अपने लोकतान्त्रिक प्रशासकों से यह प्रश्न जानने का हक़ तो हमें भी है कि आखिर गोदरा और गुजरात में मारे गए लोगों का सच क्या है ! आखिर उनके लिए जिम्मेदार कौन है !और चुनावों के समय ही नेताओं को क्यों याद आते हैं गुजरात के दंगे !
ये अत्यंत आश्चर्य की बात है कि इतने गंभीर विषय पर जनता को भ्रमित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। आखिर विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी जो गुजरात के सम्माननीय मुख्यमंत्री भी हैं और जब ये घटनाएं हुई थीं तब भी मुख्यमंत्री वे मोदी जी ही थे । चूँकि मोदी जी मुख्य मंत्री थे इस कारण मोदी जी को कुछ राजनैतिक लोग गुजरात दंगों का दोषी मान रहे हैं उन्हें बाँटने वाला, तोड़ने वाला सांप्रदायिक ठहराते हुए कातिल एवं हत्यारा जैसे गंभीर अपमान करने वाले शब्दों का प्रयोग कुछ बड़े लोगों के द्वारा यह जानते हुए भी किया जा रहा है कि गुजरात की जनता ने उन्हें कई चुनाव प्रेम पूर्वक जितवाए हैं !क्या गुजरात के सच के विषय में गुजरात की जनता की अपेक्षा कोई और अधिक जानता होगा जो जनता स्वयं वहाँ भुक्त भोगी रही है ?दूसरी बात लोक तंत्र में जनता का मत महत्त्व रखता है ऐसी परिस्थिति में बहुमत के द्वारा मोदी जी मुख्यमंत्री बने हैं इसके बाद भी मोदी जी के लिए कातिल ,हत्यारा जैसे कुशब्दों का प्रयोग क्या गुजरात की जनता के साथ साथ लोक तंत्र का भी अपमान नहीं है जो एक मात्र माध्यम है देश की शासन सत्ता चलाने का ! यहाँ एक और महत्वपूर्ण बात है कि गुजरात के हर चुनावों में ये राजनैतिक लोग गुजरात की जनता को बताने समझाने भी जाते रहे हैं कि मोदी जी गुजरात दंगों के कातिल और हत्यारे आदि आदि हैं इसलिए इन्हें वोट मत देना !किन्तु गुजरात की जनता उन्हें स्पष्ट रूप से नकारती चली जा रही है और मोदी जी को जिताती चली आ रही है !यहाँ एक बड़ा प्रश्न है कि यदि मोदी जी वास्तव में दोषी हैं तो काँग्रेस जैसे दलों की कही समझाई हुई बातों का असर गुजरात की जनता पर हो क्यों नहीं रहा है और क्यों दे रही है वह श्री मोदी जी का साथ ?काँग्रेस को मोदी जी के विरुद्ध दुष्प्रचार करने की अपेक्षा आत्म मंथन क्यों नहीं करना चाहिए और सोचना चाहिए कि मोदी जी यदि गुनहगार होते तो गुजरात की जनता क्यों देती उनका साथ !कहीं गुजरात की जनता की काँग्रेस से यही नाराजगी तो नहीं है जो पिछले कई चुनावों से झूठा मानकर ही खाली हाथ लौटा दे रही है मोदी विरोधियों को !
कहीं ऐसा तो नहीं कि शुरू शुरू की बात थी मोदी जी को तब प्रशासन का उतना अनुभव भी न रहा हो क्योंकि उससे सबक लेकर मोदी जी ने फिर कभी कोई ऐसी दुर्घटना नहीं घटित होने दी !उस समय किसी और ने राजनैतिक शरारत वश मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए ऐसे किसी प्राण घातक खेल की शुरुआत कर दी हो इस बात का उसे भी अनुमान न रहा हो कि बात इतनी बढ़ जाएगी और जब बात बढ़ गई तो दबी रहने में ही सभी लोग अपनी भलाई समझ रहे हों !अन्यथा काँग्रेस मोदी जी पर कृपा आखिर क्यों कर रही होती ?
