शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2014

raajeshvari

     अब बात केवल महँगाई भ्रष्टाचार तक ही सीमित नहीं है,समस्याएँ मुख बाए खड़ी हैं इसलिए आज देश में गम्भीर जन जागरण की आवश्यकता है,समाज के तन ,मन और आत्मा को  सजीव रखने वाले शिक्षा, दीक्षा(आध्यात्मिक शिक्षा),चिकित्सा जैसे अत्यंत मजबूत पिलर भी  आज हिलने लगे हैं  हर मनुष्य को मनुष्य बनाने वाले अत्यंत आवश्यक ये तीनों अमृत  तत्वों का निर्दयी लोग व्यापार करने लगे हैं इसलिए मनुष्यता विहीन मनुष्य पशुता की ओर  बढ़ता जा रहा है परिवार टूट रहे हैं बूढ़े लोग वृद्धाश्रमों में डाले जा रहे हैं बच्चे अनाथाश्रमों में भेजे जा रहे हैं जवान लोग पार्कों, पार्किंगों, होटलों आदि में "जहाँ सेक्स वहाँ प्यार बाकी सब बेकार" के सिद्धांत पर जी रहे हैं जेब में मोबाईल  तो है किन्तु बात किससे करें ,दरवाजे पर गाड़ियाँ तो खड़ी हैं किन्तु जाएँ किसके घर सबसे सब कुछ बिगड़ चुका है! सरकार और सरकारी लोग आम जनता पर अत्याचार करते  रहे हैं नौकरी मिलने की सैलरी,काम करने की घूस और  बुढ़ापा काटने के लिए पेंशन लेते हैं इतने पर भी हड़ताल !भोग पीठें बनाने के लिए योगासन बेचे जा रहे हैं ,बाबा लोग व्यापार कर रहे हैं !व्यापार से धन और धन के बल पर भोग भोग रहे हैं भोग से जेल !जेल के खेल से बचने के लिए राजनीति !
     ज्योतिषी लोग भगवान् बनकर भाग्य बदल रहे हैं ! भविष्य विक्रेता भविष्य भौंक रहे हैं मलमल बाबा कृपा का कारोबार धौंक रहे हैं ! पत्रकार पक्षकार बन रहे हैं
     सरकार बनाने के लिए अपनी अपनी अपाहिजनेस बताकर सीटें जीती जा  रही हैं फीडर पार्टियों को लूट सुविधा देकर बहुमत जुटाया जा रहा है फिर जो चुनाव  न जीत सकता हो उसके नेतृत्व में सरकार बनाई जाती है उसमें जो जिस पद के लिए सबसे अधिक अयोग्य हो उसके नेतृत्व में सरकार बनाना होता है जिसे  कभी बोलते न सुना गया हो उसे  स्पीकर बनाया जाता है जिसने राष्ट्र के विषय में कभी सोचा ही  न हो उसे राष्ट्रपति आदि आदि  पदों का वितरण किया जाता है ! इसप्रकार से सर्वाधिकार अपने हाथों में सुरक्षित रखे जाते हैं गाली खाने के लिए सरकार और सरकारी  लोग एवं धौंस ज़माने पैसा कमाने के लिए पर्दे के पीछे ठेकेदारों का विशाल कारोबार !!!

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