं लगते हैं तो समय  पहले किसी को संतान कैसे हो सकती है | 

किंतु समय आने से पहले वो फूलता फलता नहीं है | ऐसे ही पति पत्नी के शरीर स्वस्थ होने पर उन्हें संतान हो ये आवश्यक नहीं है | इसीलिए कुछ लोग तो कई कई बार  I V F जैसी अत्यंत कष्टदायक  खर्चीली  प्रक्रिया का पालन करने के बाद भी  संतान लाभ  नहीं ले पाते  हैं |इसका कारण पति पत्नी दोनों का समय संतान होने लायक नहीं होता है | कई बार उन दोनों में से किसी एक का समय संतान होने लायक नहीं होता है | कभी कभी संतान होने लायक समय जब पति का आता है तब पत्नी का नहीं  होता है और जब पत्नी का होता है तब पति का नहीं होता है | संतान होने के लिए उन दोनों का संतान होने लायक समय एक साथ आना चाहिए तब संतान होती है | ऐसा न होने पर वैसे तो संतान नहीं ही होती है | चिकित्सा से भी संतान नहीं होती है |  I V F से भी संतान नहीं होती है | उसका कारण उन पति पत्नी का संतान होने योग्य समय न मिलना होता है 

न हो तो चिकित्सकों की 

दूसरी बात