सोमवार, 24 अगस्त 2026

bijli



बिषय : गैर कानूनी रूप से लगाए गए एवं चलाए जाते रहे इस लावारिस बिजली मीटर से संबंधित सभी प्रकार के भ्रष्टाचार की जाँचपूर्वक दोषियों के विरुद्ध  कार्यवाही करने हेतु विनम्र निवेदन !
 
     महोदय 
 
    लावारिस बिजली मीटर -   CA No. 100907780 VIJAY KUMAR, S/O Mr. KULDEEP KUMAR A-7/41/2-A,G/F KRISHNA NGR DELHI NEAR SHANI BAZAR DELHI--110051") 
      इसे A- 7\41 ,शनि बाजार कृष्णा नगर दिल्ली -110051 के फस्ट फ्लोर वालों ने 8 मार्च 2010 को बिना कागजों के या फर्जी कागजों के आधार पर लगवाया था और 10 अगस्त 2026 तक इससे बिजली चोरी की जाती रही | इसके विरुद्ध जब पड़ोसियों ने बार बार कंप्लेन किया तो दोबार इन्फोर्समेंट की रेड पड़ी | अंततः 10 अगस्त 2026 को इसे उतार दिया गया | इस पर बकाया इसके एक साल के  बिल का क्या होगा पता नहीं | इस मीटर में छेड़ छाड़ करके बीते 16 वर्षों से जो बिजली चोरी की जाती रही है | मीटर की जाँच की जाती तो ये लोग पकडे जा सकते थे जुर्माना हो सकता था पोलिस कंप्लेन मुकदमा आदि कुछ भी हो सकता था |इसीलिए फ्लोर मालकिन रीतूजैन के नाम नया मीटर लगाने से 50 दिन पहले ही इस पुराने मीटर को हटाकर बिजली चोरी का रिकार्ड नष्ट करके उसकी जगह दूसरा एक नया लावारिस मीटर उसी नाम एड्रेस से लगाया गया | जिसमें छेड़ छाड़ नहीं थी | इसलिए उसे उतारकर रीतूजैन के नाम नया मीटर लगा दिया गया और पुराने मीटर से की जाती रही बिजली चोरी से बचा लिया गया | 
    2 बार इंफोर्स्मेंट की रेड पड़ी | उसमें लगाया गया जुर्माना उपयोग किया बिल आदि माफ कर दिया गया | किए गए कामर्शियल मीटर को दोनों बार बिना कागजों के और बिना बिल वसूले ही मीटर को डोमेस्टिक दिया गया | आवासीय फ्लोर में बड़ी व्यावसायिक मशीनें चलते रहने  दी गईं | इस प्रकार से नियमों का बार बार उल्लंघन करते हुए गैर कानूनी रूप से इनकी मदद करते हुए बिजली चोरी के लिए इन्हें प्रोत्साहित किया जाता रहा | ऐसी बहुत सारी अनियमितताएँ बरती गई हैं | जिनकी जाँच पूर्वक दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही की जानी चाहिए |  
  
 
 अब विस्तार से -

    इस बिल पर लिखा नाम और एड्रेस फर्जी है | -"A-7/41 का 2-A पार्ट न कागजों में है और न ही मौके पर | इसका 2-A पार्ट पहले भी कभी नहीं रहा है |यदि बिल्डिंग नंबर ही फर्जी है तो उसमें लिखा ग्राउंडफ्लोर भी फर्जी है |        
   A-7/41 के फस्ट फ्लोर में ये मीटर उपयोग किया जा रहा  है | इस बिल्डिंग के ग्राउंडफ्लोर पर रहने लायक जगह नहीं है |विजयकुमार नाम A-7/41 की किसी रजिस्ट्री आदि कागज में न अभी है और न ही पहले कभी रहा है | विजयकुमार नाम का व्यक्ति भी इस बिल्डिंग में न अभी है और न ही पहले कभी रहा है | इसलिए विजय कुमार के फोटो आधार कार्ड आवेदन और साइन भी नहीं मिल सकते हैं फिर भी ये मीटर न केवल लगाया गया प्रत्युत पिछले 16 वर्षों से इसे चलाया भी जाता  रहा है | मीटर में छेड़छाड़ करके जो लोग इससे चोरी करते रहे हैं | उनकी सुरक्षा वही लोग करते रहे हैं | जिनपर बिजली चोरी रोकने की जिम्मेदारी थी | 
     फर्जी पते का यह लावारिस मीटर  8 मार्च 2010 को लगाया गया था | जो तभी से A- 7\41 ,शनि बाजार कृष्णा नगर दिल्ली -110051 फस्ट फ्लोर में 10 अगस्त 2026 तक उपयोग किया जाता रहा है | पिछले कुछ वर्षों से इस आवासीय फ्लोर में परिवार सहित रहने के साथ साथ व्यावसायिक बड़ी मशीनें भी चलाई जा  रही हैं | जिनसे परेशान पड़ोसियों के बार बार कंप्लेन करने पर 2 बार इंफोर्स्मेंट की रेड पड़ी | दोनों बार मशीनें चलती पकड़ी गईं | दोनों बार जुर्माना लगाया गया | दोनों बार मीटर कॉमर्शियल किया गया | दोनों बार इंफोर्स्मेंट की कार्यवाही को पलट कर बिल माफ़ करके दोनों बार मीटर डोमेस्टिक कर दिया गया |  ये सब बिना बिल जमा करा बिना कागजों के किया गया | मशीनें अभी भी चल रही हैं | 
      इस मीटर में छेड़ छाड़ करके  पिछले 16 वर्षों से की जाती रही बिजली चोरी को छिपाने के लिए इस लावारिस मीटर को हटाकर इसकी जगह दूसरा लावारिस मीटर 23 जून 2026 को 50 दिनों के लिए लगाया गया | इसके बाद 10 अगस्त 2026 को लीगल मीटर रीतू जैन के नाम लगा दिया गया | 
     
 1. फर्जी  विजयकुमार ने मीटर लगाने के लिए न तो कभी BSES को आवेदन दिया और न कोई कागज दिए न किसी कागज़ पर साइन किए फिर BSES ने  8 मार्च 2010 को ये मीटर किस आधार पर लगा दिया गया ? 
 2. इस मीटर से आवासीयफ्लोर में चलाई जा रही बड़ी व्यावसायिक मशीनों के कंपन शोर आदि से परेशान  पड़ोसियों ने बार बार कंप्लेन की तो इंफोर्स्मेंट का दो बार छापा पड़ा तब 10 अगस्त 2026  को बड़ी मुश्किल से हटाया गया |  उसमें भी हेरा फेरी की गई है | 
3.इस मीटर में छेड़ छाड़ करके  चोरी की  बिजली उपयोग करने का लालच यदि  नहीं था तो फस्टफ्लोर वालों ने ये गैर कानूनी मीटर छोड़कर अपने नाम से लीगल मीटर क्यों नहीं लगवा लिया ?16 वर्षों तक लावारिस मीटर से बिजली चोरी की जाती रही क्यों ?
4.ये 16 वर्ष पुराना लावारिस मीटर 22  जून 2026 को उतार कर इसकी जगह 23 जून 2026 को  उसी नाम से दूसरा बिल्कुल नया लावारिस मीटर लगाया गया | इसके बाद 10 अगस्त  2026 को वह मीटर भी हटाकर रीतूजैन के नाम से नया मीटर लगाया गया  | ऐसा करके 16 वर्ष पुराने मीटर में की गई  छेड़छाड़ को जाँच होने से बचा लिया गया | यदि ऐसा नहीं है तो 23 जून 2026 को  ही रीतूजैन के नाम  से मीटर लगा दिया जाता या फिर  10 अगस्त  2026 को ही पुराना मीटर उतार लिया जाता | बीच में 50 दिनों के लिए एक दूसरा लावारिस मीटर लगाने का उद्देश्य पिछले 16 वर्षों से की जा रही बिजली चोरी के पुराने रिकार्ड को नष्ट करना था या कुछ और !  
5.नियमानुसार एक लावारिस मीटर हटाकर उसकी जगह दूसरा लावारिस मीटर नहीं लगाया जा सकता | मीटर पर पंजीकृत नाम एड्रेस आधार फोटो आदि के बिना नया मीटर  कैसे लगा दिया गया ?
 7. पुराने मीटर पर बकाया धनराशि जब तक वसूली  नहीं जाती है तब तक नया मीटर  नहीं लगाया जाता है | इस मीटर पर पुराना बकाया रहने के बाद भी नया मीटर कैसे लगा दिया गया  ? 
 8. कामर्शियल मीटर को डोमेस्टिक करने से पहले पुराना बकाया बिल वसूला जाता है | वहाँ से व्यावसायिक मशीनें हटवाई जाती हैं | इसमें गैर कानूनी रूप से  जुर्माना भी वापस ले लिया गया और मीटर भी डोमेस्टिक कर दिया गया | दोनों बार ऐसा करने की मजबूरी क्या थी ? 
 9 . BSES के क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ मिली भगत से बार बार कानून की मर्यादाएँ लाँघी गई हैं| गैर कानूनी कार्य बार बार करने के बाद भी इनके विरुद्ध कोई कार्यवाही होने नहीं दी गई है | दूसरों की एक गलती पर कनेक्शन काटकर मीटर उतार लिया जाता है | पुलिस कंप्लेन कर दी जाती है मुकदमा चलाया जाता है | इनके गैरकानूनी कार्यों को प्रोत्साहित क्यों किया गया ? 
10.इन्फोर्समेन्ट का 11 जुलाई 2025 को जो छापा पड़ा और दूसरी बार  24  मार्च 2026 को छापा पड़ा | दोनों में  मशीनें चलती  पकड़ी गईं ! अभी भी छापा डाला जाए तो अभी भी मशीनें चलती मिलेंगी | तो जनवरी 2026  एवं अगस्त 2026 में मीटर को डोमेस्टिक कैसे कर दिया गया ?बड़ी मशीनें लगी हैं | घर से बाहर तक 10 से अधिक कैमरे लगे हैं | मशीनें निकाली जाती तो क्या उनमें दिखाई नहीं पड़तीं ? ऐसी स्थति में दोनों बार मीटर को डोमेस्टिक कैसे कर दिया गया? 
11. दो चार हजार का दो महीने का  बकाया बिल न दिया जाए तो कनेक्शन काट कर मीटर उतार लिया जाता है | पौने दो लाख का इनका बिल माफ करने के लिए 11 जुलाई 2025 से जनवरी 2026 तक इनका बिल  बकाया पड़ा रहा बाद में  दिया गया | इनकी जाँच  की जानी चाहिए |
 
 विनम्र निवेदन  :-    इस फ्लोर वालों को ऐसे लावारिस मीटर पहले भी दिए जाते रहे हैं | बिजली चोरी होती रही है जब जुर्माना आदि लगकर मोटा बिल बन जाता रहा है तो वो लावारिस मीटर वैसे ही छोड़कर दूसरा मीटर लगवा लिया जाता रहा है | ऐसे लावारिस  मीटरों का बकाया बिल बिल्डिंग पर डाल दिया जाता रहा है | बिल्डिंग के 8 लोगों में से कोई भी नया मीटर लगवाने या नाम बदलवाने जाता है तो ये बिल बिल्डिंग पर ड्यूज बताकर या तो उससे वसूला जाता है या फिर उसे भी ऐसा ही लावारिस मीटर दे दिया जाता है | उसके भी ड्यूज बिल्डिंग  पर डाल दिए जाते हैं |  इससे  बिल्डिंग पर बकाया बढ़ता जा रहा है | इन्हीं कारणों से तो बिल्डिंग में रहकर  ईमानदारी से बिजली का उपयोग करना मुश्किल होता जा रहा है | 
     ऐसे भ्रष्टाचार से BSES की गरिमा गिराई गई है |पारदर्शिता प्रभावित हुई है | राजस्व का नुक्सान किया गया है  कुछ दूसरे लोगों को नियम विरुद्ध काम करने एवं मनमाने ढंग से राजस्व  का नुक्सान करने की राह दिखाई गई है | 
     इसकी विस्तृत जाँच करवाकर दोषियों के विरुद्ध कानून सम्मत कार्यवाही की जाए ताकि इस प्रकार का कदाचरण बंद हो |  इस मीटर का बकाया बिल बिल्डिंग पर न डाला जाए ये सुनिश्चित किया जाए | आज तक का बिल्डिंग पर बकाया एमाउंट इसी फस्ट फ्लोर वालों से वसूला जाए |

 
 
 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
यहाँ तक कि इंफोर्स्मेंट के दो बार पड़े छापों को दोनों बार पलटकर उनके द्वारा लगाए गए जुर्माने को खारिज कर दिया तथा सारे नियमों को ताख पर रखकर दोनों बार  इनके कामर्शियल मीटर को डोमेस्टिक कर दिया | बीते एक वर्ष में इतना हुआ तो कल्पना की जा सकती है कि बीते 16 वर्षों में  इस फ्लोर को फायदा पहुँचाने के लिए बिल्डिंग में रह रहे अन्य लोगों का कितना नुक्सान किया होगा ये कल्पना की जा सकती है | 
     
         
                   पिछले एकवर्ष में किए गए ऐसे कार्य जो कानूनी रूप से नहीं किए जा सकते थे | 
                                     
   यदि  बिना कागजों के बिना सही सर्वे के भ्रष्टाचार पूर्वक ये मीटर लगा ही दिया गया था तो बाद में उतार दिया जाता | इससे बिजली चोरी होती रही फिर भी इसे 16 वर्षों तक अपने आपसे उतारा नहीं गया | बार बार कंप्लेन करने के बाद भी एक वर्ष तक न केवल बना रहने दिया गया प्रत्युत इसे बचाने के लिए क्षेत्रीय अधिकारियों के द्वारा हर संभव प्रयास किए गए | गैर कानूनी कार्य के लिए  दंड मिलना चाहिए था वो नहीं मिलने दिया गया |  आवासीय फ्लोर में बड़ी व्यावसायिक मशीनें अभी तक चलते रहने के बाद भी दो दो बार जुर्माना तथा उपयोग किया बिल माफ करवा दिया गया |कॉमर्शियल मीटर को बिना कागजों के डोमेस्टिक कर दिया गया | पुराने मीटर में छेड़ छाड़ करके 16 वर्षों तक की गई बिजली चोरी के कारण इनके विरुद्ध कोई कठोर कानूनी कार्यवाही न की जाए इसलिए फ्लोर मालिक रीतूजैन के नाम ने मीटर लगाने के 50 दिन पहले ही वो पुराना लावारिस मीटर हटाकर उसके रिकार्ड  नष्ट किया गया और उसकी जगह 50 दिनके लिए दूसरा नया लावारिस मीटर लगा दिया गया | दो चार हजार का दो महीने बकाया बिल न दिया जाए तो कनेक्शन काट कर मीटर उतार लिया जाता है | पौने दो लाख का इनका बिल माफ करने के लिए 11 जुलाई 2025 से जनवरी 2026 तक इनका बिल  बकाया पड़ा रहा बाद में  दिया गया | इनकी जाँच  की जानी चाहिए | 
    बिना कागजों के वे सभी काम किए जाते रहे जिनके लिए प्रापर्टी कागज़,आवेदक का आधार फोटो आवेदन साइन आदि आवश्यक माने जाते हैं | इनके बिना ये मीटर लगाया तो गया ही था  | इनके बाकी काम भी किए जाते रहे | बिना कागजों के ही दो बार मीटर की श्रेणी बदली गई एक बार मीटर बदला गया |  
 
 
3. 22 जून 2026 को पुराना लावारिस मीटर उतार कर 23  जून 2026 को नया लावारिस मीटर लगाया गया | 10 अगस्त 2026 को फ्लोर मालिक के नाम से नया मीटर लगा दिया गया | 
        इससे संबंधित कॉमर्शियल और डोमेस्टिक बिलों की दोनों बार की कॉपी,इन्फोर्समेन्ट वालों के दोनों बार के छापों की कॉपी,दोनों मीटरों के बिलों की फोटो, इनकी जगह रीतू जैन के नाम से लगाए गए नए मीटर की फोटो और बिल की कॉपी इसके साथ संलग्न है |   


 
 
