रविवार, 30 मार्च 2014

जाति और सम्प्रदायों से ऊपर उठकर सोचने की सामर्थ्य भगवान भाजपा को दे !

  जब से भाजपा रामबिलासी हुई है तब से भाजपा भी जातिवादी दिखने लगी है !इधर सम्प्रदायों के हिसाब से भी लोगों को खुश करने का काम चल रहा है आखिर क्यों ?क्या राष्ट्रवाद का नारा पर्याप्त नहीं है ?

     भाजपा पर भी जातिवादी समझौते करने के लगने लगे जहरीले  आरोप ! इनसे यदि कुछ चुनावी लाभ हो भी हो जाए तो भी उसके परिणाम अच्छे नहीं होंगे !  उत्तर प्रदेश में पार्टी कार्यकर्ताओं तथा आम समाज के  द्वारा आरोप लगाए जाने लगे हैं कि भाजपा ब्राह्मण और बनियों की उपेक्षा कर रही है साथ ही  भाजपा में ठाकुरवाद को प्रोत्साहन मिल रहा है वैसे आप भी देखिए इसे संयोग ही कहा जाए या कुछ और !

भाजपा का अध्यक्ष कौन  ?   

मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री कौन ?

राजस्थान का मुख्यमंत्री कौन ?

छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री कौन ?

     लखनऊ सीट से जो लड़ रहे थे उनकी भी छवि अच्छी थी तभी पिछली बार वे अच्छे मतों से जीते भी थे सुना जाता है कि अबकी बार भी वे वहीँ से चुनाव लड़ना चाह रहे थे किन्तु उन्हें मन मार कर इसलिए रह जाना पड़ा क्योंकि वहाँ से उस जाति के अध्यक्ष जी चुनाव लड़ना चाह  रहे जिन जातियों से भाजपा का वर्त्तमान भाजपा नेतृत्व स्नेह करता है !

     इसी प्रकार से भाजपा ने कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए जगदंबिका पाल को डुमरियागंज से और ब्रजभूषण सिंह को गोंडा से टिकट दिया है। अपनी सीट गाजियाबाद छोड़कर लखनऊ पहुंचे राजनाथसिंह जी ने गाजियाबाद से वी.के.सिंह को टिकट दिया है। बिहार में उन्होंने एन.के.सिंह को पार्टी में ले लिया है। क्या इसे ठाकुरवाद कहना चाहिए या ये संयोग मात्र ही है!

    दूसरी ओर सुना जा रहा है कि श्री मुरली मनोहर जोशी जी वाराणसी से चुनाव लड़ना चाह रहे थे किन्तु वे वहाँ से चुनाव नहीं लड़ सके जहाँ से लड़ना चाह रहे थे और अब कानपुर से लड़ रहे हैं किन्तु जो बनारस से लड़ रहे हैं ये विकल्प तो उनके सामने भी खुला था आखिर वो तो लहर वाले थे उनके विषय में क्या सोचना ! 

     श्री जोशी जी भाजपा के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं और भी कई बरिष्ठ पदों पर  समर्पण पूर्वक दायित्व निर्वाह कर चुके हैं विद्वान हैं ईमानदार हैं कर्मठ हैं पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा पर भी  किसी प्रकार का संदेह नहीं है वे हठवादी भी नहीं हैं फिर भी क्या पार्टी के पूर्व अध्यक्ष को अपनी सीट चयन करने का भी अधिकार नहीं रहा आखिर क्यों ?लालमुनि चौबे और ताराकांत झा जैसे वरिष्ठ ब्राह्मण नेताओं के क्यों काटे गए टिकट ? 

    खैर,जो भी हो यदि ये संयोग है तो क्या कहना!और  यदि इसका कुछ प्रयोजन है तो पार्टी नेतृत्व इससे सन्देश क्या देना चाहता  है आखिर ऐसी आशंकाओं को पनपने का अवसर ही क्यों दिया गया अभी भी अवसर है पार्टी को किसी सन्देश के माध्यम से इस तरह के भ्रम का भंजन करना चाहिए !हमसे भी कई ब्राह्मण एवं वैश्य नेताओं ने मेरे विचार जानने एवं इस विषय में कुछ लिखने का आग्रह करने के लिए संपर्क किया था तो मैंने उनकी बात आप समस्त स्वजनों के समक्ष रखने का प्रयास किया है !क्योंकि इससे अधिक मेरी गति और कहीं है भी नहीं !

       "मोदी जी ने भी पासवान जी के साथ बिहार की एक रैली में कहा था कि भाजपा अब ब्राह्मणों और बनियों की पार्टी नहीं रही !यदि उनके कहने का आशय दलितों और पिछड़ों को खुश करना ही होता तो सवर्ण होने के नाते इसमें क्षत्रियों को भी सम्मिलित किया जाता!किन्तु केवल  ब्राह्मणों और बनियों "का नाम ही क्यों लिया गया !"

बंधुओं इस विषय में आप मेरा यह लेख अवश्य पढ़ें-

"आज मोदी जी को यह क्या हो गया !क्या बोल गए मोदी जी !!!"

"अब भाजपा ने भी अब  अलापा दलित राग" सवर्ण रे ! भाग यहाँ से भी भाग !!!मोदी जी के भाषण में साफ दिखा पासवान के कुसंग का असर !

दैनिकभास्कर-3-3-2014मुजफ्फरपुर.नरेंद्रमोदी ने सोमवार को मुजफ्फरपुर रैली में कहा,'ब्राह्मण और बनियों की पार्टी कही जाने वाली बीजेपी अब पिछड़ों की पार्टीबनगईहै।आनेवाला वक्त दलितों,पिछड़ों का ही है।'

      इस बात के कहने का मतलब क्या है कि ब्राह्मण और बनियों को अब भाजपा ने भी सस्पेंड कर दिया है किन्तु इस बात में भी कोई चाल है क्या? सवर्ण तो क्षत्रिय भी हैं इसमें  ब्राह्मण और बनियाँ ही क्यों क्षत्रिय क्यों नहीं ? इसका कारण कहीं अध्यक्ष जी का लिहाज तो नहीं है! खैर जो भी हो किन्तु मेरी इतनी जिज्ञाशा जरूर है कि आखिर  ब्राह्मण और बनियों का अपराध क्या है ? यही see more...http://snvajpayee.blogspot.in/2014/03/blog-post.html

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