बुधवार, 2 अप्रैल 2014

गुजरात की घटनाओं में कितने दोषी हैं मोदी जी और कितने हैं अन्य दलों के नेता ?

अपने लोकतान्त्रिक प्रशासकों से यह प्रश्न जानने का हक़ तो  हमें भी है कि आखिर गोदरा और गुजरात में मारे गए लोगों का सच क्या है ! आखिर उनके लिए जिम्मेदार  कौन है !और चुनावों के समय ही नेताओं को क्यों याद आते हैं गुजरात के दंगे ! 
           
     ये अत्यंत आश्चर्य की बात है कि इतने गंभीर विषय पर जनता को भ्रमित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।  आखिर विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी जो गुजरात के सम्माननीय मुख्यमंत्री भी हैं और जब ये घटनाएं  हुई थीं तब भी मुख्यमंत्री वे मोदी जी ही थे ।  चूँकि मोदी जी मुख्य मंत्री थे इस कारण मोदी जी को कुछ राजनैतिक लोग गुजरात दंगों का दोषी मान रहे हैं उन्हें बाँटने वाला, तोड़ने वाला सांप्रदायिक ठहराते हुए कातिल एवं  हत्यारा जैसे गंभीर अपमान करने वाले शब्दों का प्रयोग कुछ बड़े लोगों के द्वारा यह जानते हुए भी किया जा रहा है कि गुजरात की जनता ने उन्हें कई चुनाव प्रेम पूर्वक जितवाए हैं !क्या गुजरात के सच के विषय में गुजरात की जनता की अपेक्षा कोई और अधिक जानता होगा जो जनता स्वयं वहाँ भुक्त भोगी रही है ?दूसरी बात लोक तंत्र में जनता का मत महत्त्व रखता है ऐसी परिस्थिति में बहुमत के द्वारा मोदी जी मुख्यमंत्री बने हैं इसके बाद भी मोदी जी के लिए कातिल ,हत्यारा जैसे कुशब्दों का प्रयोग क्या गुजरात की जनता के साथ साथ लोक तंत्र का भी अपमान नहीं है जो एक मात्र माध्यम है देश की शासन सत्ता चलाने का ! यहाँ एक और महत्वपूर्ण बात है कि गुजरात के हर चुनावों में ये राजनैतिक लोग गुजरात की जनता को बताने समझाने भी जाते रहे हैं कि मोदी जी गुजरात दंगों के कातिल और हत्यारे आदि आदि हैं इसलिए इन्हें वोट मत देना !किन्तु गुजरात की जनता उन्हें स्पष्ट रूप से नकारती चली जा रही है और मोदी जी को जिताती चली आ रही है !यहाँ एक बड़ा  प्रश्न है कि यदि मोदी जी वास्तव में दोषी हैं तो काँग्रेस जैसे दलों की कही समझाई हुई बातों का असर  गुजरात की जनता पर हो क्यों नहीं रहा है और क्यों दे रही है वह श्री मोदी जी का साथ ?काँग्रेस को मोदी जी के विरुद्ध दुष्प्रचार करने की अपेक्षा आत्म मंथन क्यों नहीं करना  चाहिए और सोचना चाहिए कि मोदी जी यदि गुनहगार होते तो गुजरात की जनता क्यों देती उनका साथ !कहीं गुजरात की जनता की काँग्रेस से यही नाराजगी तो नहीं है जो पिछले कई चुनावों से झूठा मानकर ही खाली हाथ लौटा दे रही है मोदी विरोधियों  को !
           कहीं ऐसा तो नहीं कि शुरू शुरू की बात थी मोदी जी को तब प्रशासन का उतना अनुभव भी न रहा हो क्योंकि उससे सबक लेकर मोदी जी ने फिर कभी कोई ऐसी दुर्घटना नहीं घटित होने दी !उस समय किसी और ने राजनैतिक शरारत वश मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए ऐसे किसी प्राण घातक खेल की शुरुआत कर दी हो इस बात का उसे भी अनुमान न रहा हो कि बात इतनी बढ़ जाएगी और जब बात बढ़ गई तो दबी रहने में ही सभी लोग अपनी भलाई समझ रहे हों !अन्यथा काँग्रेस मोदी जी पर कृपा आखिर क्यों कर रही होती ?
         
