शुक्रवार, 7 मार्च 2014

दूसरों में दोष खोजने की जगह केजरीवाल जी आप स्वयं दीजिए जनता प्रश्नों के उत्तर !

  केजरीवाल हैं क्या और उन्होंने ऐसा किया क्या है क्यों कोई दे उनके प्रश्नों के उत्तर !केजरीवालजी से जनता को चाहिए कुछ प्रश्नों के उत्तर !  

       केजरीवाल जी !आप मोदी जी के सामने चुनाव लड़ना चाहते हैं क्यों मोदी जी के सामने आप अपनी तुलना कैसे करते हैं आपकी उनसे उम्र कम है अनुभव कम हैं जन सेवा त्याग बलिदान कम है प्राशासनिक अनुभव कम है वो तमाम विरोधियों के सक्रिय होने पर दस बारह वर्ष से सरकार चला रहे हैं किन्तु आप तो पचास दिन के अंदर अंदर सरकार छोड़कर भाग खड़े हुए ,नौकरी छोड़कर भाग खड़े हुए, अन्ना का आंदोलन छोड़कर भाग खड़े हुए,बच्चों की कसमें खाई थीं दिल्ली की जनता से कई वायदे किए थे सब तो सब छोड़ कर भाग खड़े हुए !

      आप अक्सर कहते हैं कि काँग्रेस और भाजपा वाले आपस मिले हुए हैं  आखिर इतना झूठ क्यों बोलते हैं आप !काँग्रेस और भाजपा ने एक दूसरे से मिलकर या एक दूसरे का समर्थन ले देकर कभी कोई सरकार नहीं बनाई है इसके बाद भी आप काँग्रेस और भाजपा की साँठ गाँठ तो सिद्ध करते हैं किन्तु अपने और काँग्रेस के सम्बन्धों का खुलासा क्यों नहीं करते हैं यदि आप काँग्रेस और भाजपा को भ्रष्टाचारी मानते हैं तो काँग्रेस के समर्थन से आपने सरकार क्यों बनाई थी ?

1. क्या अन्ना जी के त्याग बलिदान के सिद्धांतों को आप पसंद नहीं करते थे फिर भी अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए आपने अन्ना जी का उपयोग किया ?

2. आम आदमियों की पीड़ा आपको कब से हुई क्या आप एक अच्छे मकान में नहीं रहते थे क्या आप के घरमें गाड़ी नहीं हैं क्या आपके बच्चे सरकारी या सामान्य  स्कूलों में पढ़ते हैं !

3. जितने बड़े बड़े लोगों को आप इतनी आसानी से बेईमान बोल जाते हैं ये कोई आम आदमी कैसे कर सकता है इससे लगता है कि आप के पीछे कोई बड़ी राजनैतिक ताकत काम कर रही है !

4.अरविन्द जी ! आपने  चुनावों से पूर्व काँग्रेस से समझौता करने को मना  किया था किन्तु बाद में कर लिया !इसलिए आपकी बातों पर आपके अनुशार अब आम आदमी को कितना विश्वास करना चाहिए ?

5. दिल्ली की जनता ने यदि आप  को मुख न लगाया होता  तो क्यों भोग रही होती आज ये दुर्दशा ? आप पर भरोसा करने का ही परिणाम है जो आज तक  दिल्ली में छीछालेदर चल रही है सरकार बनाने बिगाड़ने का खिलवाड़ जारी है क्यों ?  

6. विकास के पथ पर नित्य नवीन ऊँचाइयाँ छू रहे गुजरात को क्यों बर्बाद कर देना चाहते हैं आप !और बनारस की शान्ति क्यों भंग कर देना चाहते  हैं आप!जब आपके बश का कुछ है ही नहीं ?

7. अरविन्द जी !मंत्री मुंत्री बनने के लोभ में बड़ी बड़ी नौकरियाँ छोड़ कर आम आदमी पार्टी से जुड़ने वाले लोग आगामी चुनावों में किसी भी कीमत पर चूकना नहीं चाहते हैं हर हालत में उन्हें मंत्री बनने की बेचैनी हो रही है चूके तो गए पाँच साल,आखिर खाली बैठे क्या करेंगे बेचारे !क्या भाजपा कार्यालय पर हमला करना इसी उतावलेपन की निशानी  नहीं है ?