 
 महोदय,
  
       इस लावारिस मीटर का उपयोग करने के बजाए  फस्टफ्लोर  वाले चाहते तो अपनी रजिस्ट्री के आधार पर वे अपना लीगल मीटर लगवा सकते थे किंतु उन्होंने ऐसा न करके इतने वर्षो तक लावारिस मीटर से बिजली चोरी का लाभ लेते रहे | कुछ वर्ष पहले इस फ्लोर को खरीदने वाली रीतूजैन भी इसी लावारिस मीटर से बिजली लेती रहीं किंतु अपने नाम से लीगल मीटर नहीं लगवाया | वे भी चोरी की बिजली का लाभ लेती रहीं | इस मीटर में छेड़छाड़ करके रीडिंग जितनी कम की जा सकती थी | उतनी कर ली गई थी | इसलिए इससे बिल बहुत कम आता था | 
     बार बार कम्प्लेन और बार बार इंफोर्स्मेंट का छापा पड़ने के कारण फ्लोरमालिक रीतूजैन को  अपने नाम मीटर लगवाने के लिए मजबूर होना पड़ा | रीतू जैन के नाम मीटर लगाने से पहले 16 वर्ष पुराना लावारिस मीटर इसलिए हटाया गया क्योंकि उस समय इस मीटर की जाँच होती तो इससे 16 वर्ष पहले से की जाती रही बिजली चोरी की बात खुल जाती | ऐसा न हो इसलिए इस लावारिस मीटर को 22 जून 2026 को उतार कर इसकी जगह 23 जून 2026 को उसी लावारिस नाम और एड्रेस से एक नया मीटर लगाया गया | उस मीटर को भी 10 अगस्त 2026 को उतार कर तब रीतूजैन के नाम नया मीटर लगाया गया |
    ऐसे में  पुराने मीटर से बिजली चोरी की बात खुलने का भय न होता तो 23 जून 2026 को नया लावारिस मीटर लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ती | उसी दिन रीतू जैन के नाम मीटर लगा दिया जाता |लावारिस मीटर की जगह उस  नाम से यदि नया लावारिस मीटर ही लगाना था तो वो पुराना मीटर ही बना रहने दिया जाता |उसे बदलने की आवश्यकता ही क्या थी |  ऐसे नया लावारिस मीटर लगानेके लिए भी बिजली बिल पर लिखे मालिक के रजिस्ट्री आधारकार्ड आदि कागजों फोटो की आवश्यकता थी | वो है नहीं इसलिए उसके बिना ही गैरकानूनी रूप से नया मीटर लगाया गया |  
कॉमर्शियल मीटर को डोमेस्टिक कराते समय -
   रजिस्ट्री आदि कागजों के बिना ही फरवरी 2026 में और दूसरी बार अगस्त 2026 में दो दो बार कॉमर्शियल मीटर की श्रेणी को डोमेस्टिक श्रेणी  में गैरकानूनी रूप से बदल दिया गया | ऐसा करने से पहले पुराना बकाया बिल वसूला नहीं गया था |  फरवरी 2026 में और अगस्त 2026 में जब इस  मीटर की श्रेणी कॉमर्शियल से डोमेस्टिक की गई थी | उस समय के वीडियो फुटेज के आधार पर जाँच करवाई जाए | यहाँ बिल्डिंग के बाहर से भीतर तक 10 से अधिक कैमरे लगे हुए हैं ?इतनी बड़ी मशीनें छिपा कर ले जाना संभव नहीं है | वो मशीनें उस समय भी चल रही थीं और  अभी भी चलाई जा रही हैं | 
      वैसे भी 11 जुलाई 2025  को इंफोर्स्मेंट की रेड पड़ी | इसके बाद 24 मार्च 2026 को इंफोर्स्मेंट की रेड पड़ी दोनों छापों में बड़ी व्यावसायिक मशीनें चलती पकड़ी गई थीं और अभी छापा डाला जाए तो अभी भी मशीनें चलती मिलेंगी | इसीलिए जुर्माना लगाया गया था और मीटर कॉमर्शियल किया गया था फिर भी दोनों बार इंफोर्स्मेंट की कार्यवाही को पलटकर बिल और जुर्माना माफ करके बिना कागजों के इस  मीटर की श्रेणी कॉमर्शियल से डोमेस्टिक किस आधार पर की गई थी | यदि यही किया जाना था तो इंफोर्स्मेंट के दोनों छापों में जुर्माना लगाकर मीटर की श्रेणी कॉमर्शियल की ही क्यों गई थी ?
   पिछला बकाया जमा कराए बिना कॉमर्शियल मीटर को डोमेस्टिक करने का यदि नियम नहीं है तो इस मीटर को दो दो बार पिछला  बकाया जमा कराए बिना कॉमर्शियल से डोमेस्टिक किस आधार पर किया गया ?
     जाँच पूर्वक इसमें जो दोषी पाए जाएँ उनके विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जाए ताकि ऐसा करने की सोचने वाले दूसरे लोगों को भी इससे सबक मिले | 




 

6.7.8.9.10

यदि बिल्डिंग का पूरा नाम एड्रेस फर्जी है तो इस नाम से मीटर लगाते समय प्रापर्टी सर्वे किस बिल्डिंग का किया गया था | किसने किया था और कौन कागज़ लगाए गए थे ? इसकी जाँच करवाई जाए |  

 

 इन कागजों के बिना ये 4 कार्य नहीं किए जा सकते थे | ये कैसे किए गए | इनकी जाँच कराई जाए कि नियमानुसार किया गया है क्या ?


2. यदि बिल्डिंगनंबर फ्लोरनंबर नाम एवं प्रापर्टी सर्वे कागज़ आधारकार्ड फोटो आधारकार्ड आवेदन साइन आदि सब कुछ फर्जी ही है तो इस सब के बिना 8 मार्च 2010 को ये मीटर कैसे लगा ! जनवरी 2026 में इस मीटर की कामर्शियल श्रेणी को ये मीटर कैसे लगा इसकी जाँच कराई जाए     का 

उसने मीटर लगाने के लिए आवेदन भी नहीं किया है 

 1. फस्टफ्लोर के मालिक का उद्देश्य यदि बिजली चोरी नहीं था

उपयोग किया  जाता रहा है | 

  फर्जी पते से लगा यह लावारिस बिजली मीटर पिछले 16 वर्षों से  

    इसकी गैर कानूनी गतिविधियाँ बार बार पकड़ी जाती रहीं हैं जुर्माना लगाया जाता रहा है | मीटर कॉमर्शियल किया जाता रहा है | इस फ्लोर में रहने वाले क्षेत्रीय अधिकारियों की मिली भगत से बिल और जुर्माना बिना जमा किए ही इंफोर्स्मेंट की कार्यवाही को पलटकर मीटर डोमेस्टिक करा लेते रहे हैं | 

     फर्जी पते का यह लावारिस मीटर  8 मार्च 2010 को लगाया गया था | जो तभी से A- 7\41 ,शनि बाजार कृष्णा नगर दिल्ली -110051 फस्ट फ्लोर में 10 अगस्त 2026 तक उपयोग किया जाता रहा है | पिछले 16 वर्षों से इससे बिजली चोरी की जा रही थी | पिछले कुछ वर्षों से इस आवासीय फ्लोर में परिवार सहित रहने के साथ साथ व्यावसायिक बड़ी मशीनें भी चलाई जा  रही हैं | जिनसे परेशान पड़ोसियों के बार बार कंप्लेन करने पर 2 बार इंफोर्स्मेंट की रेड पड़ी | दोनों बार मशीनें चलती पकड़ी गईं | दोनों बार जुर्माना लगाया गया | दोनों बार मीटर कॉमर्शियल किया गया | दोनों बार इंफोर्स्मेंट की कार्यवाही को पलट कर बिल माफ़ करके दोनों बार मीटर डोमेस्टिक कर दिया गया | एक बार इसी मीटर का बिल माफ करके मीटर डोमेस्टिक किया गया जबकि दूसरी बार इस कॉमर्शियल मीटर और उस पर बकाया बिल को छोड़कर वर्तमान बिल्डिंग मालिक रीतू जैन के नाम नया डोमेस्टिक मीटर लगा दिया गया है | इस  लावारिस मीटर में छेड़छाड़ करके पिछले 16 वर्षों से बिजली चोरी की जा रही थी | मीटर से बिजली चोरी का रिकार्ड नष्ट करने के लिए 16 वर्ष पुराना मीटर उतारकर उसकी जगह वही फर्जी नाम और पते से दूसरा नया मीटर लगाया गया | उसके एक महीने बाद रीतू जैन के नाम नाता मीटर लगाया गया है | 

 प्रश्न नंबर 1. 

इस आवासीय फ्लोर में बड़ी व्यावसायिक मशीनें अभी भी चलाई जा रही हैं | 

    

 

 

 A- 7\41 के शनि बाजार कृष्णा नगर दिल्ली -110051 में 5 दुकानें 200 गज के 3 फ्लोर हैं | इसमें रीतू जैन का  फस्टफ्लोर आवासीय है , फिर भी इसमें रह रहे किराएदार महेंद्र जैन उसकी पत्नी जयश्री  जैन इनके बच्चों सहित रहने के साथ साथ बड़ी व्यावसायिक मशीनें लगाकर गैर कानूनी रूप से कारोबार भी करता है जबकि इसके पास न तो ट्रेड लाइसेंस है और न ही कन्वर्जन जमा किया है | इस फ्लोर वालों ने अपने नाम एवं अपने फ्लोर के नाम से अपनी रजिस्ट्री पर कभी कोई बिजली मीटर नहीं लगवाया है | पिछले 16 वर्षों से चोरी की बिजली से ही अपना काम चलाते रहे हैं | इसके बाद भी इनके विरुद्ध कभी कोई कठोर कार्यवाही नहीं की गई | यदि कभी कुछ की भी गई तो भ्रष्टाचार पूर्वक या सोर्स सिपारिश के बल पर उससे सकुशल बच निकलते रहे हैं |  

 बिजली विभाग के अधिकारियों की मिली भगत से 

 

 

 

 

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मान्यवर नमस्कार 

  बिषय :भ्रष्टाचार पूर्वक फर्जी कागजों के आधार पर लगाए गए लावारिस मीटर के संदर्भ में -   

     महोदय 

        निवेदन है कि A- 7\41,शनि बाजार कृष्णा नगर दिल्ली -110051 में 5 दुकानें 200 गज के 3 फ्लोर हैं | इसमें रीतू जैन का  फस्टफ्लोर आवासीय है , फिर भी इसमें रह रहे किराएदार महेंद्र जैन उसकी पत्नी जयश्री  जैन इनके बच्चों सहित रहने के साथ साथ बड़ी व्यावसायिक मशीनें लगाकर गैर कानूनी रूप से कारोबार भी करता है जबकि इसके पास न तो ट्रेड लाइसेंस है और न ही कन्वर्जन जमा किया है | इस फ्लोर वालों ने अपने नाम एवं अपने फ्लोर के नाम से अपनी रजिस्ट्री पर कभी कोई बिजली मीटर नहीं लगवाया है | पिछले 16 वर्षों से चोरी की बिजली से ही अपना काम चलाते रहे हैं | इसके बाद भी इनके विरुद्ध कभी कोई कठोर कार्यवाही नहीं की गई | यदि कभी कुछ की भी गई तो भ्रष्टाचार पूर्वक या सोर्स सिपारिश के बल पर उससे सकुशल बच निकलते रहे हैं |  

       जो BSES भ्रष्टाचार के किसी एक प्रकरण में दण्डित करने के लिए बड़ी बड़ी कार्यवाही कर देता है | फ्लोर सील करवा देता है, भारी भरकम जुर्माना लगाता है ,पुलिस कंप्लेन करके गिरफ़्तारी करवाता है | मुकदमा चलाता है | कनेक्शन कटवा देता है | कठोर से कठोर कार्यवाही करता है | इस लावारिस मीटर का उपयोग करने वालों ने तो बार बार गैर कानूनी कार्यों एवं भ्रष्टाचार पूर्वक पिछले 16 वर्षों से बिजली चोरी करते रहे हैं | अभी भी डोमेस्टिक मीटर से आवासीय फ्लोर में व्यावसायिक मशीनें चला रहे हैं | बार बार कंप्लेन करने के बाद भी इनके विरुद्ध कोई कानूनी कार्यवाही नहीं की गई है | उच्चाधिकारियों तक कंप्लेन की जा चुकी है | वे क्षेत्रीय अधिकारियों के पास जाँच के लिए भेजते हैं | यहाँ से उन्हें भी गलत सूचनाएँ भेज दी जाती हैं | इस लापरवाही से कंप्लेन  करने वालों पर  दोषियों के द्वारा कई बार हमले किए जा चुके हैं | सुरक्षा का सवाल है इसलिए हम अपनी पहचान छिपा करके आपको यह सही जानकारी उपलब्ध करवा रहे हैं |

     इस संपूर्ण प्रकरण की जाँच के लिए हम तीनों मीटरों की फोटो ,दोनों बार के इंफोर्स्मेंट के बिल एवं बकाया बिलों की कॉपी भेज रहे हैं | इसके साथ ही एक वर्ष में दो बार डोमेस्टिक से  कॉमर्शियल किए गए बिल एवं कॉमर्शियल से डोमेस्टिक किए गए बिल की कॉपी भेज रहा हूँ | आशा है कि दोषियों के विरुद्ध सघन एवं निष्पक्ष जाँच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर इनके विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जाएगी | अभी  तक का बकाया बिल इन्हीं से वसूला जाएगा | 


                   निवेदक -

               समाज सेवक 

    

                                                                   मुख्य बिषय 

    A- 7\41,शनि बाजार कृष्णा नगर दिल्ली -110051 में 5 दुकानें 200 गज के 3 फ्लोर हैं | इसमें फस्ट फ्लोर के मालिक ने  चोरी की बिजली उपयोग करने के उद्देश्य से इस फ्लोर वालों ने अपने फ्लोर के लिए  यह लावारिस मीटर 8 मार्च 2010 को लगवाया था | ये लोग पिछले 16 वर्षों से इससे बिजली की चोरी करते आ रहे हैं | इसीलिए इस फ्लोर वालों ने अपने एवं अपने फ्लोर के नाम मीटर लगाने की जरूरत नहीं समझी | जिस लावारिस मीटर का ये उपयोग करते आ रहे हैं | उस  लावारिस मीटर के बिल पर लिखा एड्रेस ये है - CA No. 100907780 VIJAY KUMAR, S/O Mr. KULDEEP KUMAR A-7/41/2-A,G/F KRISHNA NGR DELHI NEAR SHANI BAZAR DELHI--110051")  

      इसमीटर के बिल पर लिखा गया नाम ,एड्रेस, बिल्डिंगनंबर और फ्लोरनंबर पूरी तरह फर्जी है | इसमें लिखा गया  A-7/41 का 2-A पार्ट कहीं नहीं है A-7/41 के G/F में दुकानें हैं | रहने लायक जगह नहीं है | इसमें लिखा गया  विजय कुमार नाम इस प्रापर्टी के किसी कागज़ में न अभी है और न पहले कभी रहा है | इसीलिए उसकी फोटो आधारकार्ड नहीं है | उसने कहीं साइन नहीं किए हैं | अपने नाम से मीटर लगाने के लिए उसने कोई आवेदन नहीं दिया फिर इस फर्जी एड्रेस से फस्टफ्लोर वालों ने यह मीटर लगवा कैसे लिया ? 