     काँग्रेस के लिए गंभीर आत्म मंथन का एक और विषय है कि पिछले दस वर्षों से काँग्रेस केंद्र की सत्ता में है उचित तो था कि वो गुजरात और गोदरा की घटनाओं की जाँच स्वयं करवाती ये उसका नैतिक और प्राशासनिक दायित्व था किन्तु काँग्रेस ने ऐसा क्यों नहीं किया ?
    मोदी जी का यह कहते हुए बार बार केंद्र सरकार को ललकारना कि काँग्रेस  सरकार हमारे विरुद्ध जाँच क्यों नहीं करवा रही है और यदि मैं दोषी हूँ तो मुझे चौराहे पर फाँसी क्यों नहीं दे दी जाती ! यह सुनकर भी वह काँग्रेस पिछले दस वर्षों से अनसुनी करती चली आ रही है जिसके विषय में आम जन धारणा है कि उनके समर्थक दल थोड़ा भी उनके विरुद्ध बोलते हैं तो उनके पीछे सी.बी.आई.छोड़ दी जाती है फिर मोदी जी पर दया क्यों की जा रहीं है ?
   काँग्रेस के चिदंबरम जी ,दिग्विजय सिंह जी,राहुल गांधी जी और सोनियाँ गाँधी जी जैसी सरकारी सर्वे सर्वा शक्तियाँ न केवल इतना अपितु सोनियाँ जी जैसी महान महिला एवं संप्रग सरकार की स्वामिनी भी  गुजरात दंगों जैसे इतने संवेदन शील मुद्दे की सच्चाई समाज के सामने ला सकने में असमर्थ क्यों रहीं!आखिर उनकी क्या मजबूरी थी या उन्हें जनता से और कौन सी ताकत चाहिए थी जो नहीं मिल पाई जिस कमजोरी से संप्रग सरकार अक्षम बनी रही !आखिर पिछले दस वर्षों से गुजरात का सच उद्घाटित करने में केंद्र सरकार नाकाम क्यों रहीं ?
     गुजरात के दंगों के लिए मोदी जी को हमेंशा कोसने वाले लालू प्रसाद जी,मुलायम सिंह जी ,मायावती जी जैसे मनमोहन सरकार के सशक्त समर्थकों ने केंद्र सरकार को समर्थन देते समय अपनी प्रथम शर्त के रूप में ही क्यों नहीं कह दिया था कि आपको गोदरा और गुजरात की घटनाओं पर जाँच एवं दोषियों को दण्डित करना होगा ! ऐसा न होने पर वे केंद्र सरकार से समर्थन वापस ले सकते थे किन्तु उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया?
  
   गुजरात एवं गोदरा की घटनाओं में मारे गए हिन्दुस्तानियों के प्राणों का प्यासा आखिर था कौन !यदि इन अत्यंत दुर्भाग्य पूर्ण दुर्घटनाओं को टाला और रोका  नहीं जा सका तो क्या इसका सच जानने का अधिकार भी देश की जनता को नहीं है!इतना  संवेदन शील मुद्दा जो इस देश के सम्मानित नागरिकों  के जीवन से जुड़ा हो जो बांधव गण मारे गए हैं उनके सम्मानित परिजन आज भी इस प्रतीक्षा और आशा में जीवन धारण किए हुए हैं कि गुजरात दंगों का सच आखिर कभी तो सामने आएगा !
            
