जिन राहुलगाँधी को देश की लड़कियों में से विवाह करने योग्य अभी तक कोई उपयुक्त लड़की नहीं मिल सकी तो लड़कियाँ उन्हें प्रधानमंत्री पद का उपयुक्त प्रत्याशी कैसे मान लें और क्यों दें अपना बहुमूल्य अपना वोट ?विवाह के लिए जब कोई लड़की राहुल गाँधी को पसंद आई तो लड़कियाँ उन्हें पी.एम.के रूप में कैसे पसंद करें ?
क्या वास्तव में लड़कियों की क्वालिटी इतनी गिर गई है या लड़कियाँ इतनी अनुपयोगी हो गई हैं कि इतने बड़े देश में उन्हें उपयुक्त एक लड़की नहीं मिल पा रही है !इसके प्रमुख दो कारण हो सकते हैं शायद उनकी पसंद इतनी ऊँची हो जिसमें कोई लड़की फिट ही न बैठती हो या फिर ऐसा हो कि लड़कियाँ ठीक ही न हों !
दूसरी बात उन्होंने बताई कि 'अभी मैं चुनाव लड़ने में व्यस्त हूं। दुर्भाग्य से मैं अपने निजी जीवन पर ध्यान नहीं दे पा रहा हूं।’
यहाँ ध्यान देने की बात यह है कि चुनाव तो आज हो रहे हैं इसके पहले भी तो वो युवा ही थे पहले कर सकते थे विवाह !दूसरी बात अपने देश और अपनी समाज को सुधारने के लिए अपने निजी जीवन पर ध्यानदेना बहुत जरूरी है अन्यथा लोग यही सोचेंगे कि जिसे अपने विषय में सोचने का समय ही नहीं है वो हमारे विषय में क्या और क्यों सोचेगा !
कहीं ऐसा तो नहीं है कि जहाँ वो विवाह करना चाहते हों वहाँ देश की स्वदेशी विचारधारा को पचे न और वो लोग विदेशी विवाह कहकर शोर मचाने लगें,जिसका चुनावों में पार्टी को नुक्सान हो जाए !इसलिए विवाह का फैसला चुनावों बाद लेने का विचार हो!फिर शोर मचाकर भी कोई क्या कर लेगा और दूसरे चुनावों तक सबकुछ भूल जाएँगे लोग !
खैर,ये सब बातें एक तरफ मुख्य बात यह है कि अब तो देश की लड़कियों को सोचना पड़ेगा कि जब उनमें से कोई राहुल गाँधी जी को उपयुक्त नहीं लगती तो क्या वो लोग राहुलगाँधी जी को देश का उपयुक्त प्रधान मंत्री मानती हैं !किन्तु वो मानें कैसे यदि राहुलगाँधी जी उपयुक्त राजनेता होते तो मनमोहन सरकार को जैसे अब तक वो अपनी अँगुलियों पर नचा सकते थे तो विकास कार्य भी करवा सकते थे, महँगाई भी रोक सकते थे, महिलाओं के साथ होने वाले दुर्व्यवहार भी रोक सकते थे और उनके मंत्रियों के द्वारा किया जाने वाला भ्रष्टाचार तो रोक ही सकते थे !
इसका सीधा सा मतलब है कि राहुलगाँधी जी उपयुक्त राजनेता नहीं हैं और जब वो उपयुक्त राजनेता ही नहीं बन सके तो उपयुक्त प्रधानमंत्री कैसे बन सकेंगे !यदि वो प्रधानमंत्री बन भी जाएँ तो क्या ?जब वो मेकर ऑफ़ प्रधान मंत्री बनकर कुछ नहीं कर सके तो प्रधान मंत्री बन कर कौन सा तीर मार देंगे !
इसका सीधा सा मतलब तो यही है कि जो व्यक्ति देश की बहुसंख्य लड़कियों में अपने लिए एक उपयुक्त लड़की न चुन पाया हो तो फिर देश की बहुसंख्य लड़कियाँ देश के चुनावों में उतरे हजारों प्रत्याशियों को छोड़कर राहुलगाँधी को ही उपयुक्त प्रधानमंत्री समझ कर क्यों चुन लें आखिर उनमें ऐसा क्या खास है जिस कारण वो अपने को प्रधानमंत्री पद का उपयुक्त उम्मींदवार समझते हैं !और क्यों दें देश की लड़कियाँ उनको अपना बहुमूल्य अपना वोट ?
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