 2. इस मीटर में छेड़ छाड़ करके मनमानी ढंग से बिजली चोरी की  जा रही थी | A C गीजर पंखा कूलर फ्रिज आदि तो चलाए ही जा रहे थे | इस आवासीय फ्लोर में बड़ी व्यावसायिक मशीनें भी चलाई जा रही थीं | जिनसे शोर होता था, कंपन होता था, कारीगरों  मैकेनिकों के नाम पर संदिग्ध लोगों का आना जाना होता था | इस सबसे तंग होकर पड़ोसियों ने कई बार कंप्लेन किए | 11 जुलाई 2025  को इंफोर्समेन्ट की रेड पड़ी,जुर्माना लगा मीटर कॉमर्शियल किया गया | दो चार हजार का बिल 2 महीने बकाया होने पर दूसरों का कनेक्शन काट दिया जाता है | इन्होंने 6 महीने अर्थात जनवरी 2026 तक न उपयोग किया बिल जमा किया और न ही जुर्माना वाला बिल जमा किया | दोनों बिल मिलाकर लगभग 2 लाख बकाया हो गया था | जिसकी देय तिथि 2 फरवरी 2026 थी | 

    इन्होंने एक भी पैसा जमा किए बिना ,विजय कुमार के नाम का आधार फोटो साइन आवेदन प्रापर्टी कागज़ दिए बिना ,मीटर को डोमेस्टिक श्रेणी में बदलवा लिया | मशीनें फिर भी लगातार चलती रहीं | पड़ोसियों ने तंग होकर दोबारा कंप्लेन किया | जिससे 24 मार्च 2026 को इंफोर्स्मेंट वालों ने दोबारा छापा डाला | बड़ी व्यावसायिक मशीनें चलते पकड़ीं | जुर्माना लगाया फिर मीटर को कॉमर्शियल किया गया | उसका उपयोग किया गया बिल तथा जुर्माने का बिल जमा किए बिना ही इस मीटर को छोड़कर रीतूजैन ने अपने नाम से नया मीटर लगवाने का आवेदन दे दिया | दो बार इंफोर्स्मेंट की रेड से तंग होकर मजबूरी में उन्हें ऐसा करना पड़ा | 

     इसमें भी गैर कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई | नया मीटर लगाते समय पिछले 16 वर्षों से चला आ रहा पुराना मीटर उतारा जाता और उसकी जाँच की जाती | उस मीटर में छेड़ छाड़ करके जो पिछले 16 वर्षों से बिजली चोरी की जाती रही है | मीटर की जाँच में वह बिजली चोरी और मीटर से की गई छेड़ छाड़ पकड़ जाती | छेड़ छाड़ वाला वह पुराना मीटर पकड़ा न जाए उसे छिपाने के उद्देश्य से 22 जून 2026 को वह पुराना मीटर उतारकर बिजलीचोरी का पुराना रिकार्ड नष्ट कर दिया गया | 23 जून को उसी उतारे गए मीटर के नाम और एड्रेस से एक नया मीटर विजय कुमार के नाम से ही लगा दिया गया | इस नए मीटर को हटाकर इस फ्लोर की मालिक रीतूजैन ने 10 अगस्त 2026 को अपने नाम से नया मीटर लगवा लिया | जिसका CA No. 155251833 है | नियमानुसार कामर्शियल मीटर हटाकर कामर्शियल मीटर ही लगाया जाना चाहिए था किंतु रीतूजैन ने अपने नाम से डोमेस्टिक मीटर लगवा लिया है | बड़ी व्यावसायिक मशीनें अभी भी चलाई जा रही हैं | उस पुराने मीटर पर बकाया छोड़ा गया बिल कौन जमा करेगा | 

        






 ऐसी स्थिति में इस मीटर को लगाने से पहले इसमें  प्रापर्टी का सर्वे कैसे किया गया होगा ? मीटरलगाने के लिए प्रापर्टी के कागज़, प्रापर्टीमालिक का फोटो आधारकार्ड के बिना इन्होंने ये कनेक्शन कैसे लिया होगा? 

 का इस प्रापर्टी से न अभी कोई संबंध है और न पहले कभी रहा है |

    बिजली चोरी करने में पकड़े न जाएँ ,कोई जुर्माना न भुगतना पड़े इसी उद्देश्य से  8 मार्च 2010 से लेकर 10 अगस्त 2026 तक इस फ्लोर वाले इसी लावारिस मीटर में छेड़ छाड़ करके पिछले 16 वर्षों से बिजली चोरी करते आ रहे हैं | इस लावारिस  मीटर पर पंजीकृत एड्रेस ये है  - 

  1. इस पर पंजीकृत नाम और एड्रेस में कुछ भी सही नहीं है !फिर भी ये मीटर लगवाया कैसे गया और सब कुछ फर्जी होने के बाद भी 16 वर्षों  से चलाया कैसे जा रहा है ? 

   इसके बिजली बिल पर पंजीकृत एड्रेस  में लिखा बिल्डिंग नंबर A-7/41/2-A में A-7/41 का 2-A पार्ट कहीं है ही नहीं | A-7/41 के ग्राउंड फ्लोर में रहने लायक कोई जगह नहीं है | विजयकुमार नाम का कोई व्यक्ति इस A-7/41में न कभी रहा है और न ही इस बिल्डिंग के किसी रजिस्ट्री आदि कागज में विजयकुमार का नाम आधारकार्ड फोटो उसके साइन उसके द्वारा दिया गया आवेदन पत्र कहीं है ही नहीं | लावारिस मीटर पर पंजीकृत एड्रेस यदि कहीं है ही नहीं तो मीटर लगाने से पहले इसका सर्वे कैसे किया गया और बिना किसी कागज़ सर्वे तथा कानूनी आधार के इस फ्लोर वालों ने 8 मार्च 2010 को ये लावारिस मीटर कैसे लगवा लिया और इसी से अभी तक बिजली चोरी करते रहे हैं  | इसकी जाँच करवाकर इस फ्लोर वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्यवाही की जाए | 

2.    बिजली चोरी का पुराना रिकार्ड नष्ट करने के लिए 23 जून को पुराना लावारिस मीटर हटाकर नया लावारिस मीटर लगाया गया ! अन्यथा  पुराना लावारिस मीटर ही बना रहने दिया जाता | उसे ही हटाकर रीतूजैन के नाम नया मीटर लगा दिया जाता ! 

   इस लावारिस मीटर में  बिजली चोरी के उद्देश्य से   पिछले 16 वर्षों में बहुत बार छेड़ छाड़ की जा चुकी थी | उस मीटर की जाँच हो और चोरी पकड़ न जाए | अतः बिजली चोरी का पिछला रिकार्ड नष्ट करने के लिए इन्होंने 22 जून 2026 को पुराना  लावारिस मीटर हटवा दिया |इसकी जगह इसी फर्जी नाम एड्रेस से एक नया लावारिस मीटर 23 जून 2026 को  लगवा लिया गया | ये बिलकुल नया मीटर था | इसकी जाँच से बिजली चोरी पता नहीं लगनी थी | इसलिए इस नए लावारिस मीटर को हटाकर इस फ्लोर मालिक रीतूजैन पवन जैन ने 10 अगस्त 2026 को अपने नाम से नया मीटर लगवा लिया | जिसका CA No. 155251833 है |

    3. पुराने दो दो बिल बकाया रहने के बाद दो बार नए मीटर कैसे बदले गए ?

   रीतूजैन ने जो लावारिस मीटर हटवाकर अपने नाम से नया बिजली मीटर लगवाया है | उस मीटर पर 11 जुलाई 2025 इंफोर्स्मेंट का छापा पड़ा था | जिसमें जुर्माना लगाया गया था | जनवरी 2026 तक न उपयोग किया हुआ बिल Rs 48930 जमा किया गया और न ही जुर्माने वाला बिल Rs  1,33,541.10 जमा किया गया | जिसकी देय तिथि 2 फरवरी 2026 थी | ये बिल अभी तक बकाया पड़ा हुआ है | इसके बाद 24 मार्च 2026 फिर इंफोर्स्मेंट का छापा पड़ा फिर बड़ी व्यावसायिक मशीनें चलती  पकड़ी गईं | फिर जुर्माना लगाया गया वो बिल और 10 अगस्त 2026 तक का उपयोग किया बिल बकाया बने रहने के बाद भी 23 जून 2026 को पुराना लावारिस मीटर हटाकर नया लावारिस मीटर कैसे लगाया गया ?और इसी रीतू जैन के फ्लोर पर इतना भारी भरकम पुराना बिल बकाया रहने के बाद भी 10 अगस्त 2026 को उसके अपने नाम से नया मीटर कैसे लगाया जा सकता है इसकी जाँच की जानी चाहिए और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जानी चाहिए | 

 4. बड़ी व्यावसायिक मशीनें चलते रहने एवं पुराना बिल बकाया रहने के बाद भी कॉमर्शियल मीटर को डोमेस्टिक कैसे किया गया ? और कॉमर्शियल मीटर हटाकर उसकी जगह डोमेस्टिक मीटर कैसे लगाया गया ?

   रीतू जैन के फ्लोर में  जब बड़ी व्यावसायिक मशीनें पिछले कुछ वर्षों से लगातार चलाई जा रही हैं | पुलिस  जाँच में बार बार पकड़ी जाती रही हैं | MCD की  जाँच में मशीनें चलती पकड़ी जाती रही हैं | 11 जुलाई 2025 एवं 24 मार्च 2026 को इंफोर्स्मेंट के द्वारा डाले गए दोनों छापों में मशीनें चलती पकड़ी गईं | अभी भी कारीगर लगे हुए हैं जो आफिस टाइम के अलावा कई बार तो आधी आधी रात तक चलाई जाती हैं | इसके बाद भी इंफोर्स्मेंट वालों के द्वारा किए गए कॉमर्शियल मीटर की श्रेणी बदलकर फरवरी 2026 में डोमेस्टिक कैसे कर दिया गया और 10 अगस्त 2026 को कॉमर्शियल मीटर हटाकर उसी फ्लोर में उसी अवस्था में रीतूजैन के नाम से डोमेस्टिक मीटर कैसे लगा दिया गया ,जबकि व्यावसायिक मशीनें अभी भी चलती हैं | इसकी जाँच कराई जाए और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जाए !

 5. बिजली बिल पर पंजीकृत नाम प्रापर्टी आधार कार्ड फोटो साइन आवेदन के बिना कॉमर्शियल मीटर को डोमेस्टिक कैसे कर दिया गया ? यदि एड्रेस ही गलत था सर्वे किस बिल्डिंग का किया गया ?

विनम्र निवेदन :-   विजय कुमार नाम का फर्जी नाम एड्रेस बिल्डिंगनंबर  फ्लोर नंबर से लगाए गए लावारिस बिजली मीटर से 16 वर्षों से बिजली चोरी का खेल खेला जा रहा है | इसी मीटर से आवासीय फ्लोर में कॉमर्शियल मशीनें   चलाई जाती रही हैं | दो दो बार इंफोर्स्मेंट के छापों में पकड़ी जा चुकी हैं | दो दो बार उसने बिल और जुर्माना माफ करवा लिया | बिजली चोरी का पिछले रिकार्ड पुराना मीटर हटाकर ख़त्म करवा लिया | बिना बिल जमा किए नया मीटर लगवा लिया | मशीनें चलते रहने के बाद भी बार बार कॉमर्शियल मीटर को डोमेस्टिक करवा लेता है | इस सबके बाद न तो बिजली काटी गई और  न इनके विरद्ध पुलिस कंप्लेन की गई न इनके विरुद्ध मुकदमा किया गया और न ही इनका फ्लोर सील किया गया | इसीलिए इन्हें इन्फोर्समेन्ट के छापों से कोई भय नहीं है और ये पिछले 16 वर्षों से गैर कानूनी गतिविधियाँ चलारे जा रहे हैं | इस भ्रष्टाचार से बहुत बड़ावर्ग परिचित है | यदि इसके विरुद्ध BSES ने कठोर कार्यवाही नहीं की गई और  कल किसी दूसरे ऐसे केस पर यदि कोई कठोर एक्शन लिया गया तो इन प्रश्नों का भी उत्तर देना पड़ेगा  | इससे राजस्व का बहुत बड़ा नुक्सान हुआ है |  इस प्रकरण में पल पल पर भ्रष्टाचार व्याप्त है | 

    इसलिए मेरा विनम्र निवेदन है कि इनसे अभी तक का बकाया बिल ,जुर्माना बिल पूरा  वसूला जाए एवं जहाँ जहाँ जितने भी प्रकार का भ्रष्टाचार किया गया है | वहाँ वहाँ उतने प्रकार से मुकदमा चलाकर इन्हें दण्डित किया जाए | और इनके विरुद्ध मुकदमा चलाया जाए |फैसला आने तक इनका फ्लोर सील किया जाए |  

         निवेदक 

     एक सामाजिक कार्यकर्ता 

 

 

 

 

 

उपयोग किया हुआ आखिरी  बिजली बिल Rs 48930 एवं इंफोर्स्मेंट का बकाया बिल 1,33,541.10  है | दोनों मिलाकर ये बिल 1,82,471 होता है |इसके जमा करने की ड्यू डेट 2 फरवरी 2026 थी | ये बिल अभी तक जमा नहीं किया गया है फिर भी 26  फरवरी 2026 को उस कॉमर्शियल मीटर को डोमेस्टिक कर दिया गया | 

निवेदन - यदि बिना कागजों के ,आधारकार्ड, फोटोसाइन ,आवेदन पत्र  और प्रॉपर्टी सर्वे के किसी का बिजली मीटर नहीं लग पाता है तो इस फ्लोर वालों ने अपने लिए लावारिस मीटर कैसे लगवा लिया | इसकी जाँच करवाई जाए | 

 2. 

      इस मीटर के बिल पर लिखा नाम एड्रेस आदि ये है - ये 8 मार्च 2010 को लगाया गया था | बहुत लोगों के द्वारा बार बार कंप्लेन किए जाने के बाद 2 बार इंफोर्स्मेंट की रेड पड़ जाने के बाद इस मीटर को  हटाकर इसमें विशेष बात ये है 

  

 

 

व्यवसायिक बिजली मीटर नहीं है | कुछ भी नियमानुसार न होने के बाद भी अधिकारियों की मिली भगत से भ्रष्टाचार पूर्वक सारे काम किए जा रहे हैं |  इस बिल्डिंग का फस्टफ्लोर रीतू जैन का है |फस्ट फ्लोर के लिए फस्ट फ्लोर वालों के नाम से बिजली मीटर नहीं लगाया गया | कभी कोई या वर्तमान मालिक रीतुजाएँ के नाम से अपना कभी कोई बिजली मीटर नहीं 

1. CA No. 100907780 VIJAY KUMAR, S/O Mr. KULDEEP KUMAR A-7/41/2-A,G/F KRISHNA NGR DELHI NEAR SHANI BAZAR DELHI--110051")  ये मीटर पिछले 16 वर्षों से रीतूजैन वाले A-7/41 के फस्ट फ्लोर में अभी तक उपयोग किया जाता रहा है | इसके बिजलीबिल पर पंजीकृत यह एड्रेस पूरी तरह गलत है |बिल्डिंगनंबर,फ्लोरनंबर, मीटर मालिक का विजयकुमार नाम आदि सब कुछ फर्जी है | यह मीटर जिस विजयकुमार के नाम से लगाया गया है | इस बिल्डिंग की किसी भी रजिस्ट्री में न तो विजयकुमार नाम है और न ही कभी रहा है | विजयकुमार का आधार कार्ड फोटो भी नहीं है | विजयकुमार ने मीटर के लिए आवेदन भी नहीं किया था,उसने किसी कागज़ पर साइन भी नहीं किए थे | मीटर लगाने के लिए इस लावारिस एड्रेस का सर्वे कैसे किया गया होगा | बिना कागजों के यह मीटर लगाया कैसे लगाया गया | ये लावारिस मीटर 16 वर्षों से  चलता कैसे आ रहा था | अनेकों लोगों के द्वारा बार  बार कंप्लेन करने के बाद भी यह लावारिस मीटर हटाया क्यों नहीं गया | 

   श्रीमान जी ! आवश्यक कागजों के बिना इस मीटर लगाया जाना उसे इतने वर्षों तक चलाते रहने दिया जाना,विभिन्न लोगों के द्वारा बार कंप्लेन करने पर भी इस लावारिस मीटर का हटाया नहीं जाना |  मीटर का उपयोग करने वाले के विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्यवाही न किया जाना | जैसी गैर कानूनी गतिविधियाँ  भ्रष्टाचार के बिना संभव न थीं  | 

2. इस विजय कुमार के नाम वाले 16 साल पुराने इस लावारिस मीटर को  22  जून 2026 को हटाकर  23 जून 2026 को उसी फर्जी नाम एड्रेस आदि से उसी जगह नया मीटर लगाया गया | ऐसे लावारिस मीटर को हटाकर उसी नाम से रीतूजैन के लिए गैरकानूनी रूप से  दूसरा भी लावारिस मीटर कैसे लगा दिया गया |विजय कुमार की रजिस्ट्री, आधारकार्ड, फोटो, आवेदन एवं विजयकुमार के साइन के बिना ये सब कैसे किया गया |पुराने मीटर पर बकाया बिल जमा कराए बिना पुराना मीटर  हटाकर उसी लावारिस नाम एड्रेस आदि से नया मीटर कैसे लगाया गया ? एक जब उसी नाम से नया लावारिस मीटर लगाया जाना था तो पुराना लावारिस मीटर ही बना रहने दिया जाता | उसे ही हटाने की आवश्यकता थी ? बताया 

 

का मीटर लगाने के लिए इस लावारिस एड्रेस का सर्वे कैसे किया गया होगा |

 

2 . जिस विजयकुमार के नाम से यह मीटर लगाया गया है | उसका नाम इस बिल्डिंग की किसी रजिस्ट्री में कभी नहीं रहा है और न ही अभी है | विजय कुमार नाम का व्यक्ति इस बिल्डिंग में कभी नहीं रहा |विजय कुमार की कोई फोटो नहीं है, आधारकार्ड नहीं है |विजय कुमार ने मीटर लगाने के लिए अपना साइन करके कभी कोई आवेदन नहीं दिया है | ऐसे आवश्यक कागजों के बिना न तो ये मीटर लगाया जा सकता था और न ही 23 जून 2026 विजय कुमार  नाम से लिए गए पुराने मीटर को हटाकर विजय कुमार नाम का ही नया मीटर आवश्यक कागजों के बिना ही लगा दिया गया है | इन आवश्यक कागजों के बिना ही फरवरी  2026  को मीटर की कामर्शियल से बदलकर डोमेस्टिक कर दी गई है | मीटर मालिक के आवेदन के बिना ही इस पर बकाया लाखों रूपर का बिल माफ कर दिया गया है | 

 

 

 

 2. नया मीटर लगाने के लिए या मीटर को कामर्शियल श्रेणी से बदलकर डोमेस्टिकश्रेणी में  करने के लिए सर्वे किया जाता है | बिजली बिल पर पंजीकृत बिल्डिंग नंबर A-7\41 का 2 A पार्ट कहीं है ही नहीं ,कोई विजय कुमार ही नहीं है कोई रजिस्ट्री ही नहीं है तो मीटर लगाने से पहले एवं  फरवरी 2026 में मीटर को कामर्शियल श्रेणी से बदलकर डोमेस्टिकश्रेणी में  करने से पहले विजय कुमार के नाम की प्रापर्टी का सर्वे कैसे किया गया होगा ? 23 जून 2026 को विजय कुमार के नाम का पुराना मीटर हटाकर विजय कुमार के नाम का ही नया मीटर लगाने के लिए सर्वे कैसे किया गया होगा ? 