     गुजरात के दंगों का सच  सामने लाने के लिए अभी तक राहुल क्यों नहीं बने प्रधान मंत्री ! अथवा अभी तक मनमोहन सिंह जी क्या राहुल की बात मानते नहीं थे  या और कोई कारण था उसे भी स्पष्ट किया जाना चाहिए !आखिर क्यों नहीं हुई गोदरा और गुजरात की घटनाओं की वैसी  जाँच ?जिससे आम जनता को भी तो पता लगता कि वास्तव में दोषी कौन है मोदी या काँग्रेस ?जो हर चुनावों में इस मुद्दे को लेकर बैठ जाती है आखिर दंगों पर राजनीति क्यों या तो जाँच कराते या भूलते !काँग्रेस आखिर मोदी की जाँच कराने से डरती क्यों हैं क्या काँग्रेस  को अपने फँसने का कोई खतरा है और यदि हाँ तो ऐसे मुद्दे उठाती ही क्यों है?

     मोदी जी दोषी होते तो काँग्रेस कराती उनकी जाँच !जाँच न होने का मतलब वो दोषी नहीं हैं और दोषी है काँग्रेस जो उन पर आरोप तो लगाती है किन्तु जाँच नहीं करवाती है ! 

     आखिर काँग्रेस समेत वो सभी पार्टियाँ और नेता जो मोदी जी के नाम से डरते  हैं  किन्तु क्यों डरते हैं इस बात की जाँच मोदी जी को जरूर करवानी चाहिए !

    नरेंद्र मोदी जी कितने अच्छे और कितने बुरे हैं ये या तो मोदी जी को पता होगा या उस केंद्र सरकार को पता होगा जिसके आधीन देश की बड़ी सारी  जाँच एजेंसियाँ हैं या उस पार्टी को पता होगा जो पिछले दस वर्षों से देश में जो शासन कर रही है ये भी उसे पता होगा कि जिस मोदी में उन्हें सारे दोष ही दोष दिखते हैं तो उनकी जाँच क्यों नहीं की गई !जब मोदी जी की विरोधी पार्टी की सरकार केंद्र में थी  तो उसे जाँच करने और कार्यवाही करने में क्या भय था उसके नेता इसका जवाब दें केवल चिल्लाने से कुछ नहीं होगा !जनता ने आप को इतना लंबा मौक़ा दिया फिर भी न कोई जांच और न कोई कार्यवाही फिर भी मोदी जी दोषी ये कहाँ का न्याय है !इसलिए अबकी देश की जनता मोदी जी को अवसर देना चाहती है कि आप पता लगाओ कि ये आपके विरोधी इतना शोर क्यों मचा रहे हैं आखिर इन्हें आपसे भय क्या है ?इस प्रकार की जन भावना से भयभीत भ्रष्टाचारी लोग मोदी जी को अपनी शैली में गालियाँ दे रहे हैं जैसे सीता स्वयंबर में परशुराम जी के प्रकट होते ही राजा लोग अपना अपना परिचय देने लगे वैसे ही प्रधान मंत्री पद के प्रत्याशी के रूप में मोदी जी के उभरते ही विभिन्न पार्टियों के नेता लोग अपने अपने शब्दों में अपना अपना परिचय देकर अभिवादन कर रहे हैं जैसे जो नेता गुंडा है वो मोदी जी को गुंडा कहता है जो गुलाम है वो गुलाम कहता है और जो कुत्ता है वो कुत्ता कहता है जो बन्दर है वो बन्दर कहता है हो सकता है कि इसी क्रम में कुछ और लोग भी अपनी अपनी शैलियों में अपना अपना परिचय दें !इसी क्रम में ईमानदार लोग मोदी जी को ईमानदार एवं चरित्रवान लोग मोदी जी को चरित्रवान भी कहते हैं !  

