काँग्रेसी लहरों के भ्रष्टाचारी सैलाव में डूबते उतराते देश की ओर बढ़ने लगी हैं अब मोदी लहरें !
कहाँ है मोदी लहर ? U.P.A. से निराश लोगों की मजबूरी है N.D.A.इसके बाद फिर U.P.A. ? इसमें लहर किस बात की ! जनता किस राजनैतिक दल से क्या आशा करे ?इसे भी देखें - मोदी जी के नामांकन में भद्रा का भ्रम क्यों ?ये तो शत्रु पराजय का उत्तम योग है ! मोदी जी के नामांकन के लिए भद्रा का भय भरने वाले ज्योतिषियों में शास्त्रीय गंभीरता का अभाव ! see more...http://bharatjagrana.blogspot.in/2014/04/blog-post_21.html
देश का राजनैतिक वातावरण U.P.A. और N.D.A.दो समूहों में लगभग विभाजित सा हो चुका है दोनों गठबंधनों के लोगों को जनता बारी बारी से शीर्ष पदों पर सुशोभित करती रहती है क्योंकि लोकतंत्र की दृष्टि से यह दायित्व निभाना जनता की मजबूरी है ! वैसे भी U.P.A. और N.D.A. को छोड़कर और तीसरा विकल्प ही क्या है देश की जनता चाहकर भी वर्तमान परिस्थिति में कोई बड़ा उलटफेर किए बिना ही किसी और को सत्ता कैसे सौंपे !
पिछले दस वर्षों से U.P.A. सरकार की बारी थी अब हो सकता है कि N.D.A.की बारी आवे !किन्तु इसका ये मतलब तो कतई नहीं निकाला जाना चाहिए कि अभी तक मन मोहन सिंह की लहर चल रही थी अब मोदी जी की लहर चलेगी !इसे लहर कहेंगे क्या ?
किसी गाँव में एक अंधी लड़की की शादी किसी अंधे लड़के से की जा रही थी तो जब बारात आई तो देखने वालों की बड़ी भीड़ उमड़ी !वर को भी दिखाई तो पड़ता नहीं था इसलिए महिलाएँ उसका श्रृंगार देख देख कर कह रही थीं देखो कंघा कितने अच्छे ढंग से किया है कपड़े कितने साफ कितने सुन्दर प्रेस किए पहने है देखो जूते मोज़े वाह मान गए भाई !यह सब सुन सुन कर वर महराज बड़ा खुश तब तक किसी मित्र ने उनके कंधे पर थपकी देकर कहा आज तो छा गए गुरू !सब लोग फिदा हैं तुम पर !अब वर महाराज ख़ुशी से बाग़ बाग़ होकर सबको बताने लगे कि ये सब सुन्दर श्रंगार हुआ कैसे?
दर असल वर महाराज की सुंदरता पर वो सब आकर्षित नहीं थीं अपितु वो तो उनके अंधेपन के बाद भी किए गए उत्साहपूर्ण श्रंगार पर आश्चर्यान्वित थीं !ठीक उसीप्रकार से पिछले दस वर्षों में महँगाई ,भ्रष्टाचार आदि बड़ी पीड़ाओं से हैरान परेशान एवं राजनैतिक जगत से निराश लोग मोदी जी को बड़े आश्चर्य से सुनने जाते हैं जब मोदी जी कहते हैं कि साठ महीने में हम सब ठीक कर लेंगे तो लोग बड़े कौतूहल से उनकी ओर देखते और कहते हैं कि मोदी जी हम एक अर्थशास्त्री के अनर्थ के शिकार हैं आप इतनी जल्दी कैसे ठीक कर लेंगे ?वस्तुतः वो भारतीय राजनीति में भ्रष्टाचार को ठीक न हो पाने वाली लाइलाज बीमारी मान चुके हैं रैलियों में समिट कर पहुँचने वाली भीड़ उस निराश हताश जनता की है इसे लहर कहना कितना उचित होगा ?
लहर भी कैसी जब जनता के पास कोई तीसरा विकल्प ही नहीं है दिल्ली के चुनावों में आम आदमी पार्टी के रूप में उसे तीसरा विकल्प दिखाई भर दिया तो जनता वहाँ कूद गई! बात अलग है कि केजरीवाल भी एक धोखा ही साबित हुए किन्तु काँग्रेस से दुखी लोग भाजपा की लहर से भी प्रभावित नहीं हुए थे !ये राष्ट्रीय राजधानी की तस्वीर है जो पूरे देश को प्रतिबिंबित करती है !इससे आसानी से अनुमान लगाया जा सकता है कि देशवासी काँग्रेस से क्रोधित जरूर हैं किन्तु प्रभावित भाजपा से भी नहीं हैं हाँ ,इतना जरूर है कि जहाँ कोई तीसरा विकल्प नहीं है वहाँ भाजपा को चुन लेने का मतलब भाजपा की लहर कैसे कही जा सकती है! दिल्ली में ही अबकी केजरीवाल न होते तो भाजपा सत्ता में आ सकती थी किन्तु लहर तो तब मानी जाएगी जब केजरीवाल के होने पर भी भाजपा की विजय हो जाती किन्तु ऐसा तो हो नहीं सका !