3. 

 

जाते फिर भी  निगम एवं बिजली अधिकारियों की मिली भगत से भ्रष्टाचार पूर्वक ये व्यवसाय करता है | कंप्लेन करने पर अधिकारी इसके विरुद्ध कार्यवाही तो करते ही नहीं हैं  प्रत्युत  कंप्लेन करने वाले की सूचना उसे दे देते हैं | बाद में वो गुंडागर्दी करता है | महिला छेड़छाड़ का केस लगाने की धमकी देता है | 

     

 

        भ्रष्टाचार या अधिकारियों की मिलीभगत से 

   A- 7\41,शनि बाजार कृष्णा नगर दिल्ली -110051 के फस्ट फ्लोर वालों की बिजली अधिकारियों के साथ पिछले 16 वर्षों से मिली भगत चलती आ रही है | इन्हें फर्जी एड्रेस का एक लावारिस मीटर देकर उसी की आड़ में बिजली चोरी का खेल खेला जाता रहा है | इनके लिए बिल्डिंग के अंदर एक पैनल लगाया गया था | जिसमें चिमटी लगाकर डायरेक्ट बिजली का उपयोग किया जाता रहा है | वो पैनल बिल्डिंग के अंदर अभी भी लगा है | अब उसमें बिजली नहीं आती है |

     BSES के क्षेत्रीय अधिकारियों के द्वारा इनके लिए लगाए गए इस लावारिस बिजली मीटर पर पंजीकृत नाम बिल्डिंग नंबर फ्लोर नंबर आदि सब कुछ फर्जी है |बिजली बिल पर पंजीकृत नाम बिल्डिंग नंबर फ्लोर नंबर आदि कहीं नहीं है फिर भी ये मीटर न केवल लगा था प्रत्युत पिछले 16 वर्षों से चलता आ रहा है | कंप्लेन करने के बाद भी अधिकारियों ने इसे हटाया नहीं | ऐसा फर्जी मीटर किसी और का पकड़ा जाता तो जुर्माना लगाया जाता पुलिस कम्प्लेन मुकदमा आदि कराया जाता था |सारे नियमों का उल्लंघन करके भी इनके विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं होने दी गई | 

   कंप्लेन करने पर 11-7-2025 को   इन्फोर्समेंट ने छापा डाला | व्यावसायिक मशीनें चलते पकड़ी गईं ,जुर्माना लगाया गया, मीटर की श्रेणी कॉमर्शियल की गई | कुछ महीने बाद बिल और जुर्माना वसूले बिना ही इन्फोर्समेन्ट की कार्यवाही पलट दी गई | बकाया बिल जुर्माना आदि माफ करके 26 -2-2026 को  मीटर की श्रेणी कॉमर्शियल से बदलकर डोमेस्टिक कर दी गई  | व्यावसायिक मशीनें इस बीच भी उसी प्रकार से चलती रहीं | रजिस्ट्री आधारकार्ड फोटो आवेदन साइन आदि के बिना ही ये सब कुछ किया गया | 

      इन्फोर्समेन्ट में फिर शिकायत हुई 24 -3 -2026 को फिर छापा पड़ा फिर व्यावसायिक मशीनें  चलती पकड़ी गईं,फिर जुर्माना लगा ,फिर मीटर कॉमर्शियल किया गया | उस बिल और जुर्माने को वसूला गया या नहीं किंतु 10 अगस्त 2026 को फ्लोर मालिक रीतूजैन के नाम नया मीटर लगा दिया गया | 

     इस मीटर में बार बार छेड़छाड़ करके इसकी रीडिंग कम की जाती रही है | जिससे घर में A C गीजर एवं व्यावसायिक मशीनें चलने पर भी रीडिंग अधिक नहीं आती रही है | इस मीटर की जाँच होती तो बिजली चोरी का  सारा रिकार्ड सामने आ जाता | ऐसा न हो इसके लिए 22 -6 - 2026 को विजय कुमार वाला वह फर्जी मीटर उतारा गया | उसकी जगह विजय कुमार के ही नाम से 23 -6 - 2026 को नया मीटर लगाकर पुराना बिजली चोरी का रिकार्ड गायब कर दिया गया |  रजिस्ट्री आधारकार्ड फोटो आवेदन साइन आदि के बिना ही ये सब कुछ किया गया |नया मीटर भी लगा दिया गया |  

   विजय कुमार के नाम का वह नया मीटर उतार कर उसकी जगह रीतूजैन के नाम से 10 अगस्त 2026 को नया मीटर लगाया गया | कॉमर्शियल श्रेणी का मीटर हटाकर कॉमर्शियल श्रेणी का ही मीटर लगाया जाना चाहिए था किंतु उसकी जगह डोमेस्टिक मीटर लगाया गया जबकि मशीनें अभी भी चल रही हैं | 

     कुल मिलाकर इस फ्लोर वालों ने अपने नाम से कभी कोई मीटर लगवाया ही नहीं |BSES के अधिकारियों की मिली भगत से  विजय कुमार नाम वाले इसी फर्जी मीटर की आड़ में चोरी की बिजली से काम चलाते रहे हैं |इससे बिल्डिंग के लोगों का तो  नुक्सान तो होता ही है | राजस्व का भी नुक्सान हुआ है, भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला है | इंफोर्स्मेंट विभाग  की कार्यवाही बार बार पलटने से उनकी  विश्वसनीयता घटी है | BSES के द्वारा आम लोगों के लिए बनाए गए नियमों के पालन में पक्षपात पूर्वक व्यवहार किया गया है |अधिकारियों ने पदों का दुरुपयोग किया है | नियमों के पालन में अनियमितता बरती गई है |  ऐसा प्रमाणित होता है | इसके साथ सभी बिल ,इंफोर्स्मेंट के बिल ,तीनों मीटरों की फोटो ,पुराने उस पैनल की फोटो संलग्न है |  

                             इस फ्लोर वालों के लिए नियमों को ताख पर रखकर किए जाते रहे हैं ये काम ! 

    CA No. 100907780 VIJAY KUMAR, S/O Mr. KULDEEP KUMAR A-7/41/2-A,G/F KRISHNA NGR DELHI NEAR SHANI BAZAR DELHI--110051") 

  1.  ये मीटर जिस बिल्डिंग में लगा है उसका  A-7/41 बिल्डिंग नंबर है किंतु इसका  '2-A पार्ट' न ही इस बिल्डिंग के किसी रजिस्ट्री आदि दस्तावेज में है और न ही भौतिक रूप से कहीं विद्यमान है | ऐसी स्थिति में इस मीटर को लगाने से पूर्व  रजिस्ट्री आदि दस्तावेज चेक करने एवं भौतिक सर्वे करने में BSES के नियमों का पालन नहीं किया गया था | 

2. बिल्डिंग नंबर ही गलत है तो इसमें लिखा ग्राउंडफ्लोर भी गलत है |वैसे भी '2-A पार्ट' की जगह केवल  A-7/41 को ही देखा जाए तो इसके ग्राउंड फ्लोर पर रहने के लिए  कोई जगह ही नहीं है | इसलिए इस बिल्डिंग ग्राउंडफ्लोर के लिए कोई आवासीय मीटर नहीं लगाया जा सकता है   

3. इसके बिजली बिल पर लिखा विजयकुमार नाम इस बिल्डिंग के रजिस्ट्री आदि किसी दस्तावेज में नहीं है और न ही विजय कुमार नाम का कोई व्यक्ति इस बिल्डिंग में कभी रहा है |यदि विजयकुमार नाम का कोई व्यक्ति ही नहीं है तो विजयकुमार की फोटो  आधार कार्ड वोटर आई डी कैसे हो सकता है | मीटर  का आवेदन एवं आवेदन पत्र पर साइन उसने कैसे  करवाए  गए होंगे | ऐसी स्थिति में उसके नाम से यह मीटर कैसे लगाया जा सकता है |

4.कॉमर्शियल मीटर को डोमेस्टिक कराने के लिए बिजली बिल पर पंजीकृत विजयकुमार की पहचान का कोई प्रमाण पत्र नहीं है | फोटो नहीं है | विजयकुमार ने आवेदन पत्र पर या किसी अन्य कागज पर साइन नहीं किए हैं |विजयकुमार ने कॉमर्शियल मीटर को डोमेस्टिक कराने के लिए कोई आवेदन नहीं दिया है | बिजली मीटर पर  पंजीकृत प्रापर्टी के स्वामित्व वाले दस्तावेज नहीं थे | यहाँ व्यावसायिक काम नहीं हो रहा है | इसका कोई विश्वसनीय घोषणा पत्र नहीं था | मशीनें वहाँ पहले की तरह ही चल रहीं थीं | ऐसे में साईट इन्फ़ेक्सन नहीं हुआ या फर्जी हुआ था | उसका 11 जुलाई 2025 से बकाया चला आ रहा उपयोग किया हुआ आखिरी  बिजली बिल Rs 48930 एवं इंफोर्स्मेंट का बकाया बिल 1,33,541.10  है | दोनों मिलाकर ये बिल 1,82,471 होता है |इसके जमा करने की ड्यू डेट 2 फरवरी 2026 थी | ये बिल अभी तक जमा नहीं किया गया है फिर भी 26  फरवरी 2026 को उस कॉमर्शियल मीटर को डोमेस्टिक कर दिया गया |  ये बिल संलग्न है | 

5 . इस फ्लोर में व्यावसायिक मशीनें कुछ वर्षों से चल रही थीं | 11 जुलाई 2025  को इंफोर्स्मेंट के छापें में वे चलती पकड़ी गईं | इसके बाद 24 मार्च 2026 के इंफोर्स्मेंट के दूसरे छापे में भी चलती पकड़ी गईं | इसका मतलब 11 जुलाई 2025 से लेकर 24 मार्च 2026 के बीच मशीनें लगातार चलाई जा रही थीं | इसका मतलब फरवरी 2026 में भी वहाँ बड़ी व्यावसायिक मशीनें चलाई जा रहीं थीं किंतु कॉमर्शियल मीटर को डोमेस्टिक करने के उद्देश्य से फरवरी 2026 के फर्जी सर्वे में दिखाया गया कि अब वहाँ ऐसी कोई व्यावसायिकमशीनें नहीं चल रही हैं | मान्यवर, ये मशीनें बड़ी हैं जिन्हें चुप चाप बाहर ले जाकर दुबारा गुपचुप रूप से अंदर नहीं रखा जा सकता है | दूसरी बात बिल्डिंग  के अंदर बाहर सभी जगत तो कैमरे लगे हैं | मशीनें निकाली गई होतीं तो दिखाई पड़तीं | 

6 . 24 मार्च 2026 को इंफोर्स्मेंट के दूसरे छापे में भी मीटर कॉमर्शियल किया गया था और जुर्माना लगाया गया था | संभव है वह भी न जमा कराया गया हो और 10 अगस्त 2026 को नया मीटर लगा दिया गया है | 

7. इस मीटर पर बकाया बिल जमा न होने के कारण 22 जून 2026 को पुराना मीटर उतार कर बकाया धनराशि जमा कराए बिना ही  23 जून 2026 को उसी नाम और उसी स्थान पर नया मीटर लगा दिया गया |

8.फर्जी एड्रेस पर पंजीकृत  विजय कुमार के नाम से लगा लावारिस बिजली मीटर  22 जून 2026 को उतार कर उसी लावारिस नाम और एड्रेस से 23  जून 2026 को एक नया लावारिस बिजली मीटर लगा दिया गया | किसी लावारिस बिजली मीटर को एक बार उतारे जाने के बाद क्या उसी लावारिस नाम  और एड्रेस से बिना आवश्यक कागजों के नया मीटर नहीं लगाया जा सकता है ,किंतु यहाँ लगाया गया है ? 

