रविवार, 28 दिसंबर 2025

कोरोनामहामारी और सुरक्षा के उपाय !

                                                       कोरोनामहामारी और सुरक्षा के उपाय !   

       महामारी हो या प्राकृतिक आपदाएँ इनमें जनधन का नुक्सान  कहाँ कब कितना हो जाएगा | ये किसी को पता नहीं होता है | यदि पता हो भी जाए तो इसे केवल सहना होता है | इसके अतिरक्त ऐसी घटनाओं का मनुष्य और कर भी क्या सकता है | इतना अवश्य है कि ऐसी घटनाओं के बिषय में यदि पहले से पता कर लिया जाए  तो अपनी सुरक्षा के लिए यथा संभव प्रयत्न किए जा सकते हैं | 
     इसीलिए पूर्वजों ने ऐसी घटनाओं के बिषय में पूर्वानुमान लगाने की परिकल्पना की थी | पौराणिक इतिहास में वर्णन मिलता है कि सनातन धर्मी प्राचीन ऋषि वैज्ञानिक ऐसी घटनाओं के बिषय में लाखों वर्ष पहले पूर्वानुमान लगाने में सफल हो गए थे |उन्हीं अनुसंधानों के बल पर  सुदूर आकाश में घटित होने वाली सूर्य चंद्र ग्रहण जैसी घटनाओं के बिषय में उन्होंने उसी युग में पूर्वानुमान लगा लिया था | उन्होंने महामारी तथा प्राकृतिक आपदाओं के बिषय में पूर्वानुमान लगाकर यह प्रमाणित कर दिया था कि उन्होंने मौसम एवं महामारी जैसी प्राकृतिक घटनाओं के बिषय में  पूर्वानुमान  लगाने  की क्षमता हासिल कर ली है | यही ऐसे अनुसंधानों की सार्थकता है | 

    वर्तमानसमय में उन अनुसंधानों की उपेक्षा करके जिन अनुसंधानों की परिकल्पना की गई है | उनसे महामारी जैसी घटनाओं को न तो समझना संभव है और न ही ऐसी प्राकृतिक घटनाओं के बिषय में पूर्वानुमान लगाना ही संभव है| पूर्वानुमान लगाने के लिए जब ऐसा कोई विज्ञान ही नहीं है| जिससे भविष्य में झाँकना संभव हो तो पूर्वानुमान लगाया कैसे जा सकता है | 

     इसीलिए भूकंप वैज्ञानिकों के  द्वारा भूकंपों के बिषय में,मौसम वैज्ञानिकों के द्वारा मौसम के बिषय में,पर्यावरण वैज्ञानिकों के द्वारा वायुप्रदूषण के बिषय में  एवं महामारी वैज्ञानिकों के द्वारा महामारी के बिषय सही पूर्वानुमान लगाया जाना न अभी तक संभव हो पाया है और न ही भविष्य के दस हजार ववर्षों तक ऐसा किया जाना संभव हो पाएगा | इसका कारण जिन घटनाओं को समझने के लिए जिस बिषयवस्तु को विज्ञान मान लिया गया है | उसे पढ़कर उन घटनाओं का न तो स्वभाव समझना संभव है और न ही अनुमान पूर्वानुमान लगाया जाना ही संभव है | 

      मैं अपने अनुसंधानों के बल पर विश्वासपूर्वक कह सकता हूँ कि जिस दिन ऐसी सभी घटनाओं के वास्तविक विज्ञान को खोज लिया जाएगा | उसके आधार पर ज्ञानवान वैज्ञानिक तैयार कर लिए जाएँगे | उनके द्वारा ऐसी प्राकृतिक घटनाओं के बिषय में जो अनुसंधान किए जाएँगे | उनसे प्राकृतिक घटनाओं की प्रकृति का पता तो लगा ही लिया जाएगा | इसके साथ ही साथ प्रकृतिकघटनाओं के बिषय में सही अनुमान पूर्वानुमान भी लगा लिया जाएगा | जिस दिन ऐसा हो पाएगा उस दिन जलवायु परिवर्तन ,महामारी के स्वरूप परिवर्तन जैसे भ्रमों का निवारण  स्वतः ही हो जाएगा | 

                                              कोरोनामहामारी और बेबश विज्ञान ! 

