भाजपा का घोषणापत्र, टिप्पणी करने से अमेरिका का इनकार - हिंदुस्तान
इसमें गलत क्या है भारत भी स्वतन्त्र और अमेरिका भी स्वतंत्र टिप्पणी करे या न करे !
वैसे भी श्री राम मंदिर की चर्चा सुनकर बड़े बड़ों की बोलती बंद है कि समर्थन करते हैं तो श्री राम मंदिर विरोधियों से बुराई होगी और यदि पक्ष ले लेते हैं तो हो न हो भारत की जनता अपने मूड के अनुशार श्री रामभक्तों की सरकार बना ही ले तब हमारी हनक बेकार चली जाएगी !ऐसे कह देंगे कि ये उनका अंदरूनी मामला है !
अमेरिका के मौन रहने का एक कारण ये भी हो सकता है कि वो सोच रहे होंगे ये श्री अटल विहारी वाजपेयी जी वाले भाजपाई हैं ये हमसे पूछ पूछ के थोड़े ही करेंगे काम !गया वो भारत में विदेशियों के प्रभुत्व से चलने वाली सरकारों का जमाना !अटलजी ने तो परमाणु परीक्षण करते समय कौन हमसे पूछा था ! पूछने की बात तो छोड़िए अटल जी ने तो बताना भी जरूरी नहीं समझा था इतना ही नहीं उन्होंने तो हमारे द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की भी परवाह नही की थी !खैर जो भी हो अब तो चुप रहना ही पड़ेगा !
अमेरिका के मौन होने का एक कारण ये भी हो सकता है वह सोच रहा होगा कि लग रहा है मोदी जी को बीजा न देकर हमसे गलती हो गई है क्योंकि अनुमानों के आधार पर तो सत्ता की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं मोदी जी ! यदि वो प्रधान मंत्री बन गए तो बीजा तो देना ही पड़ेगा अब भारत की उपेक्षा करके नहीं चला जा सकता है इसलिए वो सोच रहा होगा कि बीजा अभी दें या चुनाव परिणाम आने के बाद दें !
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