 9 . प्रापर्टी मालिक रीतूजैन के नाम से यदि नया लीगल मीटर 10 अगस्त 2026 को लगाया ही जाना था तो 22 जून 2026 को रीतूजैन के नाम से ही नया लीगल मीटर  लगा दिया जाता | आखिर 22 जून 2026 से 10 अगस्त 2026 के बीच के लिए पुराना लावारिस मीटर हटाकर उसी जगह नया लावारिस मीटर कागजों के बिना गैर कानूनी रूप से लगाने की आवश्यकता ही क्या थी ? इन तीनों मीटरों की फोटो संलग्न है | 

 10. विजयकुमार के नाम से लगे इस लावारिस मीटर में रीडिंग कम करने के लिए बार बार छेड़ छाड़ की गई थी | इसी प्रकार से इस फ्लोर में AC,कूलर ,पंखा गीजर मोटर एवं व्यावसायिक मशीनें आदि चलाने में चोरी की बिजली का उपयोग किया जा रहा था | इस मीटर को उतारते ही यदि प्रापर्टी मालिक रीतूजैन के नाम से नया लीगल मीटर लगा दिया जाता तो इस छेड़ छाड़वाले बिजली मीटर की जाँच की जाती तो इससे वर्षों से की जाती रही बिजली चोरी पकड़ी जाती | इसीलिए इस लावारिस मीटर को उतार कर पिछले सारा छेड़ छाड़ बिजली चोरी आदि का रिकार्ड ख़त्म कर दिया गया | इसकी जगह इसीनाम से नया लावारिस मीटर 48 दिनों के लिए लगा दिया गया | इसे उतार कर नया लीगल मीटर लगाया गया | इस मीटर की जाँच करने में पुरानी बिजली चोरी या छेड़ छाड़ के सबूत मिलने ही नहीं थे | सारे सबूत नष्ट कर दिए गए |

 11.विजयकुमार के नाम से लगे इस लावारिस मीटर को 10 अगस्त 2026 को जब हटाया गया तब तक इस मीटर का उपयोग इसी फ्लोर में व्यावसायिक मशीनें चलाने में हो रहा था | मशीनें कुछ वर्षों से लगातार चलती आ रहीं थीं | इसी फ्लोर में इन्हीं मशीनों को चलाने के लिए रीतू जैन के नाम जो लीगल मीटर लगाया गया उसकी श्रेणी मशीनें हटाए बिना डोमेस्टिक कैसे की जा सकती थी किंतु ऐसा कर दिया गया | नया मीटर गैर कानूनी रूप से डोमेस्टिक लगाया गया है |  


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 मान्यवर नमस्कार 

  बिषय :भ्रष्टाचार पूर्वक फर्जी कागजों के आधार पर लगाए गए लावारिस मीटर के संदर्भ में -   

     महोदय 

     निवेदन है कि A- 7\41,शनि बाजार कृष्णा नगर दिल्ली -110051 में 5 दुकानें 3 फ्लोर हैं | इसमें फस्टफ्लोर रीतू जैन का है | जिसमें किराएदार महेंद्र जैन परिवार सहित रहने के साथ साथ व्यावसायिक मशीनें लगाकर कारोबार भी करता है | ये आवासीय फ्लोर है, इसके पास ट्रेड लाइसेंस नहीं है,कन्वर्जन नहीं जमा किया है, व्यवसायिक बिजली मीटर नहीं है | कुछ भी नियमानुसार न होने के बाद भी अधिकारियों की मिली भगत से भ्रष्टाचार पूर्वक सारे काम किए जा रहे हैं |  इस बिल्डिंग का फस्टफ्लोर रीतू जैन का है |फस्ट फ्लोर के लिए फस्ट फ्लोर वालों के नाम से बिजली मीटर नहीं लगाया गया | कभी कोई या वर्तमान मालिक रीतुजाएँ के नाम से अपना कभी कोई बिजली मीटर नहीं 

1. CA No. 100907780 VIJAY KUMAR, S/O Mr. KULDEEP KUMAR A-7/41/2-A,G/F KRISHNA NGR DELHI NEAR SHANI BAZAR DELHI--110051")  ये मीटर पिछले 16 वर्षों से रीतूजैन वाले A-7/41 के फस्ट फ्लोर में अभी तक उपयोग किया जाता रहा है | इसके बिजलीबिल पर पंजीकृत यह एड्रेस पूरी तरह गलत है |बिल्डिंगनंबर,फ्लोरनंबर, मीटर मालिक का विजयकुमार नाम आदि सब कुछ फर्जी है | यह मीटर जिस विजयकुमार के नाम से लगाया गया है | इस बिल्डिंग की किसी भी रजिस्ट्री में न तो विजयकुमार नाम है और न ही कभी रहा है | विजयकुमार का आधार कार्ड फोटो भी नहीं है | विजयकुमार ने मीटर के लिए आवेदन भी नहीं किया था,उसने किसी कागज़ पर साइन भी नहीं किए थे | मीटर लगाने के लिए इस लावारिस एड्रेस का सर्वे कैसे किया गया होगा | बिना कागजों के यह मीटर लगाया कैसे लगाया गया | ये लावारिस मीटर 16 वर्षों से  चलता कैसे आ रहा था | अनेकों लोगों के द्वारा बार  बार कंप्लेन करने के बाद भी यह लावारिस मीटर हटाया क्यों नहीं गया | 

   श्रीमान जी ! आवश्यक कागजों के बिना इस मीटर लगाया जाना उसे इतने वर्षों तक चलाते रहने दिया जाना,विभिन्न लोगों के द्वारा बार कंप्लेन करने पर भी इस लावारिस मीटर का हटाया नहीं जाना |  मीटर का उपयोग करने वाले के विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्यवाही न किया जाना | जैसी गैर कानूनी गतिविधियाँ  भ्रष्टाचार के बिना संभव न थीं  | 

2. इस विजय कुमार के नाम वाले 16 साल पुराने इस लावारिस मीटर को  22  जून 2026 को हटाकर  23 जून 2026 को उसी फर्जी नाम एड्रेस आदि से उसी जगह नया मीटर लगाया गया | ऐसे लावारिस मीटर को हटाकर उसी नाम से रीतूजैन के लिए गैरकानूनी रूप से  दूसरा भी लावारिस मीटर कैसे लगा दिया गया |विजय कुमार की रजिस्ट्री, आधारकार्ड, फोटो, आवेदन एवं विजयकुमार के साइन के बिना ये सब कैसे किया गया |पुराने मीटर पर बकाया बिल जमा कराए बिना पुराना मीटर  हटाकर उसी लावारिस नाम एड्रेस आदि से नया मीटर कैसे लगाया गया ? एक जब उसी नाम से नया लावारिस मीटर लगाया जाना था तो पुराना लावारिस मीटर ही बना रहने दिया जाता | उसे ही हटाने की आवश्यकता थी ? बताया 

 

का मीटर लगाने के लिए इस लावारिस एड्रेस का सर्वे कैसे किया गया होगा |

 

2 . जिस विजयकुमार के नाम से यह मीटर लगाया गया है | उसका नाम इस बिल्डिंग की किसी रजिस्ट्री में कभी नहीं रहा है और न ही अभी है | विजय कुमार नाम का व्यक्ति इस बिल्डिंग में कभी नहीं रहा |विजय कुमार की कोई फोटो नहीं है, आधारकार्ड नहीं है |विजय कुमार ने मीटर लगाने के लिए अपना साइन करके कभी कोई आवेदन नहीं दिया है | ऐसे आवश्यक कागजों के बिना न तो ये मीटर लगाया जा सकता था और न ही 23 जून 2026 विजय कुमार  नाम से लिए गए पुराने मीटर को हटाकर विजय कुमार नाम का ही नया मीटर आवश्यक कागजों के बिना ही लगा दिया गया है | इन आवश्यक कागजों के बिना ही फरवरी  2026  को मीटर की कामर्शियल से बदलकर डोमेस्टिक कर दी गई है | मीटर मालिक के आवेदन के बिना ही इस पर बकाया लाखों रूपर का बिल माफ कर दिया गया है | 

 

 

 

 2. नया मीटर लगाने के लिए या मीटर को कामर्शियल श्रेणी से बदलकर डोमेस्टिकश्रेणी में  करने के लिए सर्वे किया जाता है | बिजली बिल पर पंजीकृत बिल्डिंग नंबर A-7\41 का 2 A पार्ट कहीं है ही नहीं ,कोई विजय कुमार ही नहीं है कोई रजिस्ट्री ही नहीं है तो मीटर लगाने से पहले एवं  फरवरी 2026 में मीटर को कामर्शियल श्रेणी से बदलकर डोमेस्टिकश्रेणी में  करने से पहले विजय कुमार के नाम की प्रापर्टी का सर्वे कैसे किया गया होगा ? 23 जून 2026 को विजय कुमार के नाम का पुराना मीटर हटाकर विजय कुमार के नाम का ही नया मीटर लगाने के लिए सर्वे कैसे किया गया होगा ? 

3. 

 

जाते फिर भी  निगम एवं बिजली अधिकारियों की मिली भगत से भ्रष्टाचार पूर्वक ये व्यवसाय करता है | कंप्लेन करने पर अधिकारी इसके विरुद्ध कार्यवाही तो करते ही नहीं हैं  प्रत्युत  कंप्लेन करने वाले की सूचना उसे दे देते हैं | बाद में वो गुंडागर्दी करता है | महिला छेड़छाड़ का केस लगाने की धमकी देता है | 

     

 

        भ्रष्टाचार या अधिकारियों की मिलीभगत से 

   A- 7\41,शनि बाजार कृष्णा नगर दिल्ली -110051 के फस्ट फ्लोर वालों की बिजली अधिकारियों के साथ पिछले 16 वर्षों से मिली भगत चलती आ रही है | इन्हें फर्जी एड्रेस का एक लावारिस मीटर देकर उसी की आड़ में बिजली चोरी का खेल खेला जाता रहा है | इनके लिए बिल्डिंग के अंदर एक पैनल लगाया गया था | जिसमें चिमटी लगाकर डायरेक्ट बिजली का उपयोग किया जाता रहा है | वो पैनल बिल्डिंग के अंदर अभी भी लगा है | अब उसमें बिजली नहीं आती है |

     BSES के क्षेत्रीय अधिकारियों के द्वारा इनके लिए लगाए गए इस लावारिस बिजली मीटर पर पंजीकृत नाम बिल्डिंग नंबर फ्लोर नंबर आदि सब कुछ फर्जी है |बिजली बिल पर पंजीकृत नाम बिल्डिंग नंबर फ्लोर नंबर आदि कहीं नहीं है फिर भी ये मीटर न केवल लगा था प्रत्युत पिछले 16 वर्षों से चलता आ रहा है | कंप्लेन करने के बाद भी अधिकारियों ने इसे हटाया नहीं | ऐसा फर्जी मीटर किसी और का पकड़ा जाता तो जुर्माना लगाया जाता पुलिस कम्प्लेन मुकदमा आदि कराया जाता था |सारे नियमों का उल्लंघन करके भी इनके विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं होने दी गई | 

   कंप्लेन करने पर 11-7-2025 को   इन्फोर्समेंट ने छापा डाला | व्यावसायिक मशीनें चलते पकड़ी गईं ,जुर्माना लगाया गया, मीटर की श्रेणी कॉमर्शियल की गई | कुछ महीने बाद बिल और जुर्माना वसूले बिना ही इन्फोर्समेन्ट की कार्यवाही पलट दी गई | बकाया बिल जुर्माना आदि माफ करके 26 -2-2026 को  मीटर की श्रेणी कॉमर्शियल से बदलकर डोमेस्टिक कर दी गई  | व्यावसायिक मशीनें इस बीच भी उसी प्रकार से चलती रहीं | रजिस्ट्री आधारकार्ड फोटो आवेदन साइन आदि के बिना ही ये सब कुछ किया गया | 

      इन्फोर्समेन्ट में फिर शिकायत हुई 24 -3 -2026 को फिर छापा पड़ा फिर व्यावसायिक मशीनें  चलती पकड़ी गईं,फिर जुर्माना लगा ,फिर मीटर कॉमर्शियल किया गया | उस बिल और जुर्माने को वसूला गया या नहीं किंतु 10 अगस्त 2026 को फ्लोर मालिक रीतूजैन के नाम नया मीटर लगा दिया गया | 

     इस मीटर में बार बार छेड़छाड़ करके इसकी रीडिंग कम की जाती रही है | जिससे घर में A C गीजर एवं व्यावसायिक मशीनें चलने पर भी रीडिंग अधिक नहीं आती रही है | इस मीटर की जाँच होती तो बिजली चोरी का  सारा रिकार्ड सामने आ जाता | ऐसा न हो इसके लिए 22 -6 - 2026 को विजय कुमार वाला वह फर्जी मीटर उतारा गया | उसकी जगह विजय कुमार के ही नाम से 23 -6 - 2026 को नया मीटर लगाकर पुराना बिजली चोरी का रिकार्ड गायब कर दिया गया |  रजिस्ट्री आधारकार्ड फोटो आवेदन साइन आदि के बिना ही ये सब कुछ किया गया |नया मीटर भी लगा दिया गया |  

   विजय कुमार के नाम का वह नया मीटर उतार कर उसकी जगह रीतूजैन के नाम से 10 अगस्त 2026 को नया मीटर लगाया गया | कॉमर्शियल श्रेणी का मीटर हटाकर कॉमर्शियल श्रेणी का ही मीटर लगाया जाना चाहिए था किंतु उसकी जगह डोमेस्टिक मीटर लगाया गया जबकि मशीनें अभी भी चल रही हैं | 

     कुल मिलाकर इस फ्लोर वालों ने अपने नाम से कभी कोई मीटर लगवाया ही नहीं |BSES के अधिकारियों की मिली भगत से  विजय कुमार नाम वाले इसी फर्जी मीटर की आड़ में चोरी की बिजली से काम चलाते रहे हैं |इससे बिल्डिंग के लोगों का तो  नुक्सान तो होता ही है | राजस्व का भी नुक्सान हुआ है, भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला है | इंफोर्स्मेंट विभाग  की कार्यवाही बार बार पलटने से उनकी  विश्वसनीयता घटी है | BSES के द्वारा आम लोगों के लिए बनाए गए नियमों के पालन में पक्षपात पूर्वक व्यवहार किया गया है |अधिकारियों ने पदों का दुरुपयोग किया है | नियमों के पालन में अनियमितता बरती गई है |  ऐसा प्रमाणित होता है | इसके साथ सभी बिल ,इंफोर्स्मेंट के बिल ,तीनों मीटरों की फोटो ,पुराने उस पैनल की फोटो संलग्न है |  

                             इस फ्लोर वालों के लिए नियमों को ताख पर रखकर किए जाते रहे हैं ये काम ! 

    CA No. 100907780 VIJAY KUMAR, S/O Mr. KULDEEP KUMAR A-7/41/2-A,G/F KRISHNA NGR DELHI NEAR SHANI BAZAR DELHI--110051") 

  1.  ये मीटर जिस बिल्डिंग में लगा है उसका  A-7/41 बिल्डिंग नंबर है किंतु इसका  '2-A पार्ट' न ही इस बिल्डिंग के किसी रजिस्ट्री आदि दस्तावेज में है और न ही भौतिक रूप से कहीं विद्यमान है | ऐसी स्थिति में इस मीटर को लगाने से पूर्व  रजिस्ट्री आदि दस्तावेज चेक करने एवं भौतिक सर्वे करने में BSES के नियमों का पालन नहीं किया गया था | 

2. बिल्डिंग नंबर ही गलत है तो इसमें लिखा ग्राउंडफ्लोर भी गलत है |वैसे भी '2-A पार्ट' की जगह केवल  A-7/41 को ही देखा जाए तो इसके ग्राउंड फ्लोर पर रहने के लिए  कोई जगह ही नहीं है | इसलिए इस बिल्डिंग ग्राउंडफ्लोर के लिए कोई आवासीय मीटर नहीं लगाया जा सकता है   

3. इसके बिजली बिल पर लिखा विजयकुमार नाम इस बिल्डिंग के रजिस्ट्री आदि किसी दस्तावेज में नहीं है और न ही विजय कुमार नाम का कोई व्यक्ति इस बिल्डिंग में कभी रहा है |यदि विजयकुमार नाम का कोई व्यक्ति ही नहीं है तो विजयकुमार की फोटो  आधार कार्ड वोटर आई डी कैसे हो सकता है | मीटर  का आवेदन एवं आवेदन पत्र पर साइन उसने कैसे  करवाए  गए होंगे | ऐसी स्थिति में उसके नाम से यह मीटर कैसे लगाया जा सकता है |

4.कॉमर्शियल मीटर को डोमेस्टिक कराने के लिए बिजली बिल पर पंजीकृत विजयकुमार की पहचान का कोई प्रमाण पत्र नहीं है | फोटो नहीं है | विजयकुमार ने आवेदन पत्र पर या किसी अन्य कागज पर साइन नहीं किए हैं |विजयकुमार ने कॉमर्शियल मीटर को डोमेस्टिक कराने के लिए कोई आवेदन नहीं दिया है | बिजली मीटर पर  पंजीकृत प्रापर्टी के स्वामित्व वाले दस्तावेज नहीं थे | यहाँ व्यावसायिक काम नहीं हो रहा है | इसका कोई विश्वसनीय घोषणा पत्र नहीं था | मशीनें वहाँ पहले की तरह ही चल रहीं थीं | ऐसे में साईट इन्फ़ेक्सन नहीं हुआ या फर्जी हुआ था | उसका 11 जुलाई 2025 से बकाया चला आ रहा उपयोग किया हुआ आखिरी  बिजली बिल Rs 48930 एवं इंफोर्स्मेंट का बकाया बिल 1,33,541.10  है | दोनों मिलाकर ये बिल 1,82,471 होता है |इसके जमा करने की ड्यू डेट 2 फरवरी 2026 थी | ये बिल अभी तक जमा नहीं किया गया है फिर भी 26  फरवरी 2026 को उस कॉमर्शियल मीटर को डोमेस्टिक कर दिया गया |  ये बिल संलग्न है | 

5 . इस फ्लोर में व्यावसायिक मशीनें कुछ वर्षों से चल रही थीं | 11 जुलाई 2025  को इंफोर्स्मेंट के छापें में वे चलती पकड़ी गईं | इसके बाद 24 मार्च 2026 के इंफोर्स्मेंट के दूसरे छापे में भी चलती पकड़ी गईं | इसका मतलब 11 जुलाई 2025 से लेकर 24 मार्च 2026 के बीच मशीनें लगातार चलाई जा रही थीं | इसका मतलब फरवरी 2026 में भी वहाँ बड़ी व्यावसायिक मशीनें चलाई जा रहीं थीं किंतु कॉमर्शियल मीटर को डोमेस्टिक करने के उद्देश्य से फरवरी 2026 के फर्जी सर्वे में दिखाया गया कि अब वहाँ ऐसी कोई व्यावसायिकमशीनें नहीं चल रही हैं | मान्यवर, ये मशीनें बड़ी हैं जिन्हें चुप चाप बाहर ले जाकर दुबारा गुपचुप रूप से अंदर नहीं रखा जा सकता है | दूसरी बात बिल्डिंग  के अंदर बाहर सभी जगत तो कैमरे लगे हैं | मशीनें निकाली गई होतीं तो दिखाई पड़तीं | 

6 . 24 मार्च 2026 को इंफोर्स्मेंट के दूसरे छापे में भी मीटर कॉमर्शियल किया गया था और जुर्माना लगाया गया था | संभव है वह भी न जमा कराया गया हो और 10 अगस्त 2026 को नया मीटर लगा दिया गया है | 

7. इस मीटर पर बकाया बिल जमा न होने के कारण 22 जून 2026 को पुराना मीटर उतार कर बकाया धनराशि जमा कराए बिना ही  23 जून 2026 को उसी नाम और उसी स्थान पर नया मीटर लगा दिया गया |

8.फर्जी एड्रेस पर पंजीकृत  विजय कुमार के नाम से लगा लावारिस बिजली मीटर  22 जून 2026 को उतार कर उसी लावारिस नाम और एड्रेस से 23  जून 2026 को एक नया लावारिस बिजली मीटर लगा दिया गया | किसी लावारिस बिजली मीटर को एक बार उतारे जाने के बाद क्या उसी लावारिस नाम  और एड्रेस से बिना आवश्यक कागजों के नया मीटर नहीं लगाया जा सकता है ,किंतु यहाँ लगाया गया है ? 

 9 . प्रापर्टी मालिक रीतूजैन के नाम से यदि नया लीगल मीटर 10 अगस्त 2026 को लगाया ही जाना था तो 22 जून 2026 को रीतूजैन के नाम से ही नया लीगल मीटर  लगा दिया जाता | आखिर 22 जून 2026 से 10 अगस्त 2026 के बीच के लिए पुराना लावारिस मीटर हटाकर उसी जगह नया लावारिस मीटर कागजों के बिना गैर कानूनी रूप से लगाने की आवश्यकता ही क्या थी ? इन तीनों मीटरों की फोटो संलग्न है | 

 10. विजयकुमार के नाम से लगे इस लावारिस मीटर में रीडिंग कम करने के लिए बार बार छेड़ छाड़ की गई थी | इसी प्रकार से इस फ्लोर में AC,कूलर ,पंखा गीजर मोटर एवं व्यावसायिक मशीनें आदि चलाने में चोरी की बिजली का उपयोग किया जा रहा था | इस मीटर को उतारते ही यदि प्रापर्टी मालिक रीतूजैन के नाम से नया लीगल मीटर लगा दिया जाता तो इस छेड़ छाड़वाले बिजली मीटर की जाँच की जाती तो इससे वर्षों से की जाती रही बिजली चोरी पकड़ी जाती | इसीलिए इस लावारिस मीटर को उतार कर पिछले सारा छेड़ छाड़ बिजली चोरी आदि का रिकार्ड ख़त्म कर दिया गया | इसकी जगह इसीनाम से नया लावारिस मीटर 48 दिनों के लिए लगा दिया गया | इसे उतार कर नया लीगल मीटर लगाया गया | इस मीटर की जाँच करने में पुरानी बिजली चोरी या छेड़ छाड़ के सबूत मिलने ही नहीं थे | सारे सबूत नष्ट कर दिए गए |

 11.विजयकुमार के नाम से लगे इस लावारिस मीटर को 10 अगस्त 2026 को जब हटाया गया तब तक इस मीटर का उपयोग इसी फ्लोर में व्यावसायिक मशीनें चलाने में हो रहा था | मशीनें कुछ वर्षों से लगातार चलती आ रहीं थीं | इसी फ्लोर में इन्हीं मशीनों को चलाने के लिए रीतू जैन के नाम जो लीगल मीटर लगाया गया उसकी श्रेणी मशीनें हटाए बिना डोमेस्टिक कैसे की जा सकती थी किंतु ऐसा कर दिया गया | नया मीटर गैर कानूनी रूप से डोमेस्टिक लगाया गया है |  



 

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 मान्यवर नमस्कार 

  बिषय :भ्रष्टाचार पूर्वक फर्जी कागजों के आधार पर लगाए गए लावारिस मीटर के संदर्भ में -   

     महोदय 

     निवेदन है कि A- 7\41,शनि बाजार कृष्णा नगर दिल्ली -110051 में 5 दुकानें 3 फ्लोर हैं | इसमें फस्टफ्लोर रीतू जैन का है | जिसमें किराएदार महेंद्र जैन परिवार सहित रहने के साथ साथ व्यावसायिक मशीनें लगाकर कारोबार भी करता है | ये आवासीय फ्लोर है, इसके पास ट्रेड लाइसेंस नहीं है,कन्वर्जन नहीं जमा किया है, व्यवसायिक बिजली मीटर नहीं है,फिर भी  निगम एवं बिजली अधिकारियों की मिली भगत से भ्रष्टाचार पूर्वक ये व्यवसाय करता है | कंप्लेन करने पर अधिकारी इसके विरुद्ध कार्यवाही तो करते ही नहीं हैं  प्रत्युत  वाले की सूचना उसे दे देते हैं | बाद में वो गुंडागर्दी करता है | महिला छेड़छाड़ का केस लगाने की धमकी देता है | 

     A- 7\41,शनि बाजार कृष्णा नगर दिल्ली -110051 के फस्ट फ्लोर वालों की बिजली अधिकारियों के साथ पिछले 16 वर्षों से मिली भगत चलती आ रही है | इन्हें फर्जी एड्रेस का एक लावारिस मीटर देकर उसी की आड़ में बिजली चोरी का खेल खेला जाता रहा है | इनके लिए बिल्डिंग के अंदर एक पैनल लगाया गया था | जिसमें चिमटी लगाकर डायरेक्ट बिजली का उपयोग किया जाता रहा है | वो पैनल बिल्डिंग के अंदर अभी भी लगा है | अब उसमें बिजली नहीं आती है |

     BSES के क्षेत्रीय अधिकारियों के द्वारा इनके लिए लगाए गए इस लावारिस बिजली मीटर पर पंजीकृत नाम बिल्डिंग नंबर फ्लोर नंबर आदि सब कुछ फर्जी है |बिजली बिल पर पंजीकृत नाम बिल्डिंग नंबर फ्लोर नंबर आदि कहीं नहीं है फिर भी ये मीटर न केवल लगा था प्रत्युत पिछले 16 वर्षों से चलता आ रहा है | कंप्लेन करने के बाद भी अधिकारियों ने इसे हटाया नहीं | ऐसा फर्जी मीटर किसी और का पकड़ा जाता तो जुर्माना लगाया जाता पुलिस कम्प्लेन मुकदमा आदि कराया जाता था |सारे नियमों का उल्लंघन करके भी इनके विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं होने दी गई | 

   कंप्लेन करने पर 11-7-2025 को   इन्फोर्समेंट ने छापा डाला | व्यावसायिक मशीनें चलते पकड़ी गईं ,जुर्माना लगाया गया, मीटर की श्रेणी कॉमर्शियल की गई | कुछ महीने बाद बिल और जुर्माना वसूले बिना ही इन्फोर्समेन्ट की कार्यवाही पलट दी गई | बकाया बिल जुर्माना आदि माफ करके 26 -2-2026 को  मीटर की श्रेणी कॉमर्शियल से बदलकर डोमेस्टिक कर दी गई  | व्यावसायिक मशीनें इस बीच भी उसी प्रकार से चलती रहीं | रजिस्ट्री आधारकार्ड फोटो आवेदन साइन आदि के बिना ही ये सब कुछ किया गया | 

      इन्फोर्समेन्ट में फिर शिकायत हुई 24 -3 -2026 को फिर छापा पड़ा फिर व्यावसायिक मशीनें  चलती पकड़ी गईं,फिर जुर्माना लगा ,फिर मीटर कॉमर्शियल किया गया | उस बिल और जुर्माने को वसूला गया या नहीं किंतु 10 अगस्त 2026 को फ्लोर मालिक रीतूजैन के नाम नया मीटर लगा दिया गया | 

     इस मीटर में बार बार छेड़छाड़ करके इसकी रीडिंग कम की जाती रही है | जिससे घर में A C गीजर एवं व्यावसायिक मशीनें चलने पर भी रीडिंग अधिक नहीं आती रही है | इस मीटर की जाँच होती तो बिजली चोरी का  सारा रिकार्ड सामने आ जाता | ऐसा न हो इसके लिए 22 -6 - 2026 को विजय कुमार वाला वह फर्जी मीटर उतारा गया | उसकी जगह विजय कुमार के ही नाम से 23 -6 - 2026 को नया मीटर लगाकर पुराना बिजली चोरी का रिकार्ड गायब कर दिया गया |  रजिस्ट्री आधारकार्ड फोटो आवेदन साइन आदि के बिना ही ये सब कुछ किया गया |नया मीटर भी लगा दिया गया |  

   विजय कुमार के नाम का वह नया मीटर उतार कर उसकी जगह रीतूजैन के नाम से 10 अगस्त 2026 को नया मीटर लगाया गया | कॉमर्शियल श्रेणी का मीटर हटाकर कॉमर्शियल श्रेणी का ही मीटर लगाया जाना चाहिए था किंतु उसकी जगह डोमेस्टिक मीटर लगाया गया जबकि मशीनें अभी भी चल रही हैं | 

     कुल मिलाकर इस फ्लोर वालों ने अपने नाम से कभी कोई मीटर लगवाया ही नहीं |BSES के अधिकारियों की मिली भगत से  विजय कुमार नाम वाले इसी फर्जी मीटर की आड़ में चोरी की बिजली से काम चलाते रहे हैं |इससे बिल्डिंग के लोगों का तो  नुक्सान तो होता ही है | राजस्व का भी नुक्सान हुआ है, भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला है | इंफोर्स्मेंट विभाग  की कार्यवाही बार बार पलटने से उनकी  विश्वसनीयता घटी है | BSES के द्वारा आम लोगों के लिए बनाए गए नियमों के पालन में पक्षपात पूर्वक व्यवहार किया गया है |अधिकारियों ने पदों का दुरुपयोग किया है | नियमों के पालन में अनियमितता बरती गई है |  ऐसा प्रमाणित होता है | इसके साथ सभी बिल ,इंफोर्स्मेंट के बिल ,तीनों मीटरों की फोटो ,पुराने उस पैनल की फोटो संलग्न है |  

                             इस फ्लोर वालों के लिए नियमों को ताख पर रखकर किए जाते रहे हैं ये काम ! 

    CA No. 100907780 VIJAY KUMAR, S/O Mr. KULDEEP KUMAR A-7/41/2-A,G/F KRISHNA NGR DELHI NEAR SHANI BAZAR DELHI--110051") 

  1.  ये मीटर जिस बिल्डिंग में लगा है उसका  A-7/41 बिल्डिंग नंबर है किंतु इसका  '2-A पार्ट' न ही इस बिल्डिंग के किसी रजिस्ट्री आदि दस्तावेज में है और न ही भौतिक रूप से कहीं विद्यमान है | ऐसी स्थिति में इस मीटर को लगाने से पूर्व  रजिस्ट्री आदि दस्तावेज चेक करने एवं भौतिक सर्वे करने में BSES के नियमों का पालन नहीं किया गया था | 

2. बिल्डिंग नंबर ही गलत है तो इसमें लिखा ग्राउंडफ्लोर भी गलत है |वैसे भी '2-A पार्ट' की जगह केवल  A-7/41 को ही देखा जाए तो इसके ग्राउंड फ्लोर पर रहने के लिए  कोई जगह ही नहीं है | इसलिए इस बिल्डिंग ग्राउंडफ्लोर के लिए कोई आवासीय मीटर नहीं लगाया जा सकता है   

3. इसके बिजली बिल पर लिखा विजयकुमार नाम इस बिल्डिंग के रजिस्ट्री आदि किसी दस्तावेज में नहीं है और न ही विजय कुमार नाम का कोई व्यक्ति इस बिल्डिंग में कभी रहा है |यदि विजयकुमार नाम का कोई व्यक्ति ही नहीं है तो विजयकुमार की फोटो  आधार कार्ड वोटर आई डी कैसे हो सकता है | मीटर  का आवेदन एवं आवेदन पत्र पर साइन उसने कैसे  करवाए  गए होंगे | ऐसी स्थिति में उसके नाम से यह मीटर कैसे लगाया जा सकता है |

4.कॉमर्शियल मीटर को डोमेस्टिक कराने के लिए बिजली बिल पर पंजीकृत विजयकुमार की पहचान का कोई प्रमाण पत्र नहीं है | फोटो नहीं है | विजयकुमार ने आवेदन पत्र पर या किसी अन्य कागज पर साइन नहीं किए हैं |विजयकुमार ने कॉमर्शियल मीटर को डोमेस्टिक कराने के लिए कोई आवेदन नहीं दिया है | बिजली मीटर पर  पंजीकृत प्रापर्टी के स्वामित्व वाले दस्तावेज नहीं थे | यहाँ व्यावसायिक काम नहीं हो रहा है | इसका कोई विश्वसनीय घोषणा पत्र नहीं था | मशीनें वहाँ पहले की तरह ही चल रहीं थीं | ऐसे में साईट इन्फ़ेक्सन नहीं हुआ या फर्जी हुआ था | उसका 11 जुलाई 2025 से बकाया चला आ रहा उपयोग किया हुआ आखिरी  बिजली बिल Rs 48930 एवं इंफोर्स्मेंट का बकाया बिल 1,33,541.10  है | दोनों मिलाकर ये बिल 1,82,471 होता है |इसके जमा करने की ड्यू डेट 2 फरवरी 2026 थी | ये बिल अभी तक जमा नहीं किया गया है फिर भी 26  फरवरी 2026 को उस कॉमर्शियल मीटर को डोमेस्टिक कर दिया गया |  ये बिल संलग्न है | 

5 . इस फ्लोर में व्यावसायिक मशीनें कुछ वर्षों से चल रही थीं | 11 जुलाई 2025  को इंफोर्स्मेंट के छापें में वे चलती पकड़ी गईं | इसके बाद 24 मार्च 2026 के इंफोर्स्मेंट के दूसरे छापे में भी चलती पकड़ी गईं | इसका मतलब 11 जुलाई 2025 से लेकर 24 मार्च 2026 के बीच मशीनें लगातार चलाई जा रही थीं | इसका मतलब फरवरी 2026 में भी वहाँ बड़ी व्यावसायिक मशीनें चलाई जा रहीं थीं किंतु कॉमर्शियल मीटर को डोमेस्टिक करने के उद्देश्य से फरवरी 2026 के फर्जी सर्वे में दिखाया गया कि अब वहाँ ऐसी कोई व्यावसायिकमशीनें नहीं चल रही हैं | मान्यवर, ये मशीनें बड़ी हैं जिन्हें चुप चाप बाहर ले जाकर दुबारा गुपचुप रूप से अंदर नहीं रखा जा सकता है | दूसरी बात बिल्डिंग  के अंदर बाहर सभी जगत तो कैमरे लगे हैं | मशीनें निकाली गई होतीं तो दिखाई पड़तीं | 

6 . 24 मार्च 2026 को इंफोर्स्मेंट के दूसरे छापे में भी मीटर कॉमर्शियल किया गया था और जुर्माना लगाया गया था | संभव है वह भी न जमा कराया गया हो और 10 अगस्त 2026 को नया मीटर लगा दिया गया है | 

7. इस मीटर पर बकाया बिल जमा न होने के कारण 22 जून 2026 को पुराना मीटर उतार कर बकाया धनराशि जमा कराए बिना ही  23 जून 2026 को उसी नाम और उसी स्थान पर नया मीटर लगा दिया गया |

8.फर्जी एड्रेस पर पंजीकृत  विजय कुमार के नाम से लगा लावारिस बिजली मीटर  22 जून 2026 को उतार कर उसी लावारिस नाम और एड्रेस से 23  जून 2026 को एक नया लावारिस बिजली मीटर लगा दिया गया | किसी लावारिस बिजली मीटर को एक बार उतारे जाने के बाद क्या उसी लावारिस नाम  और एड्रेस से बिना आवश्यक कागजों के नया मीटर नहीं लगाया जा सकता है ,किंतु यहाँ लगाया गया है ? 

 9 . प्रापर्टी मालिक रीतूजैन के नाम से यदि नया लीगल मीटर 10 अगस्त 2026 को लगाया ही जाना था तो 22 जून 2026 को रीतूजैन के नाम से ही नया लीगल मीटर  लगा दिया जाता | आखिर 22 जून 2026 से 10 अगस्त 2026 के बीच के लिए पुराना लावारिस मीटर हटाकर उसी जगह नया लावारिस मीटर कागजों के बिना गैर कानूनी रूप से लगाने की आवश्यकता ही क्या थी ? इन तीनों मीटरों की फोटो संलग्न है | 

 10. विजयकुमार के नाम से लगे इस लावारिस मीटर में रीडिंग कम करने के लिए बार बार छेड़ छाड़ की गई थी | इसी प्रकार से इस फ्लोर में AC,कूलर ,पंखा गीजर मोटर एवं व्यावसायिक मशीनें आदि चलाने में चोरी की बिजली का उपयोग किया जा रहा था | इस मीटर को उतारते ही यदि प्रापर्टी मालिक रीतूजैन के नाम से नया लीगल मीटर लगा दिया जाता तो इस छेड़ छाड़वाले बिजली मीटर की जाँच की जाती तो इससे वर्षों से की जाती रही बिजली चोरी पकड़ी जाती | इसीलिए इस लावारिस मीटर को उतार कर पिछले सारा छेड़ छाड़ बिजली चोरी आदि का रिकार्ड ख़त्म कर दिया गया | इसकी जगह इसीनाम से नया लावारिस मीटर 48 दिनों के लिए लगा दिया गया | इसे उतार कर नया लीगल मीटर लगाया गया | इस मीटर की जाँच करने में पुरानी बिजली चोरी या छेड़ छाड़ के सबूत मिलने ही नहीं थे | सारे सबूत नष्ट कर दिए गए |

 11.विजयकुमार के नाम से लगे इस लावारिस मीटर को 10 अगस्त 2026 को जब हटाया गया तब तक इस मीटर का उपयोग इसी फ्लोर में व्यावसायिक मशीनें चलाने में हो रहा था | मशीनें कुछ वर्षों से लगातार चलती आ रहीं थीं | इसी फ्लोर में इन्हीं मशीनों को चलाने के लिए रीतू जैन के नाम जो लीगल मीटर लगाया गया उसकी श्रेणी मशीनें हटाए बिना डोमेस्टिक कैसे की जा सकती थी किंतु ऐसा कर दिया गया | नया मीटर गैर कानूनी रूप से डोमेस्टिक लगाया गया है |  









 श्रीमान जी ! विजली विभाग के द्वारा बनाए गए नियमों का उल्लंघन करके कार्यों को करना कराना दोनों  ही गैरकानूनी है | इसका कारण अधिकारियों की लापरवाही अनियमितता पद का दुरुपयोग या भ्रष्टाचार आदि कुछ भी हो सकता है | किसी एक ही व्यक्ति के लिए बार बार ऐसा किया जाने का कारण भ्रष्टाचार हो सकता है | 

 बिजली बिल पर पंजीकृत फर्जी नाम बिल्डिंग नंबर फ्लोर नंबर आधार आदि के बिना ये काम किए गए -

1. बिजली बिल पर पंजीकृत नाम, बिल्डिंगनंबर,फ्लोरनंबर आदि सब  फर्जी होने पर भी रजिस्ट्री आदि कागजों के बिना किसी के आवेदन किए बिना ही नया मीटर  लगाया गया |

2. मीटर आईडी  आदि कागजों के  बिना मीटर मालिक के द्वारा दिए गए किए आवेदन सर्वे आदि के बिना ही एक फरवरी 2026 को दूसरी बार  10 अगस्त 2026 को मीटर की श्रेणी बदल दी  गई | दोनों बार  कॉमर्शियल मीटर को डोमेस्टिक किया गया | व्यावसायिक मशीनें फिर भी चलती रहीं |

3. फर्जी नाम एड्रेस से लगाए गए पुराने मीटर की रीडिंग कम करने के लिए मीटर में बार बार की जाती रही छेड़छाड़ एवं बिजली चोरी का पुराना रिकार्ड नष्ट करने के लिए 22 जून 2026 को वो  पुराना मीटर हटा दिया गया | इस मीटर की जगह उसी फर्जी नाम एड्रेस आदि से 23 जून 2026 को नया मीटर लगाकर यह दिखा दिया गया कि इसमें कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है | मीटर पर पंजीकृत नाम एड्रेस आधारकार्ड आदि के बिना यह नया मीटर लगा कैसे ? इस बात को छिपाने के  लिए  इस नए मीटर को भी हटाकर 10 अगस्त 2026 को फ्लोर मालिक के नाम नया मीटर लगा दिया गया |  पुराने मीटर पर बकाया पुराना बिल वसूले बिना उस मीटर को हटाकर फ्लोर मालिक के नाम नया मीटर लगाया दिया गया |यदि यही किया जाना था तो यह तो  23 जून 2026 को  भी किया जा सकता था | उसदिन फ्लोर मालिक के नाम ही नया मीटर लगा दिया जाता किंतु मीटर में बिजली चोरी के लिए मीटर में बार बार की जाती रही छेड़छाड़  पकड़ी जाती | पुराना रिकार्ड ख़तम करने के लिए बीच में एक नया मीटर लगा दिया गया | अन्यथा इतने कम समय के लिए नया मीटर क्यों लगाया जाता | 

  विनम्र निवेदन - इन कामों को कानूनी रूप से करवाने के लिए मीटर पर पंजीकृत एड्रेस की रजिस्ट्री कॉपी ,आधार कार्ड एवं  मीटर मालिक के द्वारा दिए गए आवेदन पर उसके साइन आवश्यक माने जाते हैं किंतु ये सारे कार्य बिना कागजों के किए गए हैं |इन तीनों मीटरों की फोटो संलग्न है |बिजलीबिल भी संलग्न हैं |   

         इन्फोर्समेंट की रेड और बिल माफ करने के सन्दर्भ में -
  1. आवासीय फ्लोर में बड़ी व्यावसायिक मशीनें चलाई जा रही थीं | इसलिए 11-  जुलाई -2025 को इंफोर्स्मेंट वालों ने छापा डाला | मशीनें पकड़ी गईं | जुर्माना लगाया गया | 11 जुलाई 2025 से बकाया उपयोग किया हुआ बिल Rs 48930 है और इसी  बिल में इंफोर्स्मेंट का बिल 1,33,541.10 बकाया लिखा गया है | दोनों मिलाकर ये बिल 1,82,471 होता है |इसके जमा करने की ड्यू डेट 2 फरवरी 2026 थी | इसे जमा किए बिना ही 26  फरवरी 2026 को इंफोर्स्मेंट की कारवाही पलट कर बिल जीरो कर दिया गया और कॉमर्शियल मीटर को डोमेस्टिक कर दिया गया | व्यावसायिक मशीनें तब भी चल रही थीं | ये बिल संलग्न कर रहा हूँ |

    24 मार्च 2026 को दोबारा इंफोर्स्मेंट का छापा पड़ा |तब भी मशीनें चलते पकड़ी गईं इससे ये प्रमाणित हो गया कि पिछले बिल की कॉमर्शियल श्रेणी  को बदलकर डोमेस्टिक  श्रेणी करना गैरक़ानूनी था,लगभग 2 लाख रुपए का पिछला बिल माफ किया जाना गैरक़ानूनी था |व्यावसायिक मशीनें चलते  रहने के बाद  भी मीटर की कॉमर्शियल श्रेणी  को बदलकर डोमेस्टिकश्रेणी किया जाना गैरक़ानूनी था | की गई थी | 

2.  24 मार्च 2026 को दोबारा इंफोर्स्मेंट का छापा पड़ा |तब भी मशीनें चलते पकड़ी गईं | फिर जुर्माना लगाया गया और फिर मीटर की श्रेणी कॉमर्शियल कर दी  गई |इसका बिल वसूला गया या नहीं | ये पता नहीं है | इसका एक कारण बीच में 2 बार मीटर बदल दिया जाना भी था | इसकी   कॉमर्शियल श्रेणी बदलने के लिए इसकी जगह नया डोमेस्टिक मीटर  लगा दिया गया | मशीनें फिर भी चल रही हैं |

  बिलों पर लिखे गए अलग अलग नाम और  एड्रेस के सन्दर्भ में -

     फर्जी नाम और कागजों के आधार पर यह मीटर जिस बिल्डिंग या फ्लोर के लिए लगाया गया था | उसका न ये नाम है न बिल्डिंग नंबर है और न ही फ्लोर नंबर और न ही वहाँ कोई विजय कुमार कभी रहा है न किसी कागज़ में  उसका नाम है | बिजली बिल के मीटर पर जो एड्रेस लिखा है वो नाम और एड्रेस 11 जुलाई 2025 वाले इन्फोर्स्मेंट  के छापे में नहीं है और 11 जुलाई 2025 के जो बिजली बिल पर एड्रेस है और 11 जुलाई 2025 इन्फोर्स्मेंट  के छापे में जो नाम और एड्रेस है वो 24 मार्च 2026 वाले इन्फोर्स्मेंट  के छापे में  नहीं है | 

    बिजली बिल पर लिखा नाम और एड्रेस -

 CA No. 100907780 VIJAY KUMAR, S/O Mr. KULDEEP KUMAR A-7/41/2-A,G/F KRISHNA NGR DELHI NEAR SHANI BAZAR DELHI--110051")   

11 जुलाई 2025 के  इन्फोर्स्मेंट  बिल पर लिखा नाम और एड्रेस - इसमें भी मकान नंबर  यही है जबकि नाम विजय कुमार एवं महेन्दर जैन लिखा हुआ है | फ्लोर फ़स्ट  लिखा है | 

  24 मार्च 2026  के  इन्फोर्स्मेंट  बिल पर लिखा नाम और एड्रेस -  नाम जयश्री,महेन्दर जैन, नीतूजैन लिखे हैं | ये नीतू जैन कौन है पता नहीं  |इसमें एड्रेस बिजली बिल पर लिखा ही है |     

      जिसके एड्रेस में इतनी हेरा फेरी हो उस पर बकाया बिल किस्से वसूला जाएगा | 

यही विषय विस्तार से -  

    CA No. 100907780 VIJAY KUMAR, S/O Mr. KULDEEP KUMAR A-7/41/2-A,G/F KRISHNA NGR DELHI NEAR SHANI BAZAR DELHI--110051")   

     इस मीटर को लगाने से लेकर उतारने तक पद का दुरुपयोग ,नियमों का उल्लंघन , भ्रष्टाचार आदि के कुछ प्रत्यक्ष एवं कुछ परोक्ष प्रमाण हैं | बिजली बिलों कागजों को देखकर यह मीटर लगाने लगवाने वाले दोनों के द्वारा किया गया नियमों का उल्लंघन सामने आ जाता है | बार बार कंप्लेन करने बाद भी इसमें कहीं पारदर्शिता नहीं वर्ती गई | इस मीटर पर पंजीकृत एड्रेस पूरी दिल्ली में कहीं नहीं है | बिल्डिंग नंबर में A-7/41/2-A इसमें A-7/41 है किंतु इसका 2-A पार्ट कहीं नहीं है | यदि ये बिल्डिंग नंबर ही गलत है तो इसपर लिखा  ग्राउंडफ्लोर भी  गलत ही है | 

  1.  A-7/41/2-A कोई बिल्डिंग नहीं है और A-7/41 नंबर बिल्डिंग के ग्राउंडफ्लोर पर रहने की जगह नहीं है |इस बिल्डिंग में विजय कुमार न है न पहले कभी रहा है | किसी रजिस्ट्री या एग्रीमेंट में  विजय कुमार नाम  नहीं है , विजय कुमार का आधार कार्ड नहीं है | यह मीटर  लगाने के लिए विजय कुमार  ने न कहीं साइन किए न ही मीटर लगाने के लिए आवेदन दिया | इस सबके बिना यह मीटर लगाया और लगवाया कैसे गया ? जिसने लगाया और जिसने लगवाया और इतने वर्षों से जिस फ्लोर में जो उसका उपयोग करता आ रहा है | इतने नियमों का उल्लंघन करके  वे निर्दोष कैसे हो सकते हैं ?

2. विजयकुमार की रजिस्ट्री, आधार कार्ड,साइन और विजयकुमार के आवेदन किए बिना ही इस मीटर को फरवरी 2026 में कामर्शियल से डोमेस्टिक कैसे कर दिया गया ?  

3. विजयकुमार की रजिस्ट्री, आधार कार्ड,साइन और विजयकुमार के आवेदन किए बिना 23 जून 2026 को विजयकुमार का पुराना मीटर हटाकर विजयकुमारके नाम से ही नया मीटर कैसे लगा दि या गया ?

4. 11 जुलाई 2025 से बकाया उपयोग किया हुआ बिल Rs 48930 है और इसी  बिल में इंफोर्स्मेंट का बिल 1,33,541.10 बकाया लिखा गया है | दोनों मिलाकर ये बिल 1,82,471 होता है |इसके जमा करने की ड्यू डेट 2 फरवरी 2026 थी | विजयकुमार की रजिस्ट्री, आधार कार्ड,साइन और विजयकुमार के द्वारा माफ  करने के लिए किए गए आवेदन के बिना ये बिल माफ कैसे किया गया ? यदि  माफ  नहीं तो ये बिल जमा किए बिना उसी फ्लोर में रीतूजैन के नाम से नया मीटर कैसे लगाया या लगवाया  गया ?

5. 24 मार्च 2026 को इंफोर्स्मेंटविभाग ने दोबारा छापा डाला | व्यावसायिक मशीनें चलती पकड़ी गईं | इसलिए जुर्माना लगाया गया |वो जुर्माना और उपयोग किया गया बिल जमा किया गया या नहीं | 10 अगस्त 2026 को नया मीटर लगा दिया गया |  

6 . इन्फोर्समेंट वालों  ने  11 जुलाई 2025  को रीतूजैन के फ्लोर पर छापा डाला तो व्यावसायिक मशीनें चलती पकड़ी गईं | इसके बाद 24 मार्च 2026 को छापा डाला तो व्यावसायिक मशीनें चलती पकड़ी गईं |  A -7 \41 में कैमरे लगे हैं इसके सामने वाली बिल्डिंग में कैमरे लगे हैं | ये बड़ी व्यावसायिक मशीनें निकाली जाते देखी नहीं गईं |कारीगर लगातार आते रहे | मशीनें चलती ही रहीं तबी भी 26 फरवरी 2026 को कॉमर्शियल मीटर डोमेस्टिक कैसे कर दिया गया और 10 अगस्त 2026 को विजय कुमार नाम का कॉमर्शियल मीटर हटाकर रीतूजैन के नाम का डोमेस्टिक मीटर  कैसे लगा दिया गया ? कॉमर्शियल मीटर हटाकर कॉमर्शियल मीटर ही क्यों नहीं लगाया गया ?

