मंगलवार, 1 अप्रैल 2014

'काँग्रेस में धूमधाम से हारने की होड़' कौन कितने बड़े नेता से लड़कर हारेगा चुनाव !

वाराणसी में जाकर मोदी से हारना चाहते थे राशिद अल्वी ? 

    राशिद अल्वी जी की ताकत का अंदाजा उनकी पार्टी को है इसलिए पार्टी को पता होगा कि इस दंगल में विजय किसकी हो रही है इसलिए मुश्किल है कि उनकी ही पार्टी उन्हें यह वरदान दे क्योंकि पार्टी तथा पार्टी नेतृत्व एवं पब्लिक सबको पता है कि प्रसिद्धि पाने के लिए ही सही राशिद अल्वी साहब मोदी जी के नाम के साथ अपने को जोड़ कर थोड़ा सा चर्चा में आ जाएँगे बस और क्या क्योंकि राजनैतिक बनवास की ओर बढ़ रही काँग्रेस के नेता इन चुनावों में अपनी अप्रासंगिकता को लेकर भड़भड़ा रहे हैं पहली बात तो कोई चुनाव लड़ना नहीं चाह रहा है और यदि कोई तैयार भी होता है तो ऐसी जगह से लड़ना चाह रहा है जहाँ  पराजित करने वाला नेता कद्दावर हो जिससे पराजित होने पर भी प्रसिद्धि लाभ तो हो ही जाए इस पैमाने पर मोदी जी जैसा सटीक और दूसरा कौन बैठेगा जिनकी प्रशंसा देश विदेशों में सब जगह हो रही है ! अच्छा दांव चला है राशिद अल्वी जी ने किन्तु देखना अब यह  है कि क्या पार्टी उन्हें यह सौभाग्य मिलने भी दे रही है या नहीं !

       बनारस कोई चुनाव लड़ने का अखाड़ा नहीं है यह बाबा विश्वनाथ जी की राजधानी है !
    काशी बाबा विश्वनाथ जी की राजधानी है उसे शिव भक्त अखाड़ा  नहीं बनने देंगे वहाँ तो जो श्रद्धा पूर्वक बाबा के द्वार पर सेवा माँगेगा बाबा उसे निराश नहीं करेंगे !
      वाराणसी के गौरव के विरुद्ध बढ़ रही राजनैतिक बयानबाजी रुकनी चाहिए !अन्यथा चुनावों में जनता सिखाएगी  ऐसे प्लास्टिकीनेताओं को सबक !
लालू ने कहा कि मोदी की राजनैतिक कब्र बनेगा बनारस! तो  केजरीवाल बोले कि मोदी
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