        कोरोनामहामारी में  इतने लोगों का मारा जाना कोई साधारण घटना नहीं है | विगत कुछ दशकों में भारत को पड़ोसी देशों के साथ तीन युद्ध लड़ने पड़े | उन तीनों में मिलाकर जितने लोगों की दुर्भाग्य पूर्ण मृत्यु हुई थी | उससे कई गुणा अधिक लोग केवल कोरोना महामारी में ही मृत्यु को प्राप्त हुए हैं | ऐसे में वह अत्यंत उन्नत विज्ञान , सुयोग्य  वैज्ञानिक एवं निरंतर चलने वाले अनुसंधान उन लोगों के किस काम आ सके | 

  विज्ञान वैज्ञानिकों एवं वैज्ञानिक अनुसंधानों का लक्ष्य महामारी से समाज की सुरक्षा करना था | अत्यंत उन्नत विज्ञान भी है,सुयोग्य  वैज्ञानिक भी हैं, और निरंतर चलने वाले अनुसंधान भी हैं |सबकुछ उच्चाकोटि का होते हुए भी कोरोना महामारी से समाज की सुरक्षा नहीं की जा सकी | इसके कारणों को खोजा जाना चाहिए | 

     मेरे बिचार से महामारी संबंधी अनुसंधानों का लक्ष्य महामारी के बिषय में आगे से आगे पूर्वानुमान लगाना था !महामारी के स्वभाव को समझना था !महामारी पीड़ितों को प्रभावी चिकित्सा उपलब्ध करवाना था | महामारी  संबंधी अनुसंधानों के द्वारा  इन आवश्यक लक्ष्यों को हासिल नहीं किया जा सका | महामारी में इतनी बड़ी मात्रा में लोगों के संक्रमित होने एवं मृत्यु को प्राप्त होने का यह बड़ा कारण था | 

      ऐसी परिस्थिति में जिन अनुसंधानों के करने कराने का उद्देश्य ही महामारी से समाज की सुरक्षा करना रहा हो | उनके होते हुए भी समाज को सुरक्षित न बचाया जा सका हो | जनधन की सुरक्षा में उन अनुसंधानों की कोई भूमिका ही न रही हो | ऐसे अनुसंधानों के सहारे भविष्य को कैसे छोड़ा जा सकता है | महामारियों का आना जाना तो भविष्य में भी लगा ही रहेगा | जिसके लिए अभी की अपेक्षा अधिक प्रभावपूर्ण अनुसंधान करने होंगे | 

1. कोरोना महामारी भयंकर थी या वैज्ञानिक अनुसंधानों के द्वारा उसे समझा नहीं जा सका !

2. महामारी के कारण लोगों की मृत्यु हुई या प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण !

3.मौसम बिगड़ने के कारण महामारी आई या महामारी आने के कारण मौसम बिगड़ा था !

 4. महामारी आने पर भूकंप अधिक आए या अधिकभूकंपों के आने के कारण महामारी आई !

5.महामारी आने के कारण वायुप्रदूषण बढ़ा या वायु प्रदूषण बढ़ने के कारण महामारी आई !  

 6.महामारी आने पर तापमान में अधिक उतर आया या तापमान अचानक घटने बढ़ने से महामारी आई ! 

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   ऐसे ही महामारी मनुष्यकृत थी या प्राकृतिक,महामारी का विस्तार कितना था ! प्रसार माध्यम क्या था !अंतर्गम्यता कितनी थी !महामारी पर मौसम का प्रभाव पड़ता था था या नहीं !वायु प्रदूषण का प्रभाव पड़ता था या नहीं  !तापमान का प्रभाव पड़ता था या नहीं ! महामारी पैदा होने का कारण क्या था और महामारी समाप्त होने का कारण क्या था ?महामारी पैदा और समाप्त होने में मनुष्यकृत अच्छे बुरे व्यवहारों की क्या भूमिका थी | महामारी संबंधी लहरों के आने और जाने में मनुष्यकृत व्यवहारों की क्या भूमिका थी ?  महामारी से सुरक्षित रखने के लिए जो प्रयत्न किए जाते  रहे उनका कितना प्रभाव पड़ता रहा | को संक्रमितों को संक्रमण मुक्त कराने में चिकित्सा की क्या भूमिका रही ? कोविडवैक्सीन लगाए जाने से महामारी से मुक्ति मिली या महामारी प्राकृतिक रूप से ही समाप्त हुई है ?निकट भविष्य में महामारी की कोई दूसरी लहर आने वाली है या नहीं ? 

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