8. अरविन्द जी !आखिर आपको मिलने का वक्त क्यों नहीं दिया मोदी जी ने ऐसा नहीं कि वो इतने व्यस्त रहे होंगे !किन्तु उन्हें पता था कि जैसे ही मुलाक़ात करके यहाँ से आप लोग निकलेंगे वैसे ही गुजरात को मोदी  ने किया  बर्बाद किया वाला काँग्रेसियों से लिखाकर लाया गया लेटर जेब से निकालकर आप पत्रकारों को पढ़कर सुनाने लगेंगे और उड़ाएँगे गुजरात के विकास का मजाक !ऐसा भला क्यों होने देते मोदी जी ?आप से न मिलकर उन्होंने बचा लिया गुजरात का गौरव !इसमें बुरा क्या है ?

9.अरविन्द जी ! जो अपने प्रदेश की शांति व्यवस्था को छिन्न भिन्न करके दूसरे प्रदेश बर्बाद करने निकला हो ऐसा जानते हुए भी कोई प्रजा प्रिय प्रशासक उससे मिलने का साहस कैसे कर सकता है ?

10.अरविन्द जी ! बिन्नी जैसे आम आदमियों को पकड़ते समय आप से गलती हुई या छोड़ते समय ?या आप से जुड़कर उन्होंने कोई भारी भूल की है आपको क्या लगता है ?

11. अरविन्द जी ! दिल्ली की सरकार बनाते समय जब आपने जनमत संग्रह करवाया था तो त्याग पात्र देते समय क्यों नहीं ?

12.अरविन्द जी ! आप महँगी गाड़ियों से चलते  हैं,  प्राइवेट विमानों से घूमते हैं, बड़े बड़े लोगों को गाली देते हैं मीडिआ आपकी कमजोरी है फिर भी गांधी जी के आंदोलन से  अपनी लीला मंडली की तुलना करते हैं आप !क्या समझते हैं कि  देश की जनता इतनी मूर्ख है कि आप अपने शिर में टोपी चिपकाए रहेंगे तो वो आपको आम आदमी समझती रहेगी क्या ?क्या आम आदमी ऐसा ही होता है जैसे आप हैं ?

13. अरविन्द जी !काँग्रेस की नीति रही है कि वो सरकार स्वच्छंदता पूर्वक शासन चलाती रही है सत्ता विरोधी भावना को कैस करने के लिए अपनी सरकार से चिपकी हुई  कुछ फीडर पार्टियाँ अपनी बुराई करने के लिए विभिन्न प्रदेशों में छोड़ देती रही है जिनका केवल इतना ही काम होता था काँग्रेस से क्रोधित हुए लोगों को काँग्रेस की बुराई करके अपने साथ फँसा लाएँ भाजपा के पास न जाने दें और जो  सीटें मिल जाती रही हैं उन्हें सामने रखकर काँग्रेस से मोल भाव करके फिर चिपक जाते रहे उन्हीं से और बनवा देते रहे उनकी सरकार !कभी कभी काँग्रेस के समर्थन से अपनी सरकार भी बनाई भले चल नहीं पाई हो !क्या काँग्रेस की उसी नीति का हिस्सा आम आदमी पार्टी है जो सत्ता विरोधी भावना को कैस करके कल काँग्रेस से मिलजुलकर बनाएगी सरकार ?यदि ऐसा है तो ये समाज से धोखा नहीं तो और क्या है ?

14.  अरविन्द जी !यदि आप शांति पूर्ण सरकार कुछ महीने या वर्ष पर्यन्त या जितने समय भी चला लेते उतने समय विवादित मुद्दे न छेड़ते और अपने उस मतदाता के विकास के लिए कुछ काम तो कर ही सकते थे जिसने आपको वोट दिया था किन्तु आपने अपना गेम फिट न बैठते देख जनता को न घर का छोड़ा न घाट का और निकल पड़े पी.एम.बनने के लिए !आप चाहते तो अगले चुनाव में उठा सकते  थे लोक पाल मुद्दा और मांग सकते थे लोकपाल पर जन समर्थन और जनता समझ सकती थी आपकी भी मजबूरी और देती आपको पूर्ण समर्थन बशर्ते आपने कुछ करके तो दिखाया होता केवल सबको बेईमान कह देने मात्र से जनता कैसे कर ले इतना बड़ा भरोस फिर भी जनता ने आप पर बहुत बड़ा भरोसा किया किन्तु आपने जनता को निराश क्यों किया?