काँग्रेस के लिए गंभीर आत्म मंथन का एक और विषय है कि पिछले दस वर्षों से काँग्रेस केंद्र की सत्ता में है उचित तो था कि वो गुजरात और गोदरा की घटनाओं की जाँच स्वयं करवाती ये उसका नैतिक और प्राशासनिक दायित्व था किन्तु काँग्रेस ने ऐसा क्यों नहीं किया ?
मोदी जी का यह कहते हुए बार बार केंद्र सरकार को ललकारना कि काँग्रेस सरकार हमारे विरुद्ध जाँच क्यों नहीं करवा रही है और यदि मैं दोषी हूँ तो मुझे चौराहे पर फाँसी क्यों नहीं दे दी जाती ! यह सुनकर भी वह काँग्रेस पिछले दस वर्षों से अनसुनी करती चली आ रही है जिसके विषय में आम जन धारणा है कि उनके समर्थक दल थोड़ा भी उनके विरुद्ध बोलते हैं तो उनके पीछे सी.बी.आई.छोड़ दी जाती है फिर मोदी जी पर दया क्यों की जा रहीं है ?
काँग्रेस
के चिदंबरम जी ,दिग्विजय सिंह जी,राहुल गांधी जी और सोनियाँ गाँधी जी जैसी
सरकारी सर्वे सर्वा शक्तियाँ न केवल इतना अपितु सोनियाँ जी जैसी महान महिला
एवं संप्रग सरकार की स्वामिनी भी गुजरात दंगों जैसे इतने संवेदन शील
मुद्दे की सच्चाई समाज के सामने ला सकने में असमर्थ क्यों रहीं!आखिर उनकी
क्या मजबूरी थी या उन्हें जनता से और कौन सी ताकत चाहिए थी जो नहीं मिल पाई
जिस कमजोरी से संप्रग सरकार अक्षम बनी रही !आखिर पिछले दस वर्षों से गुजरात का सच उद्घाटित करने में केंद्र सरकार नाकाम क्यों रहीं ?
गुजरात के दंगों के लिए मोदी जी को हमेंशा कोसने वाले लालू प्रसाद जी,मुलायम सिंह जी ,मायावती जी जैसे मनमोहन सरकार के सशक्त समर्थकों ने केंद्र सरकार को समर्थन देते समय अपनी प्रथम शर्त के रूप में ही क्यों नहीं कह दिया था कि आपको गोदरा और गुजरात की घटनाओं पर जाँच एवं दोषियों को दण्डित करना होगा ! ऐसा न होने पर वे केंद्र सरकार से समर्थन वापस ले सकते थे किन्तु उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया?
गुजरात एवं गोदरा की घटनाओं में मारे गए हिन्दुस्तानियों के प्राणों का प्यासा आखिर था कौन !यदि इन अत्यंत दुर्भाग्य पूर्ण दुर्घटनाओं को टाला और रोका नहीं जा सका तो क्या इसका सच जानने का अधिकार भी देश की जनता को नहीं है!इतना संवेदन शील मुद्दा जो इस देश के सम्मानित नागरिकों के जीवन से जुड़ा हो जो बांधव गण मारे गए हैं उनके सम्मानित परिजन आज भी इस प्रतीक्षा और आशा में जीवन धारण किए हुए हैं कि गुजरात दंगों का सच आखिर कभी तो सामने आएगा !
गुजरात के दंगों का सच सामने लाने के लिए अभी तक राहुल क्यों नहीं बने प्रधान मंत्री ! अथवा अभी तक मनमोहन
सिंह जी
क्या राहुल की बात मानते नहीं थे या और कोई कारण था उसे भी स्पष्ट किया
जाना चाहिए !आखिर क्यों नहीं हुई गोदरा और गुजरात की घटनाओं की वैसी जाँच ?जिससे आम जनता को भी
तो पता लगता कि वास्तव में दोषी कौन है मोदी या काँग्रेस ?जो हर चुनावों
में इस मुद्दे को लेकर बैठ जाती है आखिर दंगों पर राजनीति क्यों या तो जाँच
कराते या भूलते !काँग्रेस आखिर मोदी की जाँच कराने से डरती क्यों हैं क्या
काँग्रेस को अपने फँसने का कोई खतरा है और यदि हाँ तो ऐसे मुद्दे उठाती
ही क्यों है?
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