      देशवासी  सन 2002 से राजनेताओं के मुख से सुनते आ रहे हैं कि गुजरात के दंगों में मोदी जी का हाथ है इसी से सम्बंधित अच्छे बुरे हर प्रकार के आरोप हर प्रकार की अभद्र शब्द शैली में लगाए जाते रहे हिम्मत मोदी जी  की जो सहते रहे वो चाहते तो उसी शैली में प्रतिकार भी कर सकते थे किन्तु उन्होंने मनुष्यता का परिचय दिया अर्थात बोलने  वालों से बात करते  रहे पूछने वालों को उत्तर देते रहे किन्तु चूँकि  भौंकने  के उत्तर में उन्हें भी भौंकना ही पड़ता और मनुष्य होने के कारण वो ऐसा कैसे कर सकते थे या कैसे कर पाते इसलिए मौन होकर संयम पूर्वक सबकी अच्छी बुरी प्रतिक्रियाएँ सहते रहे और गुजरात की उस जनता की सेवा ईमानदारी पूर्वक करते रहे जिसने ऐसे बिषम समय में भी  मोदी जी पर भरोसा किया । ये उनकी ईमानदारी एवं  जननिष्ठा का ही परिणाम है कि गुजरात की जनता अपने मुख्यमंत्री के साथ ऐसे खड़ी है कि विपक्ष की भूमिका अदा करने के लिए मजबूर दूसरी पार्टियों के नेता लोग झूठे आरोपों का सहारा लेते रहे  हैं जिसे वहाँ की जनता नकार देती रही  है और मोदी जी के प्रति समर्थन व्यक्त करती रही है। 

     मोदी जी की अभेद्य कार्यशैली से कुंठित काँग्रेस आदि धर्म निरपेक्ष अर्थात धर्म विहीन दल दुखी ही इसलिए हैं कि यदि केंद्र में मोदी जी की सरकार बन ही गई तो मोदी जी हटाए नहीं हटेंगे क्योंकि मोदी जी ईमानदार हैं परिश्रमी हैं विनम्र हैं और सबसे बड़ी बात उन्हें  जनता का हृदय जीतना आता है।  

    ऐसी परिस्थिति में मेरा निवेदन मोदी जी के प्रति है कि यदि मोदी जी वास्तव में ईमानदार और बात वाले हैं तो उन्होंने अभी तक अपनी वाणी से जिस जिसको भ्रष्टाचारी और घोटाले बाज कहा है उन्हें ऐसे सभी आरोपों की जाँच करानी होगी और करनी होगी उनपर कार्यवाही और दोषियों को भेजना होगा जेल ! यदि उन्होंने ऐसा नहीं किया तो मोदी जी का झूठ पकड़ जाएगा और केजरीवाल की तरह जनता उनकी भी उपेक्षा करने लगेगी और काँग्रेस की तरह ही अगली बार चुनावों के समय जनता की अदालत के कटघरे में मोदी जी खड़े होंगे कि जिन्हें आप अभी तक भ्रष्टाचारी कहते रहे उन पर कोई कार्यवाही की क्यों नहीं !किन्तु यदि मोदी जी ने  भ्रष्टाचारियों पर वास्तव में कोई कड़ी कार्यवाही कर ही दी तो भ्रष्टाचारी नेता बेचारे सड़ जाएँगे भारत की जेलों में पड़े पड़े।अपने दुष्कर्मों के अनुशार भविष्य में सम्भावित उस कारगारीय पीड़ा से परेशान कुछ ऐसे गरिहार नेता जो विभिन्न राजनैतिक पार्टियों में गाली गलौच करने के लिए भाड़े पर रखे गए हैं । ऐसे गरिहारों को मोदी जी में साक्षात् अपनी राजनैतिक मौत के दर्शन अभी से होने लगे हैं वो यह जानते हुए भी कि यदि देश की जनता मोदी जी साथ देगी तो हम कुछ बिगाड़ नहीं पाएँगे और जनता भ्रष्टाचारियों का साथ देती नहीं है !इसलिए विभिन्न पार्टियों में राजनैतिक मजदूरी के लिए दिहाड़ी पर रखे गए गरिहारों में अब वही वैचारिक सन्निपात के लक्षण दिखने लगे हैं जो आसन्न मृत्यु शय्या पर लेटे हुए  व्यक्ति में दिखते हैं वह कभी कुछ बकने लगता है कभी कुछ !

      वही स्थिति आज मोदी जी के लिए गाली गलौच करने वालों की है ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे !

    

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