रविवार, 1 नवंबर 2026

वायुप्रदूषण

 

मान्यवर ,

                     सादर नमस्कार   

 विषय: वायु प्रदूषण विषयक पूर्वानुमानों के विषय में मिलने का समय देने हेतु विनम्र निवेदन।


महोदय,    

     वायुप्रदूषण बढ़ने का कारण धुआँ धूल को मान लिया गया है | इसलिए  धुआँ धूल बढ़ाने वाले वाहनों उद्योगों ईंट भट्ठों निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है | ऐसे प्रतिबंध इसलिए लगा दिए जाते हैं कि ऐसा करने से वायु प्रदूषण का 

 से वायु प्रदूषण का स्तर कम करने में मदद मिलती भी है या नहीं |मेरी जानकारी के अनुसार अनुसंधान आधारित ऐसे  साक्ष्य नहीं हैं | जिनके आधार पर ये कहा जा सकता हो कि इन प्रतिबंधों से इतने दिन में बढ़ा हुआ वायु प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है | ऐसे किसी ठोस परिणाम के बिना भी ऐसे कार्यों पर प्रतिवर्ष प्रतिबंध लगाया जाने लगा है |

    प्रतिबंधित किए गए उद्योंगों वाहनों ईंट भट्ठों निर्माणकार्यों आदि से बहुत लोगों की आजीविका जुडी होती है | उनमें से बहु संख्य लोग ऐसे भी होते हैं | जिन्हें रोज कमाना रोज खाना होता है |ऐसे  प्रतिबंधों से उन लोगों के सामने आजीविका का संकट खड़ा होता जाता है | ऐसे ही उद्योगों से प्राप्त होने वाले उत्पादों को  उपभोक्ताओं तक पहुँचाने वाले वर्ग को भी आजीविका संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है |

    इसी प्रकार से वैज्ञानिकों के द्वारा कोरोना संक्रमण बढ़ने का कारण वायुप्रदूषण बढ़ने को बताया गया था | इसीलिए 2020 के अक्टूबर नवंबर में वायु प्रदूषण बढ़ने के कारण कोरोना संक्रमण बढ़ने का पूर्वानुमान लगाया गया था |  व्यवहार में इससे उलट देखा गया |वायु प्रदूषण बढ़ने पर भी 2020 के अक्टूबर से दिसंबर के बीच कोरोना दिनोदिन घटता चला जा रहा था और जब दूसरी सबसे भयंकर लहर मार्च अप्रैल 2021 में आई | उस समय वायु प्रदुषण रहित आकाश इतना  स्वच्छ था कि  पंजाब के अमृतशर एवं बिहार के सीतामढ़ी आदि जिलों से हिमालय के दर्शन होते देखे जा रहे थे | इन दोनों घटना से  

      

   मैं विगत 35 वर्षों से मौसम और वायु प्रदूषण के कारणों पर अनुसंधान कर रहा हूँ। मेरे शोध से स्पष्ट होता है कि धुआँ और धूल के अलावा, अन्य कारक भी प्रदूषण बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्हें न जानने के कारण  जो नुक्सान होता है | वो सभी को पता होता है | 

     वर्तमान में बिना वास्तविक कारणों और सटीक पूर्वानुमानों के आधार पर जो प्रतिबंध लगाए जाते हैं, वे उचित नहीं हैं। इनसे आजीविका का नुकसान होता है और बाजार में उत्पादों की कमी से उपभोक्ताओं को समस्या होती है।
इन वैज्ञानिक तथ्यों और वर्षों से सटीक निकलते आ रहे पूर्वानुमानों के आधार पर, मैं आपको कुछ पूर्वानुमान भेज रहा हूँ। ये प्रमाण पीएमओ की मेल पर भेजे जाते हैं, और सोशल साइट्स पर भी प्रकाशित किए जाते हैं।
    आप से विनम्र निवेदन है कि इन पूर्वानुमानों का परीक्षण करवाएं, ताकि समाज को अनावश्यक प्रतिबंधों से बचाया जा सके।
    हमारी बहुविषयक अनुसंधान प्रक्रिया संस्थान की बौद्धिक संपत्ति है, इसलिए निजता को सुरक्षित रखते हुए पूर्वानुमान उपलब्ध करवाए जा सकते हैं।
इस विषय पर विस्तृत चर्चा के लिए मिलने का समय प्रदान करने की कृपा करें।

 

 

 

 

मान्यवर ,

                     सादर नमस्कार  

 बिषय : वायुप्रदूषण बिषयक पूर्वानुमानों के बिषय में मिलने का  समय देने हेतु विनम्र निवेदन ! 

