किन्तु " किसी के अपमान के लिए पैसों का भुगतान" ये पद्धति बिलकुल ठीक नहीं है !
अपमान तो अपमान है उसकी भरपाई पैसों या धन से या कुछ भी देकर कैसे की जा सकती है लेन देंन की बात बीच में आते ही मुख्य विषय विन्दु की धार कुंद हो जाती है।
इसलिए किसी का सम्मान बहुमूल्य होता है उसकी कोई कीमत नहीं हो सकती ! बाबा जी के बयान से सारा सभ्य समुदाय शर्मिन्दा है दोबारा किसी के सम्मान के साथ इस प्रकार का खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए अन्यथा ऐसे लोगों का समाज स्वयं सामाजिक बहिष्कार करे !सारा देश महिलाओं के सम्मान एवं स्वाभिमान की रक्षा के समर्थन में है इसे जाति एवं संप्रदाय के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए ! ये लोकतान्त्रिक देश है यहाँ सबका सम्मान समान रूप से किया ही जाना चाहिए !
जहाँ तक बात मुआवजे की है महिलाओं के सम्मान के साथ मुआवजे का समझौता नहीं होना चाहिए मैं निजी रूप से इन बातों से सहमत नहीं हूँ कि किसी जाति या व्यक्ति का कभी या किसी ने अपमान किया है इसलिए उसे आरक्षण मिलना चाहिए या उस अपमान का आर्थिक रूप में भुगतान होना चाहिए !इससे लगने लगता है कि वस्तुतः ये मान सम्मान का प्रश्न ही नहीं था प्रत्युत ये धन का मामला था ! इसलिए ऐसे प्रकरणों को उठाने के बाद इनकी धार कुंद नहीं होने देनी चाहिए ! अन्यथा बड़े बड़े अर्थोन्मादी लोग या उनके बेटा बेटी बड़े बड़े अपराध इस नशे में कर बैठते हैं कि क्या होगा अधिक से अधिक मुआबजा ही तो देना होगा सो दे देंगे इसलिए ऐसे लोगों को सर्वसम्मति से सामूहिक रूप से सामाजिक बहिष्कार के रूप में सबसे बड़ा दंड दिया जा सकता है !किन्तु यह निर्णय भी अपराध के आधार पर ही लेना उचित होगा क्योंकि मेरा उद्देश्य है कि लोकतांत्रिक भारत में अन्याय किसी के साथ भी न होने पाए !
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