  7. मीटर विजय कुमार नाम के इस लावारिस मीटर से रीतूजैन के घर में व्यावसायिक मशीनें चली जाती रहीं और घर के  A  C  कूलर आदि भी चलते रहे बिल ज्यादा न आवे इसलिए डायरेक्ट भी बिजली जुड़ी रही | बिजली चोरी पकड़ी न जाए | इसलिए 22 जून 2026 को विजय कुमार नाम वाला मीटर उतार कर 23 जून 2026 को विजय कुमार के नाम से ही नया मीटर लगाकर बिजलीचोरी  का पिछला रिकार्ड ख़त्म करके रीतूजैन के नाम से  10 अगस्त 2026  को नया मीटर लगा दिया गया |यही करना था तो 10 अगस्त की जगह 23 जून 2026 को भी तो रीतूजैन के नाम से नया मीटर लगाया जा सकता था लेकिन उसमें बिजली चोरी का पुराना रिकार्ड चेक हो जाता | 


 

 

 

  

 

या जाना | पुराने मीटर पर पुराना बकाया वसूले बिना उस मीटर को हटाकर फ्लोर मालिक के नाम नया मीटर लगाया जाना | दो दो बार बिना मीटर मालिक एवं प्रापर्टी आई डी के व्यावसायिक मशीनें चलते रहने के बाद भी कॉमर्शियल मीटर को डोमेस्टिक किया जाना | बिना कागजों के दो दो बार मीटर का बदला जाना | भ्रष्टाचार के बिना कैसे संभव हो सकता है |मशीनें चलते रहने के बाद भी कॉमर्शियल श्रेणी का मीटर हटाकर उसकी जगह डोमेस्टिक मीटर लगाया जाना | आवासीय फ्लोर में व्यावसायिक मशीनें चलने के बाद भी व्यावसायिक मीटर को घरेलू किया जाना आदि गैर कानूनी कार्य होते हुए भी किए गए |  

   

    एक वर्ष के अंदर एक लावारिस मीटर की 4 बार श्रेणी बदला जाना, 2 बार मीटर बदला जाना, 2 बार  इन्फोर्समेंट की रेड पड़ना | दो बार  जुर्माना बिल माफ किया जाना, दो बार उपयोग किया गया बिल माफ किया जाना, 2 बार व्यावसायिक मशीनें चलते रहने के बाद भी कमर्शियल मीटर को डोमेस्टिक मीटर कर दिया जाना |ये सब भ्रष्टाचार के बिना संभव नहीं है |इसकी उच्च अधिकारियों से बार बार शिकायत होने रहने के बाद भी ये सब कुछ किया जाता रहा | ऐसी सभी गैरकानूनी गतिविधियाँ  BSES के अधिकारियों में व्याप्त पद दुरुपयोग ,पक्षपातपूर्ण  कार्य संचालन एवं भ्रष्टाचार पूर्ण कार्यशैली का संशय पैदा करता है |

     



 

                                                          विनम्र निवेदन 
    BSES के अधिकारी जब गैरकानूनी रूप से किसी को लाभ पहुँचाते हैं तो उनके पद के दुरुपयोग, लापरवाही या भ्रष्टाचार आदि में से कुछ भी हो सकता है किंतु लापरवाही एक जगह या एक बार हो सकती है किंतु जहाँ बार बार नियमों का उल्लंघन किया गया है | किसी एक व्यक्ति को आवासीयफ्लोर में व्यावसायिक मशीनें चलाने के लिए फर्जी नाम ,फर्जीबिल्डिंगनंबर एवं  फर्जीफ्लोर नंबर से  बिना रजिस्ट्री, आधारकार्ड, एवं बिना आवेदन एवं आवेदक के हस्ताक्षर के बिना ही  डोमेस्टिक मीटर दिया गया  है |  

           

  A- 7\41,शनि बाजार कृष्णा नगर दिल्ली -110051 में 5 दुकानें 3 फ्लोर हैं | इसके फस्टफ्लोर का अपना मीटर न होने के कारण  BSES के क्षेत्रीय अधिकारियों की मिलीभगत से फस्टफ्लोर वालों ने दिखाने के लिए एक लावारिस मीटर से कनेक्शन जोड़ रखा था | इस फर्जी नाम ,बिल्डिंग नंबर फ्लोर नंबर से लगे मीटर की आड़ में होती आ रही बिजली चोरी की बार बार कंप्लेन करने पर भी इनके विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की गई न ही ये लावारिस मीटर उतारा गया | ऐसा 16 वर्षों से होता आ रहा है |

    पिछले कुछ वर्षों से इस फ्लोर की मालिक रीतूजैन ने इसे महेंद्रजैन को किराए पर दे रखा है |वो इसमें परिवार सहित रहने के साथ साथ बड़ी व्यावसायिक मशीनें भी लगाए हुए है | जिन्हें कारीगर देर देर रात तक चलाकर व्यावसायिक कार्य किया करते  हैं | फस्टफ्लोर वाली रीतू जैन ने मीटर में ऐसी हेरा फेरी करवा  रखी थी जिससे रीडिंग बहुत कम आती थी | घर में उपयोग की जा रही बिजली एवं  मशीनों का लोड इसी लावारिस मीटर पर था किंतु फस्ट फ्लोर वाली रीतूजैन एवं महेंद्रजैन ने मीटर में ऐसी हेरा फेरी कर रखी थी जिससे रीडिंग बहुत कम आती थी | 

    आवासीय फ्लोर में व्यावसायिक काम का लाइसेंस नहीं था, कन्वर्जन नहीं था, हाउसटैक्स कॉमर्शियल नहीं भरते थे | ऐसी बहुत सारी अनियमितताओं के कारण  कंप्लेन करने पर 11जुलाई 2025 को  इन्फोर्स वालों ने छापा डाला | व्यावसायिक मशीनें पकड़ी गईं जुर्माना लगाया गया ,इनके यहाँ उपयोग किए जा रहे उस लावारिस मीटर की श्रेणी कॉमर्शियल कर दी गई ,किंतु फरवरी 2026 तक न जुर्माना वसूला गया और न ही उपयोग किया गया बिल जो लगभव 2 लाख रुपए हो चुका था | जिसकी देय तारीख 2 फरवरी थी |  26 फरवरी 2026 को BSES के क्षेत्रीय अधिकारियों की मिलीभगत से इन्फोर्स वालों के द्वारा 11जुलाई 2025 को की गई कार्यवाही पलट कर बिल वसूले बिना ही जीरो कर दिया गया और गैर क़ानूनी रूप से कॉमर्शियल श्रेणी बदलकर डोमेस्टिक कर दी गई | 

      व्यावसायिक मशीनें चलते  रहने के बाद  भी गैर कानूनी रूप से कॉमर्शियल श्रेणी  को बदलकर डोमेस्टिक  श्रेणी की गई थी | इसकी शिकायत पर 24 मार्च 2026 को दोबारा इंफोर्स्मेंट का छापा पड़ा | उसमें शिकायत सही पाई गई | मशीनें चलते पकड़ी गईं | फिर जुर्माना लगाया गया और मीटर की श्रेणी कॉमर्शियल कर दी  गई |   इससे ये प्रमाणित हो गया कि पिछले बिल की कॉमर्शियल श्रेणी  को बदलकर डोमेस्टिक  श्रेणी करने की  गैरकानूनी  प्रक्रिया भ्रष्टाचार पूर्वक  की गई थी और लगभव 2 लाख रुपए का पिछला बिल गैर  क़ानूनी रूप से भ्रष्टाचार पूर्वक माफ किया  गया था | 

       इंफोर्स्मेंट के छापों से तंग आकर फ्लोर मालिक रीतूजैन  के नाम से नया मीटर लगाया जाना था किंतु चलाए जा रहे फर्जी विजय कुमार के मीटर में बिल कम करने के लिए बार बार छेड़ छाड़ की जा चुकी थी | उसकी जाँच न की जाए | इसलिए उसमें की गई छेड़छाड़ का पिछले रिकार्ड ख़त्म करने के लिए विजय कुमार नाम का पुराना मीटर 22 जून 2026  को हटाकर 23 जून 2026 को उसी विजय कुमार ने नाम से नया मीटर  लगा दिया | इस नए मीटर लो भी 10 अगस्त 2026 को फ्लोर मालिक रीतूजैन  के नाम से नया मीटर लगा दिया गया | विजय कुमार के नाम का कॉमर्शियल मीटर हटाकर रीतूजैन के नाम से डोमेस्टिक मीटर लगाया गया है |24 मार्च 2026 को इंफोर्स्मेंट के द्वारा लगाया गया जुर्माना  एवं अभी तक उपयोग किया गया बिल वसूला गया या नहीं | 2 फरवरी 2026 वाला लगभग 2 लाख का बिल वसूला गया या उसी मीटर के नाम डाल दिया गया है ये पता नहीं है |  

 

 

 

 

 

 

 

 

ज्यादातर अपना कार्य डायरेक्ट बिजली जोड़कर करते रहे हैं |  

 डायरेक्ट बिजली जोड़कर बिजलीका उपयोग किया जाता रहा है | दिखाने के लिए हमेंशा से चोरी की बिजली से काम चलाया जाता रहा है | बिल्डर का  था | उसने फस्टफ्लोर के लिए अपनी आईडी या फ्लोर के कागजों पर कभी कोई बिजली कनेक्शन नहीं लिया था | BSES के क्षेत्रीय अधिकारियों की मिलीभगत से बिल्डिंग के अंदर  ही डायरेक्ट  कनेक्शन का एक पैनल लगवा रखा था उसी में चिमटी लगाकर दस बारह वर्ष तक बिजली का फ्री उपयोग करते रहे हैं | उन पर लगाए गए जुर्माना आदि बिल्डिंग के नाम डाल दिए जाते रहे हैं | जो नाम बदलवाने या नया मीटर लगवाने पर बिल्डिंग पर बैलेंस बताकर हम सभी लोगों से वसूले जाते हैं या भ्रष्टाचार पूर्वक समझौता करना होता है |वो पैनल अभी भी लगा है | अब उसमें बिजली नहीं है | कुछ वर्ष पहले उन्होंने  वह फस्ट फ्लोर रीतूजैन को  बेच दिया  था |                             रीतू जैन ने इसमें महेंद्रजैन को किराए पर दिया वह परिवार के साथ इसमें रहने के साथ साथ बड़ी व्यावसायिक मशीनें भी लगाए हुए है | कारीगर हैं जो आफिस टाइम के अलावा देर देर रात तक चलाई जाती हैं  | आवासीय  व्यावसायिक मशीने चलाना गैर कानूनी है | इसलिए  इसमें  अपने एवं अपने फ्लोर के नाम से नया कनेक्शन न लेकर BSES के क्षेत्रीय अधिकारियों  की मिलीभगत से एक ऐसे लावारिस मीटर से कनेक्शन जोड़ा गया |  जिसके बिल पर पंजीकृत नाम एड्रेस आदि पूरी तरह फर्जी है | वो ये है -

 


 

  भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार फिर भी न कहीं 

 


 

उसमें उपयोग किया हुआ बिल Rs 48930 है और इसी में इंफोर्स्मेंट का बिल 1,33,541.10 बकाया लिखा गया है | दोनों मिलाकर ये बिल 1,82,471 होता है |

 नाम का की रजिस्ट्री, आधार कार्ड,साइन और विजयकुमार के आवेदन किए बिना


1. 

1.

 1.

 1.

 2 .


 

यह मीटर विजय कुमार नाम से पंजीकृत है | इस बिल्डिंग से संबंधित 

 

 बिल्डिंग ही नहीं है 

         A-7/41 G/F 

       1. इस मीटर पर पंजीकृत एड्रेस पूरी दिल्ली में कहीं नहीं है,फिर यह फर्जी एड्रेस का मीटर लगाया और लगवाया कैसे गया  ?

 

 

  BSES से संबंधित भ्रष्टाचार की बार बार कंप्लेन  करने के बाद भी इनके विरुद्ध न जाँच हुई न कोई कार्यवाही की गई | BSES के द्वारा बनाए गए  नियमों का पालन यदि BSES के अधिकारी ही नहीं  करेंगे तो उपभोक्ताओं से ऐसी अपेक्षा कैसे की जा सकती है | जो BSES अन्य उपभोक्ताओं  नियमों के नाम पर इतना  कठोर व्यवहार किसी एक व्यक्ति के लिए सारे नियमों को उल्लंघन कैसे कर सकता है |    


   ये  एड्रेस जिस बिजली बिल पर पंजीकृत है | हम इसके  बिषय  में  जानना चाहते हैं | 

 

    श्रीमान जी ! A- 7\41,शनि बाजार कृष्णा नगर दिल्ली -110051 में 5 दुकानें 3 फ्लोर हैं | इसका फस्टफ्लोर बिल्डर का  था | उसने फस्टफ्लोर के लिए अपनी आईडी या फ्लोर के कागजों पर कभी कोई बिजली कनेक्शन नहीं लिया था | BSES के क्षेत्रीय अधिकारियों की मिलीभगत से बिल्डिंग के अंदर  ही डायरेक्ट  कनेक्शन का एक पैनल लगवा रखा था उसी में चिमटी लगाकर दस बारह वर्ष तक बिजली का फ्री उपयोग करते रहे हैं | उन पर लगाए गए जुर्माना आदि बिल्डिंग के नाम डाल दिए जाते रहे हैं | जो नाम बदलवाने या नया मीटर लगवाने पर बिल्डिंग पर बैलेंस बताकर हम सभी लोगों से वसूले जाते हैं या भ्रष्टाचार पूर्वक समझौता करना होता है |वो पैनल अभी भी लगा है | अब उसमें बिजली नहीं है | कुछ वर्ष पहले उन्होंने  वह फस्ट फ्लोर रीतूजैन को  बेच दिया  था |          रीतू जैन ने इसमें महेंद्रजैन को किराए पर दिया वह परिवार के साथ इसमें रहने के साथ साथ बड़ी व्यावसायिक मशीनें भी लगाए हुए है | कारीगर हैं जो आफिस टाइम के अलावा देर देर रात तक चलाई जाती हैं  | आवासीय  व्यावसायिक मशीने चलाना गैर कानूनी है | इसलिए  इसमें  अपने एवं अपने फ्लोर के नाम से नया कनेक्शन न लेकर BSES के क्षेत्रीय अधिकारियों  की मिलीभगत से एक ऐसे लावारिस मीटर से कनेक्शन जोड़ा गया |  जिसके बिल पर पंजीकृत नाम एड्रेस आदि पूरी तरह फर्जी है | वो ये है -
     CA No. 100907780 VIJAY KUMAR, S/O Mr. KULDEEP KUMAR A-7/41/2-A,G/F KRISHNA NGR DELHI NEAR SHANI BAZAR DELHI--110051")   
        BSES के क्षेत्रीय अधिकारियों के पास इसका कोई उत्तर नहीं है कि इसमें पजीकृत एड्रेस कहाँ का है | इसमें लिखा  A-7/41 का 2-A पार्ट कहीं नहीं है | A-7/41 के ग्राउंड फ्लोर में रहने लायक कोई जगह नहीं है | विजयकुमार इस बिल्डिंग में न कभी रहा है और न ही बिल्डिंग की किसी रजिस्ट्री या किराए के एग्रीमेंट में विजय कुमार नाम है | विजय कुमार ने BSES से मीटर लगाने का आवेदन भी नहीं किया | विजय कुमार की रजिस्ट्री आधार कार्ड  साइन आदि  भी नहीं थे ,फिर उसके नाम पर ये मीटर लगाया कैसे गया ?  
     11 जुलाई 2025 को इंफोर्स्मेंट का छापा पड़ा | मशीनें पकड़ी गईं | जुर्माना लगाया गया ! मीटर कॉमर्शियल किया गया | 2 महीने का बिल बकाया होने पर जो BSES कनेक्शन काट देता है | उसने इनसे 6 महीने तक बिल की वसूली नहीं की | कनेक्शन भी नहीं काटा मशीनें लगातार चलती रहीं | 11 जुलाई 2025 से बकाया बिल बढ़ता गया | जिस बिल को जमा करने की ड्यू डेट 2 फरवरी 2026 को थी | उसमें उपयोग किया हुआ बिल Rs 48930 है और इसी में इंफोर्स्मेंट का बिल 1,33,541.10 बकाया लिखा गया है | दोनों मिलाकर ये बिल 1,82,471 होता है |यह बिल बिना जमा किए ही 26-2-2026 को जीरो करके कॉर्मशियल श्रेणी बदल कर डोमेस्टिक कर दी  गई | इंफोर्स्मेंट की कार्यवाही पूरी तरह पलट दी गई |बिल  संलग्न हैं  |
      कॉमर्शियल मीटर को डोमेस्टिक करने के लिए बिजली बिल पर पंजीकृत मीटर मालिक का नाम आधार कार्ड ,साइन,एवं उसी के द्वारा दिया गया आवेदन रजिस्ट्री आदि कागजों के बिना किसके आवेदन पर  मीटर की कामर्शियल श्रेणी बदलकर डोमेस्टिक कर दी गई |   

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