वैसे भी मोदी जी की लहर तो तब मानी जाती जब केवल मोदी जी के नाम पर सरकार बनने की संभावना होती, इसीप्रकार से भाजपा की लहर तो तब मानी जाती जब भाजपा के नाम से सरकार बनने की सम्भावना होती, ऐसे ही N.D.A.की लहर तब मानी जाती जब पूर्व घोषित N.D.A.की सरकार बन रही होती इसीलिए N.D.A.को अब सैद्धांतिक मूल्यों पर समझौता करके भी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है कुछ दल तो अभी लाकर N.D.A.से जोड़े गए हैं जिनमें कुछ वो लोग भी हैं जो भाजपा और मोदी जी को पानी पी पीकर कोसते रहे ऐसे दल भी N.D.A. में लाकर जोड़े गए इसके बाद भी भावी सरकार के विषय में अभी तक कोई स्पष्ट तस्वीर उभरनी बाक़ी है!इसलिए इतने हिचकोले खा खाकर सत्ता की ओर बढ़ती रुकती दिखती भाजपा और मोदी जी की लहर कैसे कही जा सकती है ?
इसलिए लहर केंद्र सरकार के विरोध की तो है किन्तु भाजपा और मोदी जी के पक्ष की नहीं है कोई लहर !भाजपा कहती है कि मनमोहन सिंह अब तक के सबसे कमजोर प्रधानमंत्री हैं किन्तु पिछले दस वर्षों से वे ही तो प्रधान मंत्री हैं इसका मतलब ये तो नहीं है कि उनकी लहर थी !
जहाँ तक भाजपा कहती है कि मनमोहन सिंह जी अब तक के सबसे कमजोर प्रधानमंत्री हैं किन्तु भाजपा ही कौन बहुत पहलवान रही है जो सबसे कमजोर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी को भी तो दस वर्ष तक हिला नहीं सकी !इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि भाजपा की अपनी हालत कितनी पतली थी !
आज भी दिल्ली भाजपा में अच्छे,समर्पित और जनप्रिय कार्यकर्ताओं की इतनी कमी है कि जिस व्यक्ति को विधायक का चुनाव लड़वाया जाता है उसी को सांसद का चुनाव लड़वाना पड़ता है उसी को मुख्य मंत्री पद का प्रत्याशी बनाना पड़ता है उसी को अध्यक्ष पद देना पड़ता है !इस प्रकार से गरीब रामलीला मंडली के अभिनेताओं की तरह एक आदमी ही सारे रोल निभा लेता है तभी तो पंद्रह वर्षों से विपक्ष में बैठकर काँग्रेस को हराने के लिए आसन प्राणायाम करने वाली पार्टी को तीन दिन की आम आदमी पार्टी चकमा दे गई !इसी प्रकार से आज भाजपा मोदी मोदी कर रही है आखिर क्या हो गया है भाजपा को !क्या कारण है कि जिस पार्टी में एक से एक समर्पित, बुद्धिमान,विद्वान ,कर्मठ हजारों प्रतिभा संपन्न नेताओं की उपस्थिति हो समर्पित कार्यकर्ताओं का विशाल समूह हो जिसमें असंख्य भारतीयों की आशा की किरण श्रीमान मोदी जी भी हैं जो बहुत कर्मठ विनम्र शालीन ,सबको सम्मान देने वाले राष्ट्र सेवा भावना से भावित व्यक्ति हैं किन्तु केवल वे ही नहीं हैं और न ही पार्टी को खड़ी करने में केवल उनका ही योगदान माना जा सकता है और न ही वो स्वयं ही ऐसा मानते हैं वो अपने वरिष्ठ नेताओं का असीम सम्मान करते हैं तभी तो उन लोगों ने भी मोदी जी को अपने कन्धों पर बैठाया हुआ है अन्यथा मोदी जी कितने भी बड़े होते किन्तु उन कंधों का सहारा कहाँ मिलता जो मोदी जी को उठाए हुए हैं !आखिर डेढ़ वर्ष पहले तक तो मोदी जी ने अपने को एक प्रदेश तक ही तो सीमित कर रखा था और ईश्वर न करे यदि अभी भी परिणाम प्रतिकूल हुए तो मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री तो हैं ही गुजरात फिर लौट जाएँगे अथवा यूँ कह लें कि देश दायित्व देगा तो वो देश के अन्यथा मोदी जी गुजरात प्रदेश के !मेरे कहने का भाव मात्र इतना है कि भाजपा डेढ़ वर्ष पहले भी अपने सामूहिक कार्यक्रमों के आधार पर ही आगे बढ़ती रही है और आगे भी ऐसा ही होता रहेगा इतने भरे पुरे परिवार के स्नेह भाजन होने में मोदी जी का जो गौरव है वो हर हर मोदी और मोदी सरकार जैसे शब्दों में नहीं है !
आखिर मोदी सरकार क्यों भाजपा सरकार क्यों नहीं ?क्या मोदी जी भाजपा से अलग हैं !या मोदी भाजपा कोई और है ?
पार्टी के अंदर से पार्टी के निर्णयों की मीडियाई आलोचना शुभ संकेत नहीं माने जा सकते !वैसे भी केवल हर हर मोदी क्यों चुनावों के बाद जनता कहाँ ढूँढेगी मोदी जी को ?कार्यकर्ता अपने विश्वास पर क्यों नहीं माँगते हैं वोट !
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें