मोदी जी और उनकी पत्नी के विषय में तब
तक समाज को नहीं कूदना चाहिए जब तक कि मोदी जी या उनकी पत्नी इस विषय में
समाज अथवा मीडिया को आमंत्रित न करें!
मोदी जी पर कोई हलकी टिप्पणी करते समय उनके प्रति पत्नी के गौरव पूर्ण समर्पण को नजरंदाज नहीं किया जाना चाहिए और दोनों की निजता का सम्मान होना ही चाहिए !जहाँ तक बात प्रधान मंत्री की पत्नी के रूप में अपने अधिकारों की सूचना माँगने की बात है इसे आलोचना नहीं कहा जा सकता है ।
क्योंकि श्री राम ने भी
तो धोबी की बात का बहाना बनाकर श्री सीता को बनबास दिया था किन्तु सीता जी उसके बाद भी श्री राम के प्रति समर्पिता बनी रहीं यही कारण है की समाज आज तक उन्हें भगवान मानता है !क्योंकि श्री सीता राम जी ने आपसी विचार विमर्श के
बाद शारीरिक रूप से अलग होकर दोनों ने लोक रंजन का कार्य किया!
इसी प्रकार से श्री राधा जी को सौ वर्षों तक के लिए छोड़कर दूर चले जाने वाले श्रीकृष्ण को क्या भगवान नहीं मानते !आखिर क्यों ?
कई
महात्माओं ने भी संन्यास लेते समय पत्नी से अनुमति लेकर घर छोड़ा है तो वो गलत हो गए क्या धर्म सम्राट स्वामी
करपात्री जी महाराज जी ने भी ऐसा ही किया था इसलिए उनके निजी जीवन पर कभी
नहीं उठीं अँगुलियाँ !
अन्यथा मैं
मोदी जी पर हमला करने वालों से मैं पूछना चाहता हूँ कि गर्भिणी सीता को निकालना
यदि गलत था तो तुम श्री राम को भगवान क्यों मानते हो ! हो न हो मोदी जी
ने भी सामाजिक कार्यों को करने के लिए उनसे अनुमति लेकर घर छोड़ा हो,दूसरी बात ये भी संभव है की किसी लक्ष्य के साधन के लिए आपसी विमर्श के बाद ऐसा किया गया हो जो वो आज भी कर ही रहे हैं !आखिर उन्हें छोड़कर मोदी जी ने दूसरी शादी तो नहीं रचाई फिर वो और उनकी छवि बिगाड़ने की कोशिश क्यों की जा रही है?वैसे भी चुनावों का मुद्दा विकास है विवाह नहीं !
नरेंद्र मोदी एवं उनकी पत्नी ने जिस सादगी से एक दूसरे से अलग रहकर गौरव पूर्ण ढंग से जीवन के 46 वर्ष ब्यतीत किए इसके बाद भी उनकी पत्नी मोदी जी की प्रशंसा करती हैं उन्हें ही अपना पवित्र पति मानती हैं उन्हें प्रधान मंत्री बनाने के लिए व्रत रखती हैं दोनों लोग एक दूसरे की आलोचना नहीं करते हैं दोनों ने एक दूसरे के चरित्र पर कभी अँगुली नहीं उठाई कभी इस विषय को लेकर मीडिया या कोर्ट में नहीं गए इन सभी बातों से लगता है कि यह उनका नितांत निजी मामला है!
दोनों के सामने तलाक जैसे विकल्प खुले थे किन्तु यदि दोनों लोग या एक भी यदि इस विवाह से असंतुष्ट थे तो पुनर्विवाह का विकल्प भी खुला था दोनों ने घनघोर युवा अवस्था जनित पीड़ा को जिस गौरव पूर्ण ढंग से सहा है लेकिन अपनी चारित्रिक सामर्थ्य को सुरक्षित रखा है ये सामान्य तपस्या नहीं है किसी पर अंगुली उठाना आसान है किन्तु बचा जाना चाहिए ऐसी बातों से !
नेता ,मीडिया और समाज इन विषयों में नहीं बोलें उसी में भलाई है क्योंकि ये दो चारित्रिक तपस्वियों की गरिमा से जुड़ा मामला है ।उनकी पत्नी आज भी उनकी प्रशंसा करती हैं आखिर किसलिए ?
ऐसे सभी प्रकरणों में पत्नी का समर्पण यदि जीता जा सका है तो इसे गलत कैसे कहा जा सकता है ये श्री राम को या श्री कृष्ण को हासिल था लगभग मोदी जी की पत्नी भी आज तक मोदी जी के प्रति जिस तरह से समर्पिता हैं तो किसी और की क्या हिम्मत कि वो उनके दाम्पत्यिक आपसी संबंधों पर उठा जाए अंगुली!
इसलिए मोदी जी की पत्नी के विषय में तब तक समाज को नहीं कूदना चाहिए जब तक की मोदी जी या उनकी पत्नी इस विषय में समाज अथवा मीडिया को आमंत्रित न करें तब तक इसे चर्चा का विषय ही नहीं बनाया जाना चाहिए !
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