गुरुवार, 1 मई 2014

मायावती जी को कुमारी कहूँ ,श्रीमती कहूँ या बहन कहूँ - मुलायम सिंह (जनसत्ता )

किन्तु मुलायम सिंह जी को यह संशय अब क्यों हो रहा है ?जबकि मायावती जी के साथ राजनीति में वो काम तो पहले से ही कर रहे हैं !
    मुलायम सिंह जी इसमें समस्या क्या है ?और मायावती जी के लिए इसमें बुरा मानने वाली बात क्या है!वैसे भारतीय परंपरा में किसी  भी अविवाहिता लड़की या महिला  को इन तीनों सम्बोधनों से सम्बोधित किया जा सकता है । लड़कियों का जब तक विवाह नहीं होता है तब तक उन्हें कुमारी मानने की अपनी परंपरा है किन्तु रजः प्रवर्तन के बाद कन्या नहीं कहा जा सकता है। कई बार कुछ अविवाहित लड़के लड़कियों या स्त्री पुरुषों  का चारित्रिक पक्ष  संदिग्ध होता है उनके चारित्रिक प्रदूषण पर बातें बड़ी बड़ी होती सुनी गई हैं किन्तु इस सच्चाई से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि वैवाहिक घोषणा से पूर्व उन्हें व्यभिचारी ब्यभिचारिणी आदि कुछ भी कहा या माना जाए किन्तु उनकी स्थाई ,सर्वविदित  एवं मर्यादित संज्ञा तो  कुमारा या कुमारी ही रहेगी । 

       "कुमारा या कुमारी " शब्द में यहाँ एक और विशेष बात है कि समाज को दुखी करने वाले पृथ्वी पर बोझ होते हैं उनका संहार करने वाले को भी कुमारा या कुमारी शब्द से  साहित्य में सम्बोधित किया गया है -

                 कौ पृथिव्यां मोदयते इति कुमारः

जैसे…    "ताते अब लगि रहिउँ कुमारी ।" (सूर्पनखा )

              "अहइ कुमार मोर लघु भ्राता । "(श्री राम जी )   श्रीमती  श्रीमती शब्द का विवाहित  या अविवाहित पन से कोई लेना देना नहीं है । आनंद रामायण राज्य कांड के अनुशार "श्री" शब्द को सम्मान प्रदान करने वाला माना गया है इसीलिए इसे भगवान विष्णु ने धारण किया था "श्रीरिति विष्णुना धृतम् "देवी देवता शक्ति स्वरूप होते हैं ये कभी भी स्त्री पुरुष आदि कुछ भी बन सकते हैं इसीलिए श्री  राम जी और श्री सीता जी आदि आदि !किन्तु कहीं भी आपने श्रीमती राधा जी या और भी किसी देवी देवता के नाम के आगे श्रीमान श्रीमती शब्द का प्रयोग नहीं देखा होगा ।

    इसी प्रकार "श्री श्री 1008 "आदि साधू संत भी अपने नाम के आगे लिखवा ते हैं "श्रीमान  श्रीमान  1008 "आदि अपने नाम के साथ वो कभी नहीं लिखते हैं क्योंकि स्त्री पुरुष भावना से वो ऊपर उठ चुके होते हैं । 

      पाणिनीय व्याकरण के अनुशार श्रीमान - श्रीमती  जैसे शब्द तो लिंग  का विषय हैं अर्थात किसी पुरुषजाति  को सम्मान देने के लिए  श्रीमान  और स्त्री जाति  के लिए श्रीमती शब्द का प्रयोग किया जाएगा । इसलिए अविवाहिता लड़की या महिला भी स्त्री जाति से ही जुड़ी मानी जाती है अतः वह भी स्त्रीलिंग होने के कारण श्रीमती  ही कही जाएगी । यहाँ एक विशेष बात और यह है कि जहाँ लिंग स्पष्ट नहीं होता है वहाँ "श्री " शब्द से ही सम्मानित किया जाता है । 

  बहन बहन शब्द तो किसी भी महिला को सम्मानपूर्वक  सम्बोधित करने के लिए सबसे उपयुक्त शब्द है आजकल कुछ लड़कियाँ  बहन कहने से बुरा मान जाती हैं ऐसा देखा जाता है किन्तु यह उनकी प्रदूषित सोच को दर्शाता है इससे बचा जाना चाहिए !  

                       

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