15. अरविन्द जी !क्या अन्ना जी के साथ आप जुड़े ही अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए थे और यदि हाँ तो कम से कम इतना सोचा जाना चाहिए था कि उन्होंने गैर राजनैतिक जीवन जीते हुए जो समाज सेवा की थी उसी प्रकार से उन्हें संतुष्टि पूर्वक बाक़ी जीवन भी  जी लेने देते ! आपने वो सारा ऐसा घाल मेल किया कि जिससे आप पर तो लोगों ने अविश्वास किया ही अन्ना जी पर भी लोग प्रश्न उठाने लगे कि कहीं ऐसा तो नहीं है कि आप और अन्ना  जी परदे के पीछे से कोई गेम तैयार कर रहे हों !क्या अपनी राजनीति चमकाने के लिए किसी ऐसे व्यक्ति के विश्वसनीयता की बलि देना न्यायोचित था ?

16. अरविन्द जी !अब लोग आप पर भरोसा भी  इसलिए नहीं करते हैं और न ही कोई तवज्जो देते हैं क्योंकि आप अपने को पूर्व मुख्यमंत्री बताते हैं जबकि जनता आपको घबड़ाहट में भागा हुआ मुख्यमंत्री मानती है और यह इस लिए भी मानती है क्योंकि गद्दी छोड़ने के बाद आपने ऐसे कौन से मुद्दे उठाए या क्या प्रयास किए जिससे जन जीवन को सुव्यवस्थित करने की भावना झलकती हो आपने कुछ भी तो नहीं किया ! हाँ ,इतना अवश्य है कि सी. एम. बनने के बाद अब तो सबसे ऊँचा  पद अर्थात पी.एम.बनने के लिए मन मचलने लगा है इतने ऊपर को आपकी दृष्टि है कि अब तो आम आदमी की टोपी भी अक्सर आपके शिर से सरकने लगी है महोदय !क्या आम आदमी का साथ बस इतने दिनों के लिए ही जरूरी समझा था आपने ?

17. अरविन्द जी ! जब आप किसी पर आरोप लगाते हैं तो लोग भरोसा इसलिए भी आप पर अब नहीं करते हैं कि आपके आरोपों में प्रत्यक्ष सच इतना कम होता है कि जनता आपके वक्तव्यों को जब मथती है तो उसमें सच्चाई का मक्खन होता ही नहीं है आपकी विशेषता यह है कि कुछ तो आप आरोप लगाते समय जान समझ कर राजनैतिक झूठ बोल रहे होते हैं कुछ बोलने के बाद आपको पता लगता है कि यह जानकारी आपकी झूठ थी कुछ आपके बताने के बाद अपनी  विद्या बुद्धि अनुभवों से जनता समझ लेती है कि इस बात को आप डालडा मिला कर मथना  सिखा रहे हैं किन्तु यह सबसे अधिक घातक है क्योंकि इसमें मक्खन की जगह  जो कुछ निकलेगा वो डालडा ही होगा यह तो पक्का है किन्तु आप उस डालडा को भी मक्खन समझकर खाना  सिखा रहे हैं ।  इस प्रकार आपकी हार्दिक कुटिलता समझ चुका देश अब तुम्हारे हर आचरण में वक्तव्य में रहन सहन में हर यात्रा में भाँपने लगा है कि वहाँ जाकर तुम या तुम्हारे गिरोह के लोग क्या बोलेंगे और क्या क्या लीलाएँ  करेंगे! कई मीडिया के महात्मा लोग तो आपके पहुँचने से पहले ही खबरें तक बना लेते हैं कि वहाँ जाकर आपलोग  क्या क्या बोलेंगे कैसे कैसे किस किस पर आरोप लगाएँगे!इस प्रकार से आपके विरुद्ध  बनती जन भावनाओं को रोकने के  लिए आप क्या कुछ करना चाहेंगे या आपको लग रहा है कि आप जो कुछ कर रहे हैं वही ठीक है ?

18.अरविन्द जी !  जैसे आपने गुजरात के भ्रष्टाचार या मोदी जी की नाकामी के जो आरोप लगाए  हैं जनता कैसे मान लेगी उन्हें जब कि विकास युक्त दंगा मुक्त गुजरात उन्होंने दिया है शुरू शुरू में अनुभव के अभाव में विरोधियों का दंगा प्लान वो समझ नहीं सके उस घटना पर उन्हें जो कुछ बोला गया उसका सामना उन्होंने बड़े धैर्य से किया है कभी किसी को अपशब्द नहीं बोले और विकास करते चले गए !किन्तु दोबारा ऐसे किसी षडयंत्र की दाल नहीं गलने दी गुजरात में! इसे कहते हैं जन सेवा भावना !उन्होंने पी.एम. बनने के लिए भी कभी कोई भगदौड़ नहीं की, पार्टी ने जब जो जिम्मेदारी दी समर्पित सिपाही की भाँति उसका निर्वाह पूर्ण मनोयोग से करते दिखे ! ये उनकी दृढ़ इच्छा शक्ति का ही परिणाम है कि आज सारा देश उनकी ओर बड़ी आशा भरी निगाहों से देख रहा है इसलिए ऐसा कैसे कहा जा सकता है कि अरविन्द जी के अलावा बाकी सारे लोग मूर्ख हैं !वो मोदी जी को समझ नहीं पा रहे हैं !

       मोदी जी के जिस सेवा समर्पण का वहाँ की जनता ने एकबार नहीं कई  बार सम्मान किया है  उस सम्मान को झुठलाने पहुँचे थे तुम गुजरात! पहले ही यदि तुम्हारे मन में देश सेवा की भावना होती तो वहाँ से कुछ सीख कर आते कम से कम जनता का हृदय जीतना तो सीख ही लेते !किन्तु अपने को सबसे अधिक समझदार समझने के कारण ही न तो तुम्हें अन्ना के विचार अनुकरणीय लगे और न ही मोदी जी के , और अपने बश का कुछ है नहीं । अरे !कहीं तो टिक कर रहे होते !क्या कारण है कि आप केवल अपने को ही सबसे बड़ा बुद्धिमान ईमानदार विकास पुरुष आदि सब कुछ समझते हैं जिन जिन बातों की जनता को जरूरत होती है वो सब कुछ हम करेंगें ऐसा अचानक क्यों बकने लगते हैं आप !इसी कारण अबकी लोगों ने आपका जीना  दूभर कर दिया था कि आपने तो ये कहा था वो कहा था आदि आदि इसलिए अब जनता को बता दीजिए कि आप  वो राम राज्य लाएँगे   कब और कैसे ?

   और इसके साथ ही आप लोग इस लेख और लिंक को आप जरूर पढ़ें और समझें "आम आदमी पार्टी" बनने की सच्चाई !





     यही वो लेख है जिसके प्रकाशित होने के 26 दिन बाद घोषित की गई थी आम आदमी पार्टी। आप इस लेख को जरूर पढ़ें और इससे मिलाएँ आम आदमी पार्टी के लोगों का आचरण ! क्या आपको नहीं लगता है कि मेरी स्क्रिप्ट के आधार पर ही लिया गया है आम आदमी पार्टी बनाने का आइडिया और"आम आदमी पार्टी"नाम रखने का आइडिया भी वहीँ से लिया गया है जिसमें मेरी सहमति न लेना क्या अपराध नहीं है यदि हाँ तो ऐसे लोगों को ईमानदार कैसे कहा जा सकता है ? 



     मेरी उसी  स्क्रिप्ट(लेख) के आधार पर  अभिनयात्मक रूप से आज सारा आचरण करते दिख रहे हैं अरविन्द केजरी वाल।  आप यह लेख जरूर पढ़ें और हो सके तो अपनी टिप्पणी से हमें अवगत भी अवश्य  कराएँ (इसमें लिखने के बाद किसी भी प्रकार की एडीटिंग नहीं की गई है )

Wednesday, 31 October 2012



ऐ मेरे देश के शासको! अब तो विश्वास भी टूट रहा है!



  आम आदमी और नेताओं  में  इतनी दूरी आश्चर्य !


     इस देश  का आम आदमी कहॉं जाए अपनी पीड़ा किसे सुनावे ?जो न हिंदू और न ही मुशलमान है न हरिजन और न ही सवर्ण है।न स्त्री न ही पुरुष  है। न बच्चा न बूढ़ा है।वो see more...http://snvajpayee.blogspot.in/2012/10/blog-post_4683.html


 

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