       महोदय,  

     वायुप्रदूषण बढ़ने का वास्तविक कारण क्या है और ये कब कब बढ़ता है | इसका पता लगाए बिना केवल आशंका के नाम पर कुछ कार्यों पर प्रतिबंध लगाया जाना कितना उचित है | ऐसे ही वायु प्रदूषण बढ़ने के बिषय में पूर्वानुमान पता लगाए बिना कुछ दिनों  सप्ताहों महीनों  के लिए प्रतिबंध लगा दिया जाना तब तक उचित नहीं है जब तक ऐसा किया जाना आवश्यक न हो !क्योंकि ऐसे कार्य रोके जाने से इनसे संबंधित आजीविका वाले लोगों का नुक्सान हो जाता है | 

     मौसम के बिषय में मैं पिछले 35 वर्षों से अनुसंधान करता आ रहा हूँ |उनसे प्राप्त अनुभवों में धुआँ और धूल उड़ाने वाले कारणों के अलावा कुछ दूसरे कारण भी वायुप्रदूषण बढ़ने के लिए जिम्मेदार हैं|जिनका प्रभाव मनुष्यकृत धुआँ  और धूल से भी अधिक होता है | उनके आधार पर लगाए गए वायुप्रदूषण बिषयक पूर्वानुमान सही होते देखे जाते हैं | जो पिछले  कई वर्षों से सही निकलते देखे जा रहे हैं | जो पीएमओ की मेलों पर प्रायः प्रतिवर्ष भेजे जाते हैं | सोशल मंचों पर प्रकाशित भी किए जाते हैं |उन्हीं दूसरे कारणों के आधार पर वायु प्रदूषण के बिषय में लगाए गए पूर्वानुमान मैं आपको भेज रहा हूँ | इनका परीक्षण करवाकर देखा जाए | आपको भी यदि ये सही लगते हैं तो इनके आधार पर समाज को  अनावश्यक प्रतिबंधों से बचाया जा सकता है और वायु प्रदूषण के बिषय में आगे से आगे पूर्वानुमान पाए जा सकते हैं | वायु प्रदूषण से सुरक्षा के लिए समय रहते प्रभावी प्रयत्न किए जा सकते हैं | 

    हमारी बहुबिषयक अनुसंधान प्रक्रिया हमारे संस्थान की बौद्धिक संपत्ति है | इसलिए इससे संबंधित निजता को सुरक्षित रखते हुए भी वे पूर्वानुमान उपलब्ध करवाए जा सकते हैं | जो वायुप्रदूषण से समाज की सुरक्षा के लिए अग्रिम तैयारियाँ करने में सहायक हो सकें | इससे संबंधित कुछ तथ्यों का निवेदन करने के लिए  आपसे मिलने का समय चाहिए | 

 निवेदक -: 

  डॉ. शेष नारायण वाजपेयी  
 (फोन : 98 11 22 69  83) 
 A-7\41,सेकेंडफ्लोर  ,शनिबाजार,लालक्वार्टर
 कृष्णानगर ,दिल्ली -110051   

 

     

    उन्हीं  

 

उन कारणों से  और ऐसे कारण वायुप्रदूषण बढ़ने के लिए अधिक जिम्मेदार हैं ण केवल 30   अलावा भी 

 

 एवं पूर्वानुमान 

खोजने हेतु मैं पिछले 35 वर्षों से     

  

       

 

परिणामों का विश्लेषण और अनुमानित प्रभाव  

 

 अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर महीनों के लिए तैयार किए गए वायु गुणवत्ता सूचकांक और वातावरणीय पूर्वानुमान प्रस्तुत किए गए हैं। ये पूर्वानुमान हमारे विकसित गणितीय मॉडलों की सटीकता को दर्शाने और वायु प्रदूषण चक्रों के वैज्ञानिक सत्यापन हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।




 

 



                       
 
 
  ग्राफिक्स

संलग्न ग्राफिक्स और डेटा तालिकाओं में प्रस्तुत निष्कर्ष आने वाले महीनों के मौसमी और प्रदूषण के रुझानों का स्पष्ट विवरण देते हैं। यह विश्लेषण हमारे शोध की प्रभावशीलता को सिद्ध करता है और इसके अगले चरण में इन अनुमानित प्रवृत्तियों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।