चुनाव आयोग ध्यान दे -
मोदी जी भारत के सम्माननीय नागरिक हैं विधायक हैं एक प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी हैं यदि जनता का समर्थन मिला तो कल प्रधानमंत्री भी बन सकते हैं !ये सारे अधिकार सभी की तरह उन्हें भी संवैधानिक दृष्टि से प्राप्त हैं फिर उन पर ऊल जुलूल बयानबाजी क्यों ? सभी जिम्मेदार संवैधानिक संस्थाओं से निवेदन है कि अतिशीघ्र रोका जाए ये भाषायी प्रदूषण !
मोदी जी पर विरोधी नेता कितनी घटिहा बयान बाजी कर रहे हैं कोई उन्हें हत्यारा,कोई कसाई,कोई कातिल आदि क्या क्या नहीं बोल रहा है जनता के समर्थन से यदि वे प्रधानमंत्री बन ही गए तो क्या छवि बनेगी हमारे देश की !हमें क्या इतनी भी चिंता नहीं होनी चाहिए !किसी भी पार्टी के किसी भी नेता के राष्ट्र गौरवभंजक ऐसे सभी बयानों को प्रतिबंधित किया जाना चाहिए !
मोदी के विरुद्ध नेताओं के ऐसे उत्तेजक बयानों पर चुनाव आयोग ध्यान दे -
ममता बनर्जी जी का यह कहना कहाँ तक उचित एवं देशहित में है -
अगर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनते हैं तो देश जल उठेगा : ममता बनर्जी-NDTV
किन्तु ये समझ में नहीं आ रहा है कि ममता जी की इतनी भयंकर बात का अर्थ देश क्या निकाले ! क्या ममता जी कोई भविष्यवाणी कर रही हैं और यदि ऐसा है तो उसका आधार क्या है ?
दूसरी बात ममता जी देश वासियों को किसी अनहोनी से बचने के लिए सतर्क कर रही हैं यदि ऐसा है तो इसके प्रमाण क्या हैं आखिर ममता हों या मोदी दोनों ही मुख्यमंत्री पद पर प्रतिष्ठित हैं एक मुख्यमंत्री को दूसरे मुख्यमंत्री पर इतनी बड़ी आशंका !इसका स्पष्टीकरण ममता जी से माँगा जाना चाहिए और यदि उनके आरोप प्रमाणित हैं तो जांच होनी चाहिए !
तीसरी सबसे बड़ी बात यह है कि ममता जी वोटरों अर्थात देशवासियों को कहीं धमका तो नहीं रही हैं कि यदि आपने मोदी जी को वोट देकर अगर नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाया तो देश जल उठेगा!
रामदेव पर मौन क्यों हैं राहुल सोनियाँ ? -मायावती (IBN-7)
मायावती जी !आप भी तो ऊटपटांग भाषा शैली की स्वामिनी हैं कभी भी किसी को भी कुछ भी बक देती हैं आप !अपने से बड़े बूढ़े नेताओं को तू तड़ाक तो कभी भी का देती हैं सवर्णों को क्या क्या नहीं कहा है आपने ! अपनी अज्ञानता वश महर्षि मनु के सद साहित्य को समझ न पाने के कारण उन्हें भी सबकुछ बक चुकी हैं आप !विश्व प्रतिष्ठित गांधी जी के विषय में क्या क्या नहीं कहा था आपने !
इसलिए आपकी वाणी पर जिस तरह की सरस्वती माता की कृपा है और जैसी सभी नेताओं की वाणी पर होती है वैसी ही रामदेव की वाणी पर भी होगी आखिर उनमें भी इतना सोचने की सामर्थ्य कहाँ है अन्यथा वो व्यापार और राजनीति करने के लिए बाबा क्